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जिला अस्पताल में निजी एंबुलेंस संचालकों की दबंगई
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मैनपुरी। जिला अस्पताल में निजी एंबुलेंस संचालकों की दबंगई के चलती है। 108 एंबुलेंस को रोकने के लिए प्राइवेट एंबुलेंस संचालक इमरजेंसी के सामने अपने वाहनों को खड़ा कर देते हैं। अगर किसी ने विरोध किया तो उसके साथ हाथापाई की जाती है। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती मरीजों के तीमारदार जरूरत पड़ने पर 108 नंबर पर सरकारी एंबुलेंस की मांग तो करते हैं, लेकिन उन्हें यह एंबुलेंस मिल नहीं पाती है। इसके पीछे प्राइवेट एंबुलेंस संचालकों की दबंगई है।
प्राइवेट एंबुलेंस संचालक इमरजेंसी के गेट पर अपनी एंबुलेंस आड़ी तिरछी खड़ी करके रास्ता रोक लेते हैं। ऐसे में सरकारी एंबुलेंस इमरजेंसी तक नहीं पहुंच पाती हैं। अगर तीमारदार विरोध करते हैं तो उनके साथ मारपीट की जाती है। मजबूरन तीमारदारों को प्राइवेट एंबुलेंस लेनी पड़ती है। हररोज जिला अस्पताल में ऐसे मामले सामने आते हैं, लेकिन अस्पताल प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं करता है।
केस नंबर-एक
मानिकपुर निवासी बिक्की अपने चाचा राहुल सिंह गौर को दुर्घटना में घायल होने पर जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां चार एंबुलेंस इमरजेंसी के मुख्य गेट पर खड़ी हुई थीं। इसके चलते वे समय से इमरजेंसी वार्ड में नहीं पहुंच पाए और उनकी मौत हो गई।
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केस नंबर-दो
नगर के मोहल्ला आगरा बाईपास रोड निवासी विकास ने बताया कि वह अपने बाबा को सांस की दिक्कत होने पर जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां एंबुलेंस रास्ते में लगी होने के कारण वह स्ट्रेचर की बजाय उन्हें गोदी में उठाकर ले गया। इससे वो गिरते-गिरते बचे।
केस नंबर-तीन
नगर के मोहल्ला राजा का बाग निवासी रामबेटी ने बताया कि वह अपने बच्चे को डायरिया की दिक्कत होने पर जिला अस्पताल लेकर पहुंची थीं। एंबुलेंस गेट पर ही खड़ी थीं। इसके चलते उन्हें इमरजेंसी तक पहुंचने में दिक्कत हुई।
जिला अस्पताल में एंबुलेंस एक नजर में
सामान्य एंबुलेंस- 03 ( एक बड़ी दो छोटी)
आधुनिक सुविधाओं से लैस एंबुलेंस- 04
जिले में 108 एंबुलेंस- 16
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प्राइवेट एंबुलेंस संचालक इमरजेंसी के गेट पर अपनी एंबुलेंस आड़ी तिरछी खड़ी करके रास्ता रोक लेते हैं। ऐसे में सरकारी एंबुलेंस इमरजेंसी तक नहीं पहुंच पाती हैं। अगर तीमारदार विरोध करते हैं तो उनके साथ मारपीट की जाती है। मजबूरन तीमारदारों को प्राइवेट एंबुलेंस लेनी पड़ती है। हररोज जिला अस्पताल में ऐसे मामले सामने आते हैं, लेकिन अस्पताल प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं करता है।
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केस नंबर-एक
मानिकपुर निवासी बिक्की अपने चाचा राहुल सिंह गौर को दुर्घटना में घायल होने पर जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां चार एंबुलेंस इमरजेंसी के मुख्य गेट पर खड़ी हुई थीं। इसके चलते वे समय से इमरजेंसी वार्ड में नहीं पहुंच पाए और उनकी मौत हो गई।
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केस नंबर-दो
नगर के मोहल्ला आगरा बाईपास रोड निवासी विकास ने बताया कि वह अपने बाबा को सांस की दिक्कत होने पर जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां एंबुलेंस रास्ते में लगी होने के कारण वह स्ट्रेचर की बजाय उन्हें गोदी में उठाकर ले गया। इससे वो गिरते-गिरते बचे।
केस नंबर-तीन
नगर के मोहल्ला राजा का बाग निवासी रामबेटी ने बताया कि वह अपने बच्चे को डायरिया की दिक्कत होने पर जिला अस्पताल लेकर पहुंची थीं। एंबुलेंस गेट पर ही खड़ी थीं। इसके चलते उन्हें इमरजेंसी तक पहुंचने में दिक्कत हुई।
जिला अस्पताल में एंबुलेंस एक नजर में
सामान्य एंबुलेंस- 03 ( एक बड़ी दो छोटी)
आधुनिक सुविधाओं से लैस एंबुलेंस- 04
जिले में 108 एंबुलेंस- 16