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आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर हादसों का सबब बन रहे आवारा पशु, 17 महीनों में 191 लोगों की मौत

Sun, 10 Mar 2019 04:17 AM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sun, 10 Mar 2019 04:17 AM IST
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145 accidents in 2018 due to animals on the Agra-Lucknow Expressway
फतेहाबाद में एक्सप्रेस वे पर घूमते आवारा पशु - फोटो : अमर उजाला
आगरा-एक्सप्रेसवे वाहन चालकों के लिए सुरक्षित नहीं रहा है। 17 महीने में 1966 सड़क हादसों में 191 मौतें हो चुकी हैं। वर्ष 2018 में इस एक्सप्रेसवे पर पशुआें के कारण 145 हादसे हुए हैं। इसका खुलासा आरटीआई के तहत अधिवक्ता केसी जैन द्वारा यूपीडा (उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण) से मांगी गई जानकारी के बाद हुआ है।
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उन्होंने हाल ही में यूपीडा से आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर हादसे और यहां गति सीमा उल्लंघन को रोकने के संबंध में जानकारी मांगी थी। इस पर यूपीडा ने बताया कि अगस्त 2017 से मार्च 2018 के बीच इस एक्सप्रेसवे पर 873 दुर्घटनाएं हुईं। इसमें 100 लोगों की मौत हुई। अप्रैल 2018 से दिसंबर 2018 के बीच इसी एक्सप्रेसवे पर 1113 सड़क हादसे हुए। 
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इसमें 91 लोगों की मृत्यु हुई। इस तरह कुल 17 महीने में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर 191 लोगों को असमय मौत का शिकार होना पड़ा। यूपीडा ने यह भी बताया कि 2018 में 145 सड़क दुर्घटनाएं पशुओं के कारण हुईं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि एक्सप्रेसवे के दोनों ओर जब रेलिंग और फेंसिंग है तो फिर पशु एक्सप्रेसवे पर कैसे आए। यदि रेलिंग या फेंसिंग टूटी है तो इसका कौन जिम्मेदार है। 
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वहीं, यूपीडा के पास गति सीमा उल्लंघन के संबंध में कोई जानकारी नहीं है। अधिवक्ता केसी जैन का कहना है कि इस एक्सप्रेसवे पर हल्के वाहन की निर्धारित गति सीमा 100 किमी प्रति घंटा है, गति सीमा उल्लंघन को रोकने के लिए यूपीडा ने अभी तक स्पीड कैमरे नहीं लगाए हैं। इस संबंध में अधिवक्ता ने मुख्यमंत्री और राज्यपाल को कुछ सुझाव भेजे हैं।


यह दिए गए सुझाव
. गति सीमा उल्लंघन के लिए चालान की प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
. पशुओं को एक्सप्रेसवे पर आने से रोकने के लिए रेलिंग और फेंसिंग दुरुस्त की जाएं।
. दुर्घटनाओं की जांच रिपोर्ट तैयार हो, ताकि उस आधार पर अपेक्षित कार्रवाई की जा सके।

कमाई खूब की
यूपीडा ने अवगत कराया है कि वर्ष 2018 में 96,33,739 वाहन विभिन्न टोल प्लाजा से गुजरे। वर्ष 2018 में 177 करोड़ से अधिक की राशि टैक्स के रूप में वसूली गई।
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