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सावधान ! साइबर अपराधी केवाईसी के नाम पर कर रहे धोखाधड़ी, भूलकर भी ना करें यह गलती
Thu, 16 Jan 2020 04:37 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Thu, 16 Jan 2020 04:37 PM IST
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साइबर सुरक्षा
- फोटो : amar ujala
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साइबर अपराधियों ने धोखाधड़ी का नया तरीका निकाला है। कॉल करके ई वॉलेट कंपनी का प्रतिनिधि बनकर केवाईसी अपडेट करने की बात कहते हैं। इसके बाद मोबाइल पर एक लिंक भेजकर या फिर एप डाउन लोड कराकर खाते से रकम निकाल रहे हैं। आगरा में पुलिस के पास दो महीने में 15 से अधिक मामले आ चुके हैं। इनमें 10 केस नए साल में आए हैं।
साइबर अपराधी पहले बैंक मैनेजर बनकर कॉल कराते थे। लोगों को खाता और एटीएम कार्ड बंद होने का झांसा दिया जाता था। इसके बाद खाते की जानकारी लेकर रकम निकाल ली जाती थी। साइबर सेल में शिकायत आने के बाद पुलिस ने लोगों को जागरूक किया था।
अब साइबर अपराधियों ने एक और तरीका निकाला है। वो लोगों को मोबाइल के ई वालेट की केवाईसी अपडेट करने की बात कह रहे हैं। कॉल करके लिंक या एप डाउनलोड कराकर खाते से रकम निकाल लेते हैं।
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साइबर अपराधी पहले बैंक मैनेजर बनकर कॉल कराते थे। लोगों को खाता और एटीएम कार्ड बंद होने का झांसा दिया जाता था। इसके बाद खाते की जानकारी लेकर रकम निकाल ली जाती थी। साइबर सेल में शिकायत आने के बाद पुलिस ने लोगों को जागरूक किया था।
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अब साइबर अपराधियों ने एक और तरीका निकाला है। वो लोगों को मोबाइल के ई वालेट की केवाईसी अपडेट करने की बात कह रहे हैं। कॉल करके लिंक या एप डाउनलोड कराकर खाते से रकम निकाल लेते हैं।
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कई लोग हो चुके हैं ठगी का शिकार
केस : 1
शास्त्रीपुरम की रहने वाली राखी गुप्ता एक स्कूल में शिक्षिका हैं। पांच दिन पहले उनके मोबाइल पर एक कॉल आया था। कॉल करने वाले ने कहा कि पेटीएम कंपनी से बोल रहा हूं। ई वॉलेट के लिए केवाईसी अपडेट करनी है।
राखी से मोबाइल पर एक एप डाउनलोड करा लिया था। इसके बाद 10 रुपये ई वॉलेट में जमा करने का झांसा देकर खाते की जानकारी ले ली थी। बाद में उनके खाते से 50 हजार रुपये निकाल लिए थे।
केस : 2
शाहगंज क्षेत्र की रहने वाली युवती के पास भी डेढ़ महीने पहले एक कॉल आया था। कॉल करने वाले ने ई वालेट कंपनी का प्रतिनिधि बताया था। इसके बाद केवाईसी अपडेट के बहाने मोबाइल पर एक लिंक भेज दिया था। लिंक पर क्लिक करने पर खाते की जानकारी की जानकारी भरवाकर दस हजार रुपये निकाल लिए थे। पीड़िता ने पुलिस से शिकायत की थी।
शास्त्रीपुरम की रहने वाली राखी गुप्ता एक स्कूल में शिक्षिका हैं। पांच दिन पहले उनके मोबाइल पर एक कॉल आया था। कॉल करने वाले ने कहा कि पेटीएम कंपनी से बोल रहा हूं। ई वॉलेट के लिए केवाईसी अपडेट करनी है।
राखी से मोबाइल पर एक एप डाउनलोड करा लिया था। इसके बाद 10 रुपये ई वॉलेट में जमा करने का झांसा देकर खाते की जानकारी ले ली थी। बाद में उनके खाते से 50 हजार रुपये निकाल लिए थे।
केस : 2
शाहगंज क्षेत्र की रहने वाली युवती के पास भी डेढ़ महीने पहले एक कॉल आया था। कॉल करने वाले ने ई वालेट कंपनी का प्रतिनिधि बताया था। इसके बाद केवाईसी अपडेट के बहाने मोबाइल पर एक लिंक भेज दिया था। लिंक पर क्लिक करने पर खाते की जानकारी की जानकारी भरवाकर दस हजार रुपये निकाल लिए थे। पीड़िता ने पुलिस से शिकायत की थी।
यह रखें सावधानी
साइबर सेल के एसआई अमित कुमार ने बताया कि खाते और ई वालेट से संबंधित जानकारी फोन पर कोई भी बैंक और कंपनी नहीं लेती है। अगर, ऐसा कोई पूछता है, वह धोखाधड़ी कर रहा है। उसे जानकारी नहीं देनी चाहिए। किसी तरह के लिंक पर क्लिक न करें।
फोन पर अगर कोई अंजान व्यक्ति एप डाउनलोड कराकर केवाईसी अपडेट करने की कहे तो भरोसा नहीं करे। एप भी डाउनलोड नहीं करना चाहिए। एप के माध्यम से साइबर अपराधी मोबाइल की स्क्रीन को देख लेते हैं। इससे मोबाइल पर हर ट्रांजेक्शन की जानकारी भी उन्हें मिल जाती है।
झारखंड के बाद भरतपुर और मथुरा
साइबर सेल के मुताबिक, पहले कॉल करके खाते की जानकारी झारखंड का गैंग लेता था। पिछले एक साल से भरतपुर और मथुरा के गैंग का भी नाम सामने आया है। गैंग के सदस्य लोगों को कॉल करते हैं। इसके बाद केवाईसी के नाम पर जानकारी ले लेते हैं। उन्होंने इंटरनेट पर भी अपने नंबर डाल रखे हैं। अगर, कोई कॉल करता है तो भी जानकारी ले लेते हैं।
फोन पर अगर कोई अंजान व्यक्ति एप डाउनलोड कराकर केवाईसी अपडेट करने की कहे तो भरोसा नहीं करे। एप भी डाउनलोड नहीं करना चाहिए। एप के माध्यम से साइबर अपराधी मोबाइल की स्क्रीन को देख लेते हैं। इससे मोबाइल पर हर ट्रांजेक्शन की जानकारी भी उन्हें मिल जाती है।
झारखंड के बाद भरतपुर और मथुरा
साइबर सेल के मुताबिक, पहले कॉल करके खाते की जानकारी झारखंड का गैंग लेता था। पिछले एक साल से भरतपुर और मथुरा के गैंग का भी नाम सामने आया है। गैंग के सदस्य लोगों को कॉल करते हैं। इसके बाद केवाईसी के नाम पर जानकारी ले लेते हैं। उन्होंने इंटरनेट पर भी अपने नंबर डाल रखे हैं। अगर, कोई कॉल करता है तो भी जानकारी ले लेते हैं।