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गोवंशों के लिए कब्रगाह बनती जा रही गौशाला
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गोवंशों का कब्रगाह बन रहा सरकारी ‘आश्रय’
भरपेट चारा न मिलने के कारण गोवंश की बिगड़ती जा रही है हालत
80 गोवंश तोड़ चुके हैं दम गोशालाओं में
1230 गोवंशों को पहुंचाया गया था ट्रांसपोर्ट नगर के गोशाला में
05 गोवंश रविवार को गोशाला में पड़े हुए थे मृत
05 माह दो सौ से अधिक गोवंशों की मौत हो चुकी है।
अमर उजाला ब्यूरो
मैनपुरी। शहर में घूमने वाले गोवंश को आश्रय देने के लिए गोशाला खोली गई थी। यहां का दृश्य विचलित कर देने वाला है। मृत गोवंश के शवों को पक्षी नोच रहे थे तो वहीं अन्य कई गोवंश भी शिथिल अवस्था में पड़े थे। रोजाना दम तोड़ रहे गोवंशों को गोशाला में ही दफ्न कर दिया जाता है। इससे गोशाला अब गोवंश के लिए कब्रगाह बनती जा रही है।
शहर के ट्रांसपोर्ट नगर में अक्तूबर में गोशाला का निर्माण कराने के बाद यहां 1230 गोवंशों को पहुंचाया गया था। भरपेट चारा न मिलने के कारण गोवंश की हालत बिगड़ती जा रही है। रविवार को गोशाला में पांच गोवंश मृत पड़े हुए थे। इन गोवंश के शव को पक्षी नोच रहे थे। कर्मचारियों ने बताया कि शनिवार रात में ही बारिश से इनकी मौत हुई है। उनका कहना था कि रोजाना औसतन पांच से सात पशुओं की मौत हो जाती है। जिन्हें जेसीबी द्वारा पीछे के हिस्से में दफ्न कर दिया जाता है। आज जेसीबी के न आने से उन्हें नहीं दफ्न किया जा सका। अन्य कई गोवंश भी अपनी अंतिम सांसें गिन रहे थे। कर्मचारियों के अनुसार पांच माह दो सौ से अधिक गोवंशों की मौत हो चुकी है। वहीं नगर पालिका के रिकॉर्ड के अनुसार केवल 80 गोवंशों ने ही दम तोड़ा है।
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खाने को मिलता है सूखा भूसा
गोवंशों को खाने के लिए केवल सूखा भूसा मिलता है। इतना ही नहीं ये भूसा खुले में जमीन पर ही डाल दिया जाता है। जिसे गोवंश मिट्टी और गोबर से बीन-बीन कर खाते रहते हैं। इतना ही नहीं रविवार को कई पशु पीने के पानी के लिए छटपटा रहे थे, लेकिन नादों में पानी ही नहीं भरा गया था।
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लगातार गिरती जा रही है गोवंश की सेहत
एक माह पहले जो गोवंश अच्छे भले थे, उनकी सेहत भी अब खराब होने लगी है। हाल ये है कि अब उनसे चला भी नहीं जा रहा है। अगर एक बार वे बैठ जाते हैं तो फिर उनके लिए उठना मुश्किल हो जाता है। पूरी गोशाला में एक भी गोवंश ऐसा नहीं है, जिसकी सेहत न गिर रही है। ऐसे में गोवंश की मौत होना स्वाभाविक है।
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उपचार केवल नाम का
कहने को तो गोशाला में सुबह-शाम पशु चिकित्सक गोवंशों को उपचार देने के लिए आते हैं, लेकिन उपचार के नाम पर केवल खानापूरी की जाती है। एक गोवंश की टांग टूटी होने के चलते वह खड़ा भी नहीं हो पा रहा है। इसके बाद भी उसे कोई खास उपचार नहीं दिया गया है।
वर्जन
गोवंश की उचित देखभाल की जा रही है। जो गोवंश पहले से ही बीमार थे, उनकी ही मौत हो रही है।
मनोज रस्तोगी, ईओ नगर पालिका।
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गोवंशों का कब्रगाह बन रहा सरकारी ‘आश्रय’
भरपेट चारा न मिलने के कारण गोवंश की बिगड़ती जा रही है हालत
80 गोवंश तोड़ चुके हैं दम गोशालाओं में
1230 गोवंशों को पहुंचाया गया था ट्रांसपोर्ट नगर के गोशाला में
05 गोवंश रविवार को गोशाला में पड़े हुए थे मृत
05 माह दो सौ से अधिक गोवंशों की मौत हो चुकी है।
अमर उजाला ब्यूरो
मैनपुरी। शहर में घूमने वाले गोवंश को आश्रय देने के लिए गोशाला खोली गई थी। यहां का दृश्य विचलित कर देने वाला है। मृत गोवंश के शवों को पक्षी नोच रहे थे तो वहीं अन्य कई गोवंश भी शिथिल अवस्था में पड़े थे। रोजाना दम तोड़ रहे गोवंशों को गोशाला में ही दफ्न कर दिया जाता है। इससे गोशाला अब गोवंश के लिए कब्रगाह बनती जा रही है।
शहर के ट्रांसपोर्ट नगर में अक्तूबर में गोशाला का निर्माण कराने के बाद यहां 1230 गोवंशों को पहुंचाया गया था। भरपेट चारा न मिलने के कारण गोवंश की हालत बिगड़ती जा रही है। रविवार को गोशाला में पांच गोवंश मृत पड़े हुए थे। इन गोवंश के शव को पक्षी नोच रहे थे। कर्मचारियों ने बताया कि शनिवार रात में ही बारिश से इनकी मौत हुई है। उनका कहना था कि रोजाना औसतन पांच से सात पशुओं की मौत हो जाती है। जिन्हें जेसीबी द्वारा पीछे के हिस्से में दफ्न कर दिया जाता है। आज जेसीबी के न आने से उन्हें नहीं दफ्न किया जा सका। अन्य कई गोवंश भी अपनी अंतिम सांसें गिन रहे थे। कर्मचारियों के अनुसार पांच माह दो सौ से अधिक गोवंशों की मौत हो चुकी है। वहीं नगर पालिका के रिकॉर्ड के अनुसार केवल 80 गोवंशों ने ही दम तोड़ा है।
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खाने को मिलता है सूखा भूसा
गोवंशों को खाने के लिए केवल सूखा भूसा मिलता है। इतना ही नहीं ये भूसा खुले में जमीन पर ही डाल दिया जाता है। जिसे गोवंश मिट्टी और गोबर से बीन-बीन कर खाते रहते हैं। इतना ही नहीं रविवार को कई पशु पीने के पानी के लिए छटपटा रहे थे, लेकिन नादों में पानी ही नहीं भरा गया था।
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लगातार गिरती जा रही है गोवंश की सेहत
एक माह पहले जो गोवंश अच्छे भले थे, उनकी सेहत भी अब खराब होने लगी है। हाल ये है कि अब उनसे चला भी नहीं जा रहा है। अगर एक बार वे बैठ जाते हैं तो फिर उनके लिए उठना मुश्किल हो जाता है। पूरी गोशाला में एक भी गोवंश ऐसा नहीं है, जिसकी सेहत न गिर रही है। ऐसे में गोवंश की मौत होना स्वाभाविक है।
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उपचार केवल नाम का
कहने को तो गोशाला में सुबह-शाम पशु चिकित्सक गोवंशों को उपचार देने के लिए आते हैं, लेकिन उपचार के नाम पर केवल खानापूरी की जाती है। एक गोवंश की टांग टूटी होने के चलते वह खड़ा भी नहीं हो पा रहा है। इसके बाद भी उसे कोई खास उपचार नहीं दिया गया है।
वर्जन
गोवंश की उचित देखभाल की जा रही है। जो गोवंश पहले से ही बीमार थे, उनकी ही मौत हो रही है।
मनोज रस्तोगी, ईओ नगर पालिका।