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सर्दी में अस्थमा और दिल के मरीज बढ़े
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मैनपुरी। सर्दी के मौसम में अस्थमा और हृदय के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। जिला अस्पताल में तीन साल से हृदय रोग विशेषज्ञ न होने के कारण दिल के मरीजों के लिए परेशानी बनी हुई है। पिछले एक सप्ताह में इलाज न मिलने के कारण हार्ट अटैक से छह मरीजों की मौत हो चुकी है। वहीं अस्थमा से पीड़ित पांच मरीज दम तोड़ चुके हैं। जिला अस्पताल से प्रतिदिन दिल की बीमारी के 10 से 12 मरीज गंभीर हालत में रेफर किए जा रहे हैं।
सर्दी का मौसम दिल की बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए खतरनाक है। सर्दी बढने के साथ ही जिले में हृदय के मरीजों की संख्या बढने लगी है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन 70 से 80 मरीज पहुंच रहे हैं। इन मरीजों को उपचार देने में खानापूर्ति की जाती है। हृदय रोग के मरीजों के लिए जिला अस्पताल में उपचार की कोई व्यवस्था नहीं है। हृदय के मरीजों को आते ही रेफर कर दिया जाता है। गंभीर मरीजों की सैफई और आगरा पहुंचने से पहले ही मौत हो जाती है। जिला अस्पताल पहुंचे अस्थमा और हृदय के 11 मरीजों की बीते सप्ताह में मौत हो चुकी है। इसमें हृदय रोग से छह तथा अस्थमा से पांच मरीजों की मौत हुई है। रविवार को जिला अस्पताल से हृदय रोग से पीड़ित आठ मरीजों को गंभीर हालत के चलते रेफर किया गया। वहीं नगर के मोहल्ला छपट्टी निवासी 80 वर्षीय अब्दुल नवी को पिछले कुछ दिनों से अस्थमा की दिक्कत थी। परिजन गंभीर हालत में उन्हें लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। यहां उपचार शुरू होने से पहले ही उनकी मौत हो गई।
अस्थमा के मरीजों को भी नहीं मिलता है उचित उपचार
जिला अस्पताल में अस्थमा के मरीजों को भी उचित उपचार नहीं मिल पा रहा है। हालांकि जिला अस्पताल में चेस्ट फिजीशियन के रूप में डॉ. धर्मेंद्र कुमार की तैनाती है, लेकिन वे अधिकतर वीआईपी ड्यूटी, पोस्टमार्टम, इमरजेंसी ड्यूटी में ही व्यस्त रहते हैं। इसके चलते अस्थमा के मरीजों को भी रेफर कर दिया जाता है।
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हृदय विभाग कक्ष में ताला लटकने से लौट रहे मरीज
जिला अस्पताल में हृदय रोग विभाग में पिछले तीन साल से ताला लटक रहा है। इससे यहां आने वाले मरीजों को निराश ही वापस लौटना पड़ता है। लोगों का कहना है कि विभाग और जन प्रतिनिधियों को इसके लिए प्रयास करना चाहिए।
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सर्दी का मौसम दिल की बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए खतरनाक है। सर्दी बढने के साथ ही जिले में हृदय के मरीजों की संख्या बढने लगी है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन 70 से 80 मरीज पहुंच रहे हैं। इन मरीजों को उपचार देने में खानापूर्ति की जाती है। हृदय रोग के मरीजों के लिए जिला अस्पताल में उपचार की कोई व्यवस्था नहीं है। हृदय के मरीजों को आते ही रेफर कर दिया जाता है। गंभीर मरीजों की सैफई और आगरा पहुंचने से पहले ही मौत हो जाती है। जिला अस्पताल पहुंचे अस्थमा और हृदय के 11 मरीजों की बीते सप्ताह में मौत हो चुकी है। इसमें हृदय रोग से छह तथा अस्थमा से पांच मरीजों की मौत हुई है। रविवार को जिला अस्पताल से हृदय रोग से पीड़ित आठ मरीजों को गंभीर हालत के चलते रेफर किया गया। वहीं नगर के मोहल्ला छपट्टी निवासी 80 वर्षीय अब्दुल नवी को पिछले कुछ दिनों से अस्थमा की दिक्कत थी। परिजन गंभीर हालत में उन्हें लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। यहां उपचार शुरू होने से पहले ही उनकी मौत हो गई।
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अस्थमा के मरीजों को भी नहीं मिलता है उचित उपचार
जिला अस्पताल में अस्थमा के मरीजों को भी उचित उपचार नहीं मिल पा रहा है। हालांकि जिला अस्पताल में चेस्ट फिजीशियन के रूप में डॉ. धर्मेंद्र कुमार की तैनाती है, लेकिन वे अधिकतर वीआईपी ड्यूटी, पोस्टमार्टम, इमरजेंसी ड्यूटी में ही व्यस्त रहते हैं। इसके चलते अस्थमा के मरीजों को भी रेफर कर दिया जाता है।
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हृदय विभाग कक्ष में ताला लटकने से लौट रहे मरीज
जिला अस्पताल में हृदय रोग विभाग में पिछले तीन साल से ताला लटक रहा है। इससे यहां आने वाले मरीजों को निराश ही वापस लौटना पड़ता है। लोगों का कहना है कि विभाग और जन प्रतिनिधियों को इसके लिए प्रयास करना चाहिए।