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वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पर बवाल, पुलिस पर पथराव, चार लोग घायल
Updated Fri, 05 Jan 2018 07:42 PM IST
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बवाल में घायल पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला
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मथुरा। गोकुल बैराज पर बने वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पर शुक्रवार की सुबह बवाल हो गया। मुआवजे की मांग को लेकर प्लांट पर तालाबंदी करने वाले किसानों को जब पुलिस ने हटाया तो पथराव कर दिया गया। धक्कामुक्की और हाथापाई हुई। पत्थर लगने से दो दरोगा और दो सिपाही चोटिल हो गए हैं। कुछ ग्रामीणों के भी चोट आई हैं। इस मामले में 75 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट की गई है। पांच को हिरासत में ले लिया गया है।
औरंगाबाद के किसानों की गोकुल बैराज पर बने वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए 1989 में जमीन ली गई थी। किसानों को 1991 में मुआवजा बांटा गया था। किसानों का आरोप है कि उन्हें बहुत कम मुआवजा दिया गया था। हर घर से नौकरी देने की भी बात कही गई थी। लेकिन किसी को नौकरी नहीं मिली। मुआवजा भी पूरा नहीं दिया। इसे लेकर किसान आंदोलन कर रहे हैं। शुक्रवार की सुबह को किसान गोकुल बैराज पर बने वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पर पहुंच गए और उस पर ताला डाल दिया। कहा कि जब तक प्रशासन पूरा मुआवजा नहीं देगा प्लांट को चलने नहीं देंगे।
हंगामे की सूचना पाकर नायब तहसीलदार प्रदीप कुमार शर्मा मौके पर पहुंचे और किसानों से बात शुरू की। वहीं ट्रीटमेंट प्लांट के गेट पर खड़े किसानों को पुलिस ने हटाना शुरू कर दिया। इसी बीच पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया गया। मौके पर मौजूद दो दरोगा और दो सिपाही पथराव कर रहे ग्रामीणों के पीछे लाठी उठाकर भागे तो इन लोगों ने घेर लिया और धक्कामुक्की की। पथराव में एसएसआई श्याम सिंह, एसआई संजय कुमार और सिपाही राजवीर और जितेंद्र चोटिल हो गए। वहीं उन्हें पकड़ लिया और मारपीट कर दी।
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बवाल बढ़ने की सूचना पर काई थानों की फोर्स पहुंच गई। पुलिस ने भीड़ पर लाठियां भांजनी शुरू कर दीं। इससे भगदड़ मच गई। बाद में एसपी ट्रैफिक डॉ. ब्रजेश कुमार सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट डॉ. बसंत अग्रवाल भी आ गए और ग्रामीणों को समझाया। एसपी ट्रैफिक ने बताया कि पथराव करने वाले और मारपीट करने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जा रहा है। पांच लोगों को हिरासत में ले लिया गया है।
पुलिस प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई
मथुरा। गोकुल बैराज के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पर हुए बवाल के लिए पुलिस और प्रशासनिक अफसर जिम्मेदार हैं। अफसरों ने ग्रामीणों के आंदोलन को बेहद हल्के में लिया। किसानों से वार्ता करने के लिए केवल नायब तहसीलदार और दो दरोगा, सिपाही भेज दिए गए। अगर शुरूआत में ही आला अफसर पहुंच जाते तो किसानों को आसानी के साथ समझाया जा सकता था।
मथुरा का पुलिस और प्रशासन कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने में पूरी तरह से फेल साबित हो रहा है। स्थिति यह है कि एक लंबे समय से मुआवजे की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों को बैठाकर उनकी बात नहीं सुनी जाती। या तो मुआवजा दिया जाए या फिर उन्हें समझाया जाए। शुक्रवार को जो हुआ वह अफसरों की लापरवाही के कारण ही था। औरंगाबाद के किसानों ने एक दिन पहले ही वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पर तालाबंदी करने का एलान कर दिया था। लेकिन अफसरों ने फिर भी गंभीरता के साथ नहीं लिया। किसी बड़े अफसर को अपने बीच न पाकर किसान भड़क गए थे। जब बवाल हो गया तब अफसरों की नींद टूटी और मौके पर पहुंचे।
दो मुकदमे दर्ज कराए गए
मथुरा। वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पर हुए पथराव और मारपीट के मामले में थाना सदरबाजार में दो एफआईआर दर्ज की गई हैं। इनमें से एक एफआईआर ट्रीटमेंट प्लांट के जेई ललित मोहन ने सरकारी कार्य में बाधा संबंधी कराई है, दूसरी एफआईआर सदर बाजार के एसएसआई श्याम सिंह ने बलवा और पुलिस कर्मियों से मारपीट की कराई है। उक्त जानकारी एसएसआई ने दी। उन्होेंने बताया कि दोनों मामलों में करीब 75 किसानों और महिलाओं के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। इनमें से 15 किसानों को नामजद किया गया है।
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औरंगाबाद के किसानों की गोकुल बैराज पर बने वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए 1989 में जमीन ली गई थी। किसानों को 1991 में मुआवजा बांटा गया था। किसानों का आरोप है कि उन्हें बहुत कम मुआवजा दिया गया था। हर घर से नौकरी देने की भी बात कही गई थी। लेकिन किसी को नौकरी नहीं मिली। मुआवजा भी पूरा नहीं दिया। इसे लेकर किसान आंदोलन कर रहे हैं। शुक्रवार की सुबह को किसान गोकुल बैराज पर बने वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पर पहुंच गए और उस पर ताला डाल दिया। कहा कि जब तक प्रशासन पूरा मुआवजा नहीं देगा प्लांट को चलने नहीं देंगे।
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हंगामे की सूचना पाकर नायब तहसीलदार प्रदीप कुमार शर्मा मौके पर पहुंचे और किसानों से बात शुरू की। वहीं ट्रीटमेंट प्लांट के गेट पर खड़े किसानों को पुलिस ने हटाना शुरू कर दिया। इसी बीच पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया गया। मौके पर मौजूद दो दरोगा और दो सिपाही पथराव कर रहे ग्रामीणों के पीछे लाठी उठाकर भागे तो इन लोगों ने घेर लिया और धक्कामुक्की की। पथराव में एसएसआई श्याम सिंह, एसआई संजय कुमार और सिपाही राजवीर और जितेंद्र चोटिल हो गए। वहीं उन्हें पकड़ लिया और मारपीट कर दी।
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बवाल बढ़ने की सूचना पर काई थानों की फोर्स पहुंच गई। पुलिस ने भीड़ पर लाठियां भांजनी शुरू कर दीं। इससे भगदड़ मच गई। बाद में एसपी ट्रैफिक डॉ. ब्रजेश कुमार सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट डॉ. बसंत अग्रवाल भी आ गए और ग्रामीणों को समझाया। एसपी ट्रैफिक ने बताया कि पथराव करने वाले और मारपीट करने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जा रहा है। पांच लोगों को हिरासत में ले लिया गया है।
पुलिस प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई
मथुरा। गोकुल बैराज के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पर हुए बवाल के लिए पुलिस और प्रशासनिक अफसर जिम्मेदार हैं। अफसरों ने ग्रामीणों के आंदोलन को बेहद हल्के में लिया। किसानों से वार्ता करने के लिए केवल नायब तहसीलदार और दो दरोगा, सिपाही भेज दिए गए। अगर शुरूआत में ही आला अफसर पहुंच जाते तो किसानों को आसानी के साथ समझाया जा सकता था।
मथुरा का पुलिस और प्रशासन कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने में पूरी तरह से फेल साबित हो रहा है। स्थिति यह है कि एक लंबे समय से मुआवजे की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों को बैठाकर उनकी बात नहीं सुनी जाती। या तो मुआवजा दिया जाए या फिर उन्हें समझाया जाए। शुक्रवार को जो हुआ वह अफसरों की लापरवाही के कारण ही था। औरंगाबाद के किसानों ने एक दिन पहले ही वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पर तालाबंदी करने का एलान कर दिया था। लेकिन अफसरों ने फिर भी गंभीरता के साथ नहीं लिया। किसी बड़े अफसर को अपने बीच न पाकर किसान भड़क गए थे। जब बवाल हो गया तब अफसरों की नींद टूटी और मौके पर पहुंचे।
दो मुकदमे दर्ज कराए गए
मथुरा। वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पर हुए पथराव और मारपीट के मामले में थाना सदरबाजार में दो एफआईआर दर्ज की गई हैं। इनमें से एक एफआईआर ट्रीटमेंट प्लांट के जेई ललित मोहन ने सरकारी कार्य में बाधा संबंधी कराई है, दूसरी एफआईआर सदर बाजार के एसएसआई श्याम सिंह ने बलवा और पुलिस कर्मियों से मारपीट की कराई है। उक्त जानकारी एसएसआई ने दी। उन्होेंने बताया कि दोनों मामलों में करीब 75 किसानों और महिलाओं के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। इनमें से 15 किसानों को नामजद किया गया है।