166 साल का हुआ भारतीय रेल का सफर
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टूंडला। मंगलवार को भारतीय रेल का सफर 166 वर्ष का हो गया। इस मौके पर नार्थ सेंट्रल रेलवे मेंस यूनियन कार्यालय पर पदाधिकारियों ने मिष्ठान वितरण कर स्थापना दिवस मनाया गया।
वक्ताओं ने कहा कि भारतीय रेल का अपना गौरवशाली इतिहास है। 1848 में कोलकाता में ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेलवे कंपनी की स्थापना की गई थी और इसी वर्ष हावड़ा से रानीगंज तक रेल लाइन बिछाने का कार्य किया गया था।
भारत में रेलों का आरंभ अंग्रेजी हुकुमत ने अपने प्रशासनिक सुविधा के लिए छोटे स्तर पर किया गया था जो आज पूरे भारत में फैल चुका है। बलराम, राकेश कुमार, केपी सिंह, कैलाश चंद्र, जयकिशन अजवानी, कृष्णा मीना, विनोद यादव, देवेश गौतम, मीना देवी, आशा देवी, अनीता देवी, गजाला आदि मौजूद रहीं।
-भारतीय रेल की 16 अप्रैल 1853 को स्थापना की गई थी। आज भारतीय रेल का विश्व में चौथा और एशिया में दूसरा स्थान है। बावजूद इसके अभी भी बहुत सुधार की आवश्यकता है। रेल दुर्घटनाएं रुकनी चाहिए। स्टाफ की कमी और साफ-सफाई पर ध्यान की जरूरत है। ट्रेनों का टाइम-टेबल सुधारने के लिए प्रयास होने चाहिए।
एनपी सक्सेना, पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष एनसीआरएमयू
-भारतीय रेल के आधुनिकीकरण में सुधार हुआ है लेकिन अभी भी कुछ देशों से हम पीछे है। वर्क लोड बढ़ा है तो स्टाफ की कमी से काम धीमा रहता है। आधुनिकीकरण में अभी और तेजी लाने की जरूरत है। रेलवे आवास और सड़कों की स्थिति दयनीय है। इस पर ध्यान देने की जरूरत है।
-जयकिशन अजवानी, सहायक शाखा सचिव एनसीआरएमयू
भारतीय रेल ने अपने 166 वर्ष के गौरवशाली इतिहास में कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं। परंतु आज भी सवारी गाड़ी और मालगाड़ी के एक ही ट्रैक पर चलने से ट्रेनों की लेट लतीफी कम होने का नाम नहीं ले रही। ऐसे में जरूरत है कि पूरे भारत में मालगाड़ी के अलग ट्रैक की स्थापना की जाए और सवारी गाड़ी के लिए अलग।
वीके श्रीवास्तव, रिटायर्ड एसएस
रेलवे ने जहां कीर्तिमान स्थापित किए हैं, वहीं आज रेलवे के आवासों और सड़कों की स्थिति दयनीय है। इससे रेलवे की साख को बट्टा लग रहा है। स्टेशनों व उसके आसपास रहने वाली गंदगी पर्यटकों के सामने रेलवे की तस्वीर दिखाती है। इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
प्रमोद कुमार, रिटायर्ड रेलकर्मी