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अस्पतालों पर करोड़ों खर्च, लेकिन डॉक्टर नहीं
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सीएचसी में नहीं मिले डॉक्टर।
- फोटो : demo pic
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मैनपुरी। जिले में अस्पताल तो खूब हैैं, लेकिन ज्यादातर सरकारी चिकित्सालयों में मरीजों का इलाज फार्मासिस्ट और वार्ड ब्वाय ही करते हैं। इसलिए यहां के मरीजों को करोड़ों रुपये की लागत से खड़ी की गईं अस्पतालों की इमारतों में डॉक्टरों की कमी नासूर की तरह चुभती है। चिकित्सकों की तैनाती न होने से लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं।
जिले में स्वास्थ्य संसाधनों की कमी नहीं है, यहां दो जिला अस्पताल, एक 100 शैय्या अस्पताल, 100 शैय्या महिला विंग के अतिरिक्त नौ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, चार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और स्थिति यह है कि विशेषज्ञ चिकित्सक न होने के कारण मरीजों को सिर्फ रेफर किया जाता है। 35 नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों का उपचार फार्मासिस्ट और वार्ड ब्वाय के हवाले है।
भर्ती होते ही रेफर कर दिए जाते हैं मरीज
जिले के सबसे बड़े अस्पताल महाराजा तेज सिंह जिला अस्पताल में प्रतिदिन 900 से 1100 मरीज पहुंचते हैं। यहां डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को उचित उपचार नहीं मिल पाता है। यहां तैनात 12 डॉक्टरों में से एक इमरजेंसी ड्यूटी, एक पोस्टमार्टम और एक डॉक्टर कोर्ट ड्यूटी में तैनात रहता है। शेष नौ चिकित्सक ही इमरजेंसी और ओपीडी की व्यवस्थाएं देखी जा रही हैं।
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ये सियासी वादे हैं वादों का क्या
लोकसभा चुनाव में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं का मुद्दा राजनीतिक दलों ने खूब उठाया था। चुनाव खत्म होते ही यह मुद्दा बेदम हो गया है। अब न तो विरोध दल का इस मुद्दे पर ध्यान है, न ही सत्ताधारी दल ने डॉक्टरों की तैनाती को पहल की है। सपा के कार्यकारी जिलाध्यक्ष खुमान सिंह वर्ता कहते हैं कि सपा सरकार में सौ शैय्या, कई सीएचसी और पीएचसी बनवाईं।
अब जो लोग सरकार में हैं, उनकी जिम्मेदारी है कि वह डॉक्टरों की व्यवस्था करें। इधर भोगांव से भाजपा विधायक रामनरेश अग्निहोत्री का कहना है कि केंद्र और प्रदेश सरकार लोगों को बेहतर इलाज मुहैया करा रही हैं। प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना का लाभ लोगों को दिया जा रहा है। डॉक्टरों की तैनाती के लिए प्रयास किए जाएंगे।
डॉक्टरों की कमी के संबंध में कई बार शासन को पत्र लिखे गए हैं। एक बार फिर से डॉक्टरों के रिक्त पदों की जानकारी और मांग पत्र उच्चाधिकारियों को भेजा गया है।
डॉ. एके पांडेय, सीएमओ।
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जिले में स्वास्थ्य संसाधनों की कमी नहीं है, यहां दो जिला अस्पताल, एक 100 शैय्या अस्पताल, 100 शैय्या महिला विंग के अतिरिक्त नौ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, चार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और स्थिति यह है कि विशेषज्ञ चिकित्सक न होने के कारण मरीजों को सिर्फ रेफर किया जाता है। 35 नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों का उपचार फार्मासिस्ट और वार्ड ब्वाय के हवाले है।
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भर्ती होते ही रेफर कर दिए जाते हैं मरीज
जिले के सबसे बड़े अस्पताल महाराजा तेज सिंह जिला अस्पताल में प्रतिदिन 900 से 1100 मरीज पहुंचते हैं। यहां डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को उचित उपचार नहीं मिल पाता है। यहां तैनात 12 डॉक्टरों में से एक इमरजेंसी ड्यूटी, एक पोस्टमार्टम और एक डॉक्टर कोर्ट ड्यूटी में तैनात रहता है। शेष नौ चिकित्सक ही इमरजेंसी और ओपीडी की व्यवस्थाएं देखी जा रही हैं।
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ये सियासी वादे हैं वादों का क्या
लोकसभा चुनाव में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं का मुद्दा राजनीतिक दलों ने खूब उठाया था। चुनाव खत्म होते ही यह मुद्दा बेदम हो गया है। अब न तो विरोध दल का इस मुद्दे पर ध्यान है, न ही सत्ताधारी दल ने डॉक्टरों की तैनाती को पहल की है। सपा के कार्यकारी जिलाध्यक्ष खुमान सिंह वर्ता कहते हैं कि सपा सरकार में सौ शैय्या, कई सीएचसी और पीएचसी बनवाईं।
अब जो लोग सरकार में हैं, उनकी जिम्मेदारी है कि वह डॉक्टरों की व्यवस्था करें। इधर भोगांव से भाजपा विधायक रामनरेश अग्निहोत्री का कहना है कि केंद्र और प्रदेश सरकार लोगों को बेहतर इलाज मुहैया करा रही हैं। प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना का लाभ लोगों को दिया जा रहा है। डॉक्टरों की तैनाती के लिए प्रयास किए जाएंगे।
डॉक्टरों की कमी के संबंध में कई बार शासन को पत्र लिखे गए हैं। एक बार फिर से डॉक्टरों के रिक्त पदों की जानकारी और मांग पत्र उच्चाधिकारियों को भेजा गया है।
डॉ. एके पांडेय, सीएमओ।