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मरीजों की भरमार, स्वास्थ्य सेवाएं बीमार
Updated Tue, 25 Jul 2017 11:51 PM IST
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अस्पताल में लगी मरीजों की लाइन
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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एटा।
योगी सरकार भले ही ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर जोर दे रही हो मगर चिकित्सकों की कमी सरकार के लिए बड़ी सिरदर्द बनी हुई है। चिकित्सकों के अभाव में कई स्वास्थ्य केंद्राें पर ताला लटका हुआ है। वर्तमान में 37 चिकित्सकों पर ही पूरे जिले की जिम्मेदारी है।
बिना पर्याप्त चिकित्सकों के स्वास्थ्य सेवाएं दम तोड़ती नजर आ रही हैं। सूरतेहाल यह है कि सीएमओ के अधीन चिकित्सकों के 93 पद स्वीकृत हैं इनके सापेक्ष 37 ही चिकित्सकों जिले में मौजूद है। इसके साथ ही तीन चिकित्सक ट्रेनिंग के लिए बाहर गए हुए है जिनकी एक साल बाद ही वापसी होगी। कुछ सीएचसी, पीएचसी के लिए एक-एक स्थायी चिकित्सक भी विभाग के पास नहीं। वहीं जिला अस्पताल की बात की जाए तो यहां भी कम से कम 27 चिकित्सक होने चाहिए मगर अस्पताल में केवल 12-13 ही चिकित्सक मौजूद है।
अस्पताल में सर्जन जैसे अहम पद पदों पर चिकित्सकों की तैनाती नही है। चिकित्सकाें की कमी के चलते स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से बेहाल हैं। प्राइवेट क्लीनिकों की फीस भरने में अक्षम ऐसे मरीज बेहतर इलाज के अभाव में दम तोड़ देते है। सीएमओ डा. एके यादव का कहना है कि चिकित्सकों की कमी को लेकर तत्कालीन सीएमओ द्वारा शासन को पत्र भेजकर अवगत कराया साथ ही बैठक के दौरान भी यह बात रखते है। मरीजों के बेहतर इलाज को लेकर स्वास्थ्य विभाग हर संभव प्रयास कर रहा है।
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झोलाछाप कर रहे कमाई
एटा। झोलाछापों का मकड़जाल कस्बों से लेकर गांव तक फैला है। कार्रवाई न होने के चलते बेखौफ झोलाछाप मरीजों को लूट रहे है। साथ ही इनकी वजह से सीएचसी.पीएचसी पर मरीज नही आते है।
आयुर्वेदिक चिकित्सकों के भी पद रिक्त
एटा। जिले में आयुर्वेदिक चिकित्सक के 18 पद स्वीकृत है मगर वर्तमान में छह ही चिकित्सक कार्यरत है।
जिला अस्पताल में अधिक मरीज
ब्यूरो
एटा। जिला अस्पताल में मंगलवार को काफी संख्या में मरीज पहुंचे। जिसमें सबसे ज्यादा मरीज सर्दी, जुकाम, वायरल फीवर के है। जिन्हे चिकित्सकों ने दवाई देते हुए सावधानी बरतने के सुझाव दिए।
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योगी सरकार भले ही ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर जोर दे रही हो मगर चिकित्सकों की कमी सरकार के लिए बड़ी सिरदर्द बनी हुई है। चिकित्सकों के अभाव में कई स्वास्थ्य केंद्राें पर ताला लटका हुआ है। वर्तमान में 37 चिकित्सकों पर ही पूरे जिले की जिम्मेदारी है।
बिना पर्याप्त चिकित्सकों के स्वास्थ्य सेवाएं दम तोड़ती नजर आ रही हैं। सूरतेहाल यह है कि सीएमओ के अधीन चिकित्सकों के 93 पद स्वीकृत हैं इनके सापेक्ष 37 ही चिकित्सकों जिले में मौजूद है। इसके साथ ही तीन चिकित्सक ट्रेनिंग के लिए बाहर गए हुए है जिनकी एक साल बाद ही वापसी होगी। कुछ सीएचसी, पीएचसी के लिए एक-एक स्थायी चिकित्सक भी विभाग के पास नहीं। वहीं जिला अस्पताल की बात की जाए तो यहां भी कम से कम 27 चिकित्सक होने चाहिए मगर अस्पताल में केवल 12-13 ही चिकित्सक मौजूद है।
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अस्पताल में सर्जन जैसे अहम पद पदों पर चिकित्सकों की तैनाती नही है। चिकित्सकाें की कमी के चलते स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से बेहाल हैं। प्राइवेट क्लीनिकों की फीस भरने में अक्षम ऐसे मरीज बेहतर इलाज के अभाव में दम तोड़ देते है। सीएमओ डा. एके यादव का कहना है कि चिकित्सकों की कमी को लेकर तत्कालीन सीएमओ द्वारा शासन को पत्र भेजकर अवगत कराया साथ ही बैठक के दौरान भी यह बात रखते है। मरीजों के बेहतर इलाज को लेकर स्वास्थ्य विभाग हर संभव प्रयास कर रहा है।
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झोलाछाप कर रहे कमाई
एटा। झोलाछापों का मकड़जाल कस्बों से लेकर गांव तक फैला है। कार्रवाई न होने के चलते बेखौफ झोलाछाप मरीजों को लूट रहे है। साथ ही इनकी वजह से सीएचसी.पीएचसी पर मरीज नही आते है।
आयुर्वेदिक चिकित्सकों के भी पद रिक्त
एटा। जिले में आयुर्वेदिक चिकित्सक के 18 पद स्वीकृत है मगर वर्तमान में छह ही चिकित्सक कार्यरत है।
जिला अस्पताल में अधिक मरीज
ब्यूरो
एटा। जिला अस्पताल में मंगलवार को काफी संख्या में मरीज पहुंचे। जिसमें सबसे ज्यादा मरीज सर्दी, जुकाम, वायरल फीवर के है। जिन्हे चिकित्सकों ने दवाई देते हुए सावधानी बरतने के सुझाव दिए।