आगरा: हाईकोर्ट के आदेश के बाद 171 शिक्षकों की बर्खास्तगी तय, फर्जीवाड़ा कर पाई थी नौकरी
- डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की बीएड सत्र 2004-05 के फर्जी प्रमाणपत्र लगाने वाले 195 शिक्षकों को जिले में तलाशा गया है, इसमें से 24 शिक्षकों की सेवा समाप्त की जा चुकी है
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हाईकोर्ट के आदेश बाद डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के फर्जी प्रमाणपत्र पर नौकरी पाने वाले आगरा जिले के 171 और शिक्षकों की सेवा समाप्ति का रास्ता साफ हो गया है। जिले में फर्जी प्रमाणपत्र वाले कुल 195 शिक्षक तलाशे गए थे, इसमें से 24 की सेवा समाप्त की जा चुकी है। वहीं, 54 शिक्षक ऐसे हैं, जिनका नाम टेंपर्ड प्रमाणपत्रों की सूची में है। फिलहाल इनको वेतन दिया जाना है। विश्वविद्यालय को टेंपर्ड प्रमाणपत्रों की जांच चार माह में पूरी करने का आदेश दिया गया है।
विशेष जांच दल (एसआईटी) की ओर से जारी डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के बीएड सत्र 2004-05 के फर्जी व टेंपर्ड प्रमाणपत्रों की सूची से जिले में बेसिक शिक्षा विभाग ने 249 परिषदीय शिक्षकों को तलाशा गया था। एसआईटी ने फर्जी प्रमाणपत्र वाले अभ्यर्थियों की तीन श्रेणियां बनाईं। इसमें 3637 शिक्षक फर्जी, 1084 टेंपर्ड अंकपत्र और 45 डुप्लीकेट रोलनंबर वाले थे।
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की ओर से दिसंबर 2019 में फर्जी प्रमाणपत्र वाले अभ्यर्थियों की सूची जारी कर उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया। अपना पक्ष रखने वाले 814 अभ्यर्थियों को छोड़कर बाकी 2823 को सात फरवरी 2020 को फर्जी घोषित कर दिया गया।
बेसिक शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालय की ओर से फर्जी घोषित किए गए अभ्यर्थियों की सूची में शामिल 24 शिक्षकों की 12 मई को सेवाएं समाप्त कर दीं। एक जुलाई 2020 को बीएसए की ओर से शाहगंज थाने में इन शिक्षकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। वेतन रिकवरी की प्रक्रिया शुरू होने से पहले बर्खास्त शिक्षक कोर्ट चले गए। बाद में कोर्ट के आदेश पर विश्वविद्यालय ने जिन 2823 अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र फर्जी घोषित किए थे, वह आदेश स्थगित कर दिया।
पक्ष रखने वाले 814 में से दो को छोड़कर बाकी को फर्जी घोषित किया
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपना पक्ष रखने वाले 814 अभ्यर्थियों में से दो को छोड़कर बाकी 812 को 29 जुलाई को फर्जी घोषित कर दिया था। दो अभ्यर्थी ऐसे थे, जो सत्र 2004-05 की परीक्षा में एक्स-स्टूडेंट के रूप में शामिल हुए थे, वह संबंधित सत्र के नहीं थे।
सात अभ्यर्थियों के साक्ष्य का परीक्षण किया जाएगा
विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. राजीव कुमार ने बताया कि अधिवक्ता के मुताबिक विश्वविद्यालय प्रशासन को अपना पक्ष रखने वाले 812 में से महज सात अभ्यर्थियों के साक्ष्य का परीक्षण फिर से करना है। इसके लिए एक माह का समय दिया गया है। वहीं, टेंपर्ड सूची में शामिल अभ्यर्थियों की जांच करके चार माह के अंदर रिपोर्ट देनी है। कोर्ट के आदेश का अध्ययन करके कोई कदम उठाया जाएगा।
बीएसए राजीव कुमार ने कहा कि हाईकोर्ट का निर्णय आने के बाद अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में वीडियो कांफ्रेंसिंग हुई। इसमें निर्देश दिया गया कि कोर्ट के आदेश का विधिवत अध्ययन किया जाए और शासन स्तर से जारी निर्देश के अनुरूप कदम उठाया जाए। अब निर्देश प्राप्त होने के बाद कोई कदम उठाया जाएगा।
इन 24 शिक्षकों की सेवा समाप्त की गई है
हरीचंद - स्कूल नगला गढ़ीमा अछनेरा
चंदन सिंह - स्कूल नगला साथा अछनेरा
सुधा - स्कूल बल्हेरा अकोला
कविता गौतम - स्कूल नगला अक्खे, बिचपुरी
रेनू कुमारी - स्कूल स्वामी बिचपुरी
निशिकांत - स्कूल लड़ामदा बिचपुरी
गीता - स्कूल लड़ामदा बिचपुरी
अश्विनी कुमार यादव - स्कूल भोगपुरा फतेहाबाद
सुरेखा - स्कूल कराही फतेहपुर सीकरी
योगेंद्र कुमार - स्कूल गढ़ी प्रतापपुरा जैतपुर
धर्मेश कुमार सिंह - स्कूल महुआ जैतपुर कलां
अरुण कुमार - स्कूल रहनकलां रोड खंदौली
राम किशोर - स्कूल सेमरा खंदौली
प्रमोद कुमार - स्कूल महुआखेड़ा खेरागढ़
आकांक्षा कुमारी - स्कूल गढ़ी ताल खेरागढ़
चेतन शर्मा - स्कूल राटौटी पिनाहट
कमल विक्रम - स्कूल कुकथरी पिनाहट
शैलेंद्र कुमार - स्कूल पिनाहट
योगेंद्र सिंह - स्कूल नौहारिका सैंया
सरिता कुमारी - स्कूल नगला धना सैंया
चंद्र शेखर - स्कूल पहचान शमसाबाद
दलवीर - स्कूल बड़ोबरा खुर्द शमसाबाद
पूनम कुमारी - स्कूल शंकरपुर शमसाबाद
विजय कुमारी - स्कूल कौलारा कला शमसाबाद