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महादेव को चेन्नई-गुजरात के बेर से मनाएंगे भक्त
Updated Sun, 11 Feb 2018 11:23 PM IST
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बेर
- फोटो : अमर उजाला
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कासगंज। महाशिवरात्रि पर्व पर भक्त इस बार चेन्नई व गुजरात के बेर से महादेव को मनाएंगे। बाजार में अभी तक स्थानीय फसल नहीं आ सकी है। इसके बेर बाजार में 40 रुपये किलो तक बिक रहा है।
महाशिवरात्रि पर्व पर महादेव को बेलपत्र, भांग, धतूरा के साथ ही बेर का भोग लगाया जाता है। बेर की फसल जिले के बिलराम, सहावर के अलावा पड़ोसी जनपद के मारहरा में बड़ी तादाद में होती है। मारहरा के बेर तो दूर दूर तक प्रसिद्ध भी हैं।
यह फसल महाशिवरात्रि पर्व से कई दिन से पहले ही बाजार में आ जाती है। इस बार फसल की बाजार में आवक नहीं हुई है। शिवरात्रि पर्व में दो दिन का समय ही शेष है।
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बाजार में इस बार चेन्नई व गुजरात की फसल बाजार में आई हुई है। चेन्नई का बेर जहां 40 रुपये किलो बिक रहा है तो वहीं गुजरात के बेर 30 रुपये किलो तक बिक रहे हैं। स्थानीय फसल न आ पाने से बेर खाने के शौकीन भी मायूस हैं। मौसम में बदलाव का असर फसल पर पड़ रहा है। इसके कारण फसल को बाजार में आने में कई दिन लग सकते हैं - मोहम्मद रफी कारोबारी
स्थानीय फसल इस बार अच्छी नहीं हैं। इस बार फसल का उत्पादन गिरने की संभावना जताई जा रही है। स्थानीय फसल न आ पाने से पर्व को देखते हुए अन्य राज्यों की फसल को मंगाया गया है ताकि पर्व पर इनकी बिक्री की जा सके
- सरताज कारोबारी
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महाशिवरात्रि पर्व पर महादेव को बेलपत्र, भांग, धतूरा के साथ ही बेर का भोग लगाया जाता है। बेर की फसल जिले के बिलराम, सहावर के अलावा पड़ोसी जनपद के मारहरा में बड़ी तादाद में होती है। मारहरा के बेर तो दूर दूर तक प्रसिद्ध भी हैं।
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यह फसल महाशिवरात्रि पर्व से कई दिन से पहले ही बाजार में आ जाती है। इस बार फसल की बाजार में आवक नहीं हुई है। शिवरात्रि पर्व में दो दिन का समय ही शेष है।
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बाजार में इस बार चेन्नई व गुजरात की फसल बाजार में आई हुई है। चेन्नई का बेर जहां 40 रुपये किलो बिक रहा है तो वहीं गुजरात के बेर 30 रुपये किलो तक बिक रहे हैं। स्थानीय फसल न आ पाने से बेर खाने के शौकीन भी मायूस हैं। मौसम में बदलाव का असर फसल पर पड़ रहा है। इसके कारण फसल को बाजार में आने में कई दिन लग सकते हैं - मोहम्मद रफी कारोबारी
स्थानीय फसल इस बार अच्छी नहीं हैं। इस बार फसल का उत्पादन गिरने की संभावना जताई जा रही है। स्थानीय फसल न आ पाने से पर्व को देखते हुए अन्य राज्यों की फसल को मंगाया गया है ताकि पर्व पर इनकी बिक्री की जा सके
- सरताज कारोबारी