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कटौती: फाल्ट और ट्रिपिंग से निकल रहा पसीना
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ऊना में भीषण गरमी में बच्चे अांचल में छुपाकर ले जाती महिला।
- फोटो : अमर उजाला
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एटा। चढ़ते तापमान के साथ बढ़ रही बिजली की मांग से उपकरण बेकार साबित हो रहे हैं। अघोषित कटौती के साथ फाल्ट-ट्रिपिंग, शटडाउन भी बढ़ गए हैं। मई के 25 दिनों में 280 ट्रांसफार्मर फुंक चुके हैं। ऐसे में शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली देने के दावे हवाई साबित हो रहे हैं।
शहरी खंड को 24 घंटे एवं ग्रामीण उपभोक्ताओं को 18 घंटे की आपूर्ति के दावे बेअसर साबित हो रहे हैं। झूलते तार, जर्जर उपकरण लोड नहीं झेल पा रहे। ऐसे में फाल्ट ट्रिपिंग बढ़ गई हैं। उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति नहीं मिल पा रही है। जिले में 36 विद्युत उपकेंद्र एवं 1.84 लाख विद्युत उपभोक्ता हैं।
तेज हवा में धराशायी हो रहे विद्युत पोल
जिले में तेज हवाओं में बिजली के खंभे धराशायी हो रहे हैं। तार टूट रहे हैं। दो दिन पूर्व शाम को चली तेज हवाओं के बाद जिले में पचास से अधिक विद्युत पोल उखड़ गए। इस दौरान सैकड़ों इंसुलेटर, आइसोलेटर आदि ध्वस्त हो गए। लाखों का नुकसान हुआ। रविवार को भी मरम्मत कार्य जारी रहा।
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रोज फुंक रहे 11 से अधिक ट्रांसफारमर
बढ़ता लोड कहें या बिजली चोरी। गर्मी के दिनों में डैमेज बढ़ गया है। छोटा मोटा नुकसान तो दूर जिले में प्रतिदिन विभिन्न क्षमताओं के 11 से अधिक ट्रांसफार्मर फुंक रहे हैं। मई के 25 दिन में डैमेज ट्रांसफार्मर की संख्या 280 है।
उपकरणों में भी आ रही खराबी
सबस्टेशनों पर भी उपकरणों में खराबी आ रही है। इसके चलते शटडाउन, फाल्ट-ट्रिपिंग बढ़ी है। दो दिन पूर्व गंगनपुर स्थित सबस्टेशन पर आइसोलेटर में आई खराबी के चलते तीन घंटे से अधिक पूरे शहर की आपूर्ति बाधित रही। सोमवार को भी शटडाउन से दो घंटे बिजली गुल रही।
18 घंटे आपूर्ति के दावे फेल हैं। यहां दस से बारह घंटे ही आपूर्ति हो पा रही है। शाम को छह बजे आने वाली बिजली सुबह सात बजे गुल हो जाती है। दिन में एक आधा घंटे के लिए ही आपूर्ति मिलती है।
जसवीर, वनगांव
ग्रामीण अंचल की जर्जर लाइनें लगातार दस घंटे भी आपूर्ति नहीं दे पा रहीं। गुरुवार की आंधी के बाद निधौली कलां, पिलुआ, सकीट क्षेत्र के दर्जनभर गांवों की आपूर्ति सुचारु नहीं हो पाई है।
इंशाअल्ला खां, बाबूगंज
ग्रामीण उपभोक्ताओं को बारह घंटे ही आपूति मिल पा रही है। सर्वाधिक परेशानी जर्जर उपकरणों एवं स्टाफ की है। सूचना के बाद भी फाल्ट की मरम्मत में कई दिन लग जाते हैं।
गौरव, निवासी घंटाघर
जिले का विद्युत लोड 11 मेगावाट का है। मांग के अनुरूप आपूर्ति भी मिल रही है। फाल्ट, ट्रिपिंग आदि के बाद भी 90 प्रतिशत आपूर्ति उपभोक्ताओं तक पहुंचाई जा रही है। -वीपी कठेरिया, अधिशासी अभियंता
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शहरी खंड को 24 घंटे एवं ग्रामीण उपभोक्ताओं को 18 घंटे की आपूर्ति के दावे बेअसर साबित हो रहे हैं। झूलते तार, जर्जर उपकरण लोड नहीं झेल पा रहे। ऐसे में फाल्ट ट्रिपिंग बढ़ गई हैं। उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति नहीं मिल पा रही है। जिले में 36 विद्युत उपकेंद्र एवं 1.84 लाख विद्युत उपभोक्ता हैं।
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तेज हवा में धराशायी हो रहे विद्युत पोल
जिले में तेज हवाओं में बिजली के खंभे धराशायी हो रहे हैं। तार टूट रहे हैं। दो दिन पूर्व शाम को चली तेज हवाओं के बाद जिले में पचास से अधिक विद्युत पोल उखड़ गए। इस दौरान सैकड़ों इंसुलेटर, आइसोलेटर आदि ध्वस्त हो गए। लाखों का नुकसान हुआ। रविवार को भी मरम्मत कार्य जारी रहा।
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रोज फुंक रहे 11 से अधिक ट्रांसफारमर
बढ़ता लोड कहें या बिजली चोरी। गर्मी के दिनों में डैमेज बढ़ गया है। छोटा मोटा नुकसान तो दूर जिले में प्रतिदिन विभिन्न क्षमताओं के 11 से अधिक ट्रांसफार्मर फुंक रहे हैं। मई के 25 दिन में डैमेज ट्रांसफार्मर की संख्या 280 है।
उपकरणों में भी आ रही खराबी
सबस्टेशनों पर भी उपकरणों में खराबी आ रही है। इसके चलते शटडाउन, फाल्ट-ट्रिपिंग बढ़ी है। दो दिन पूर्व गंगनपुर स्थित सबस्टेशन पर आइसोलेटर में आई खराबी के चलते तीन घंटे से अधिक पूरे शहर की आपूर्ति बाधित रही। सोमवार को भी शटडाउन से दो घंटे बिजली गुल रही।
18 घंटे आपूर्ति के दावे फेल हैं। यहां दस से बारह घंटे ही आपूर्ति हो पा रही है। शाम को छह बजे आने वाली बिजली सुबह सात बजे गुल हो जाती है। दिन में एक आधा घंटे के लिए ही आपूर्ति मिलती है।
जसवीर, वनगांव
ग्रामीण अंचल की जर्जर लाइनें लगातार दस घंटे भी आपूर्ति नहीं दे पा रहीं। गुरुवार की आंधी के बाद निधौली कलां, पिलुआ, सकीट क्षेत्र के दर्जनभर गांवों की आपूर्ति सुचारु नहीं हो पाई है।
इंशाअल्ला खां, बाबूगंज
ग्रामीण उपभोक्ताओं को बारह घंटे ही आपूति मिल पा रही है। सर्वाधिक परेशानी जर्जर उपकरणों एवं स्टाफ की है। सूचना के बाद भी फाल्ट की मरम्मत में कई दिन लग जाते हैं।
गौरव, निवासी घंटाघर
जिले का विद्युत लोड 11 मेगावाट का है। मांग के अनुरूप आपूर्ति भी मिल रही है। फाल्ट, ट्रिपिंग आदि के बाद भी 90 प्रतिशत आपूर्ति उपभोक्ताओं तक पहुंचाई जा रही है। -वीपी कठेरिया, अधिशासी अभियंता