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वेंटीलेटर पर है एसएन कालेज इमरजेंसी
Updated Sat, 17 Jun 2017 12:33 AM IST
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आगरा। इमरजेंसी मतलब, पर्याप्त दवाएं- नर्सिंग स्टाफ सतर्क। एसएन मेडिकल कालेज इमरजेंसी में हालात ठीक विपरीत। यहां दवाएं तो दूर की बात मरीज को सिरिंज और गॉज तक खुद ही लानी होती। ये हाल तब है जब सात मई को स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इमरजेंसी का निरीक्षण कर चुके हैं। उनके आगमन के लिए इमरजेंसी में कार्डिएक मानीटर लगाए गए, लेकिन अब इसमें से कुछ ने काम करना बंद कर दिया है।
यहां बाल रोग विभाग, सर्जरी, हड्डी, मेडिसिन विभाग के अनुभाग हैं। इसके अलावा किसी भी बीमारी के गंभीर मरीज को ओपीडी समय के बाद यहां भर्ती किया जाता है। बेड संख्या करीब 40 है और औसतन यहां रोजाना 80 मरीज आते हैं।
कमीशन में लगा इमरजेंसी का स्टाफ
इमरजेंसी में कमीशन को मोटा खेल है। यहां से प्राइवेट हास्पिटल में मरीजों को भेजा जाता है। प्रति मरीज 15 हजार रुपये मिलते हैं, जिसमें वार्ड ब्वाय, फार्मेसिस्ट समेत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की हिस्सेदारी तय है। बीते दिनों इसी कमीशन के लिए वार्ड ब्वाय और फार्मेसिस्ट में मारपीट हुई थी।
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जनप्रतिनिधियों ने मोढ़ा मुंह
एसएन के इन हालातों के लिए जनप्रतिनिधि भी कम दोषी नहीं। इन्होंने यहां की समस्याओं से मुंह मोढ़ लिया है। यहां इलाज कराना तो दूर की बात, समस्या जानने तक के लिए निरीक्षण नहीं करते। ये हाल तब है जब योगी सरकार की जनप्रतिनिधियों को सरकारी स्वास्थ्य संस्थान का निरीक्षण कर हालात परखने के निर्देश दिए हैं।
एसएन में दवाएं न मिलना सबसे बड़ी समस्या है। कई बार गरीब मरीजों के लिए सामाजिक संस्थाएं आगे आती हैं। अगर जनप्रतिनिधि और कालेज प्रशासन इसकी बेहतरी के लिए प्रयास करे तो हालात सुधर सकते हैं।
मुकेश जौहरी, समाजसेवी
गंदगी का अंबार है, पंखे-कूलर तक काम चलाऊ हैं। ये छोटी-मोटी समस्याएं भी हल हो जाएं तो भी मरीज को बड़ी राहत मिले। बजट के लिए जनप्रतिनिधियों को शासन से पैरवी करनी चाहिए।
रवि बंसल, समाजसेवी
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यहां बाल रोग विभाग, सर्जरी, हड्डी, मेडिसिन विभाग के अनुभाग हैं। इसके अलावा किसी भी बीमारी के गंभीर मरीज को ओपीडी समय के बाद यहां भर्ती किया जाता है। बेड संख्या करीब 40 है और औसतन यहां रोजाना 80 मरीज आते हैं।
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कमीशन में लगा इमरजेंसी का स्टाफ
इमरजेंसी में कमीशन को मोटा खेल है। यहां से प्राइवेट हास्पिटल में मरीजों को भेजा जाता है। प्रति मरीज 15 हजार रुपये मिलते हैं, जिसमें वार्ड ब्वाय, फार्मेसिस्ट समेत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की हिस्सेदारी तय है। बीते दिनों इसी कमीशन के लिए वार्ड ब्वाय और फार्मेसिस्ट में मारपीट हुई थी।
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जनप्रतिनिधियों ने मोढ़ा मुंह
एसएन के इन हालातों के लिए जनप्रतिनिधि भी कम दोषी नहीं। इन्होंने यहां की समस्याओं से मुंह मोढ़ लिया है। यहां इलाज कराना तो दूर की बात, समस्या जानने तक के लिए निरीक्षण नहीं करते। ये हाल तब है जब योगी सरकार की जनप्रतिनिधियों को सरकारी स्वास्थ्य संस्थान का निरीक्षण कर हालात परखने के निर्देश दिए हैं।
एसएन में दवाएं न मिलना सबसे बड़ी समस्या है। कई बार गरीब मरीजों के लिए सामाजिक संस्थाएं आगे आती हैं। अगर जनप्रतिनिधि और कालेज प्रशासन इसकी बेहतरी के लिए प्रयास करे तो हालात सुधर सकते हैं।
मुकेश जौहरी, समाजसेवी
गंदगी का अंबार है, पंखे-कूलर तक काम चलाऊ हैं। ये छोटी-मोटी समस्याएं भी हल हो जाएं तो भी मरीज को बड़ी राहत मिले। बजट के लिए जनप्रतिनिधियों को शासन से पैरवी करनी चाहिए।
रवि बंसल, समाजसेवी