{"_id":"597636f44f1c1b04768b4870","slug":"161500919540-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"क्लीनिक में चल रहे दवा काउंटर होंगे बंद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
क्लीनिक में चल रहे दवा काउंटर होंगे बंद
Updated Tue, 25 Jul 2017 01:07 PM IST
विज्ञापन
Drugs
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आगरा। कंपनियों से सीधे दवा लेकर मरीजों से मनमानी कीमत वसूलने वाले डाक्टरों की क्लीनिक पर चल रहे दवा काउंटर बंद होंगे। इसके लिए बाकायदा मेडिकल स्टोर का लाइसेंस लेना होगा। ऐसा नहीं किया तो कंपनी डाक्टर को दवाएं सप्लाई नहीं करेंगे। जीएसटी लागू होने के बाद दवा कंपनियों की ये मजबूरी बन गई है।
जिले में करीब 3000 चिकित्सक हैं। अधिकांश चिकित्सक विभिन्न कंपनियों से सीधे दवाएं मंगाते हैं। चिकित्सक अपने मरीज को यही दवाएं लिखते भी हैं। इनके मिलने का ठिकाना उनके क्लीनिक पर बना काउंटर ही रहता था। अब जीएसटी लगने से कंपनियों की बिक्री का पूरा हिसाब-किताब रखा जाने लगा है। ऐसे में अब कंपनियां लाइसेंस प्राप्त मेडिकल स्टोर को ही दवा सप्लाई कर सकेंगे।
दवाओं से मिलता मोटा कमीशन
चिकित्सक संबंधित कंपनी की दवाएं लिखने पर मोटा कमीशन मिलता है। ये दवा की कीमत में 35-45 फीसद तक रहता है। खास बात, चिकित्सक की लिखी ये दवाएं उनके बताए काउंटर से ही मिलती, अन्य पर ये ढूंढे नहीं मिलेंगी। ऐसे में इनको खरीदना मरीज की मजबूरी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
जिले में करीब 3000 चिकित्सक हैं। अधिकांश चिकित्सक विभिन्न कंपनियों से सीधे दवाएं मंगाते हैं। चिकित्सक अपने मरीज को यही दवाएं लिखते भी हैं। इनके मिलने का ठिकाना उनके क्लीनिक पर बना काउंटर ही रहता था। अब जीएसटी लगने से कंपनियों की बिक्री का पूरा हिसाब-किताब रखा जाने लगा है। ऐसे में अब कंपनियां लाइसेंस प्राप्त मेडिकल स्टोर को ही दवा सप्लाई कर सकेंगे।
विज्ञापन
दवाओं से मिलता मोटा कमीशन
चिकित्सक संबंधित कंपनी की दवाएं लिखने पर मोटा कमीशन मिलता है। ये दवा की कीमत में 35-45 फीसद तक रहता है। खास बात, चिकित्सक की लिखी ये दवाएं उनके बताए काउंटर से ही मिलती, अन्य पर ये ढूंढे नहीं मिलेंगी। ऐसे में इनको खरीदना मरीज की मजबूरी है।
विज्ञापन