{"_id":"5ceaaa48bdec22070460be4c","slug":"15588829387-agra-news97","type":"story","status":"publish","title_hn":"चित्रा के गांव में पानी को तरस रहे पशु-पक्षी और ग्रामीण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चित्रा के गांव में पानी को तरस रहे पशु-पक्षी और ग्रामीण
विज्ञापन
पानी के लिए खोदाई कराते लोग।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरसाना (मथुरा)। चित्रा के गांव चिकसौली में वैसे तो सात कुंड हैं। वर्तमान में सभी कुंड बूंद बूंद पानी को तरस रहे हैं। कुंडों में पानी न होने से पशु-पक्षी प्यासे मर रहे हैं। राधा की अष्ट सखियों में प्रधान सखी चित्रा के गांव में पशु पक्षियों को एक बूंद पानी नसीब नहीं हो रहा है।
प्रशासन की लापरवाही के कारण पशु-पक्षियों के साथ ग्रामीण भी परेशान हैं। वे अपने पशुओं को भी पानी नहीं पिला पा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले 12 वर्ष से प्रशासन की अनदेखी के चलते सातों कुंडों में से एक में भी पानी नहीं भरवाया गया। कुंडों को भरने के संसाधन भी समाप्ति की ओर हैं।
कुछ वर्ष पूर्व राकोंली माइनर से कुंडों व तालाबों को भरा जाता था। आज माइनर भी पानी के अभाव में सूखी पड़ी है। भीषण समस्या का अधिकारियों पर कोई असर नहीं है। गांव में तीन तरफ पहाड़ी होने के कारण यहां बोरिंग भी नहीं हो पाती है। छह कुंड तो ऐसे हैं, जिनका प्रमाण ग्रंथों में भी है। धौनी कुंड, बिहार कुंड, मोर कुंड, बिछुआ कुंड, गुलि कुंड का इतिहास श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़ा है।
विज्ञापन
गांव वालों ने कुंडों को भरने की ठानी, खोदाई शुरू
बरसाना। ग्रामीणों ने कुंडों को पानी से भरने की ठानी है। उन्होंने चंदा कर कुंडों की सफाई का कार्य जेसीबी से शुरू कराया है। खोदाई के बाद इन्हें भरने का जुगाड़ किया जाएगा। गांव के गोपाल, वीरेंद्र, विष्णु, कलुआ देवकीनंदन, विजय आदि व्यवस्था देख रहे हैं। गांव के राजेंद्र सिंह, सुरेश शर्मा का कहना है कि पानी की समस्या से प्रशासन को कई बार अवगत कराया, मगर कोई समाधान नहीं हुआ। जेसीबी से सफाई करा कर कुंडों में पानी भरवाया जाएगा।
विज्ञापन
प्रशासन की लापरवाही के कारण पशु-पक्षियों के साथ ग्रामीण भी परेशान हैं। वे अपने पशुओं को भी पानी नहीं पिला पा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले 12 वर्ष से प्रशासन की अनदेखी के चलते सातों कुंडों में से एक में भी पानी नहीं भरवाया गया। कुंडों को भरने के संसाधन भी समाप्ति की ओर हैं।
विज्ञापन
कुछ वर्ष पूर्व राकोंली माइनर से कुंडों व तालाबों को भरा जाता था। आज माइनर भी पानी के अभाव में सूखी पड़ी है। भीषण समस्या का अधिकारियों पर कोई असर नहीं है। गांव में तीन तरफ पहाड़ी होने के कारण यहां बोरिंग भी नहीं हो पाती है। छह कुंड तो ऐसे हैं, जिनका प्रमाण ग्रंथों में भी है। धौनी कुंड, बिहार कुंड, मोर कुंड, बिछुआ कुंड, गुलि कुंड का इतिहास श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़ा है।
विज्ञापन
गांव वालों ने कुंडों को भरने की ठानी, खोदाई शुरू
बरसाना। ग्रामीणों ने कुंडों को पानी से भरने की ठानी है। उन्होंने चंदा कर कुंडों की सफाई का कार्य जेसीबी से शुरू कराया है। खोदाई के बाद इन्हें भरने का जुगाड़ किया जाएगा। गांव के गोपाल, वीरेंद्र, विष्णु, कलुआ देवकीनंदन, विजय आदि व्यवस्था देख रहे हैं। गांव के राजेंद्र सिंह, सुरेश शर्मा का कहना है कि पानी की समस्या से प्रशासन को कई बार अवगत कराया, मगर कोई समाधान नहीं हुआ। जेसीबी से सफाई करा कर कुंडों में पानी भरवाया जाएगा।