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एक महीने में पढ़ाया सिर्फ एक ही पाठ
Updated Thu, 27 Jul 2017 10:38 PM IST
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आगरा। राजकीय इंटर कालेज (जीआईसी) में शिक्षा का बुरा हाल है। नये शैक्षिक सत्र का एक महीना पूरा होने को है, लेकिन जीआईसी की दसवीं (बी) कक्षा में हिंदी विषय का सिर्फ प्रथम पाठ ही पढ़ाया गया है। स्थिति यह थी कि कक्षा में 45 में से उपस्थित 35 छात्र हिंदी विषय से जुड़े एक भी सवाल का जवाब तक नहीं दे पाए।
संयुक्त शिक्षा निदेशक डा. महेंद्र देव ने 21 जुलाई को जीआईसी का निरीक्षण किया था। इसकी विस्तृत रिपोर्ट उन्होंने गुरुवार को जिलाधिकारी कार्यालय में भेजी। इसके अनुसार, वह सुबह पौने नौ बजे विद्यालय पहुंचे थे। कक्षा दसवीं (बी) में पहुंचे तो हिंदी विषय का समय था। मगर, विषय अध्यापक विशंभर दयाल पाराशर कक्षा में मौजूद नहीं थे।
उन्होंने छात्रों से हिंदी विषय से संबंधित सवाल-जवाब किए लेकिन एक भी छात्र जवाब नहीं दे पाया। तभी विषय अध्यापक पहुंच गए। उन्होंने बताया कि अब तक छात्रों को सिर्फ प्रथम पाठ ही पढ़ाया गया है। तब संयुक्त शिक्षा निदेशक ने पठन-पाठन में रुचि न लेने पर उनसे स्पष्टीकरण तलब किया है।
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कक्षा 11 (सी) की भौतिक विज्ञान प्रयोगशाला में विषय अध्यापक शैलेष यादव मौजूद नहीं थे। उनसे भी स्पष्टीकरण मांगा है। जीव विज्ञान एवं भौतिक विज्ञान प्रयोगशालाओं में प्रयोगात्मक सामग्री नहीं थी। उन्होंने प्रधानाचार्य को सभी अध्यापक और कर्मचारियों के फोटो, नाम, पदनाम एवं मोबाइल नंबर की सूची अपने कक्ष में लगाने को कहा।
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संयुक्त शिक्षा निदेशक डा. महेंद्र देव ने 21 जुलाई को जीआईसी का निरीक्षण किया था। इसकी विस्तृत रिपोर्ट उन्होंने गुरुवार को जिलाधिकारी कार्यालय में भेजी। इसके अनुसार, वह सुबह पौने नौ बजे विद्यालय पहुंचे थे। कक्षा दसवीं (बी) में पहुंचे तो हिंदी विषय का समय था। मगर, विषय अध्यापक विशंभर दयाल पाराशर कक्षा में मौजूद नहीं थे।
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उन्होंने छात्रों से हिंदी विषय से संबंधित सवाल-जवाब किए लेकिन एक भी छात्र जवाब नहीं दे पाया। तभी विषय अध्यापक पहुंच गए। उन्होंने बताया कि अब तक छात्रों को सिर्फ प्रथम पाठ ही पढ़ाया गया है। तब संयुक्त शिक्षा निदेशक ने पठन-पाठन में रुचि न लेने पर उनसे स्पष्टीकरण तलब किया है।
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कक्षा 11 (सी) की भौतिक विज्ञान प्रयोगशाला में विषय अध्यापक शैलेष यादव मौजूद नहीं थे। उनसे भी स्पष्टीकरण मांगा है। जीव विज्ञान एवं भौतिक विज्ञान प्रयोगशालाओं में प्रयोगात्मक सामग्री नहीं थी। उन्होंने प्रधानाचार्य को सभी अध्यापक और कर्मचारियों के फोटो, नाम, पदनाम एवं मोबाइल नंबर की सूची अपने कक्ष में लगाने को कहा।