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शहर के कई इलाकों में बाढ़ जैसे बने हालात
Updated Thu, 26 Jul 2018 12:06 AM IST
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डेमो
- फोटो : डेमो
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मथुरा। बुधवार को हुई बारिश से शहर टापू बन गया। सड़कों पर बहते पानी में मोटरसाइकिल बह गई और कार डूब गईं। शहर की कोई कालोनी और मोहल्ला ऐसा नहीं था जहां की सड़कों पर घुटनों घुटनों पानी न रहा हो। जो जहां था वहीं फंस गया।
घरों से लोग निकल नहीं पाए। दुकानों के आगे भी पानी भर गया। कई मोहल्लों में तो घरों के भीतर तक पानी पहुंच गया। स्थिति यह थी कि बरसात तो दोपहर को ही बंद हो गई लेकिन पानी सड़कों पर शाम तक जमा रहा।
बुधवार सुबह को करीब दस बजे झमाझम बरसात शुरू हो गई। दो घंटे से भी अधिक समय तक बरसात हुई। बरसात के कारण भूतेश्वर, नए बस स्टैंड और पुराना बस स्टैंड के ओवर ब्रिज के नीचे पानी भरने से लोगों के लिए रास्ते बंद हो गए। वहीं, चंदनवन, द्वारिकापुरी और इंडस्ट्रियल एरिया, बल्देवपुरी आदि क्षेत्र की कालोनियों में लोगों के घरों में पानी घुस गया।
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परेशान लोगों ने किसी प्रकार से खुद को तथा परिवार को सामान को सुरक्षित किया। शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो गई थी। जो जहां था वहीं फंस गया।
पानी में घिरे रहे यह इलाके
चंदनवन, मोतीकुंज, महोली रोड, बल्देवपुरी एक्सटेंशन, बल्देवपुरी, माधवपुरी दीपनगर, शक्ति नगर, इंडस्ट्रीयल एरिया, द्वारिकापुरी, मोहनबाग कालोनी, अग्रसेन नगर आंनदपुरी, प्रोफेसर कालोनी, कृष्ण विहार फेस एक-दो-तीन मंशापुरी , टीचर कॉलोनी , जमुना विहार, मदन विहार सरस्वती विहार, चंदानगर, प्रकाश नगर, जनकपुरी, नवनीत नगर, मानसनगर, चंदा नगर, तेज नगर, प्रताप नगर, नटवर नगर, मोतीकुंज, बुध विहार कालोनी, मोती कुंज एक्सटेंशन, हनुमान नगर, मोती कुंज, चंदनवन आदि।
बारिश से दहशत में आ जाते एक लाख परिवार
जैसे ही बारिश होती है पुराने शहर में टीले पर बसे एक लाख परिवारों में दहशत फैल जाती है। उनको डर लगता है कि कहीं उनका मकान जमीन में धंस न जाए। क्षेत्र के पार्षद नीलम गोयल और रीतेश पाठक द्वारा कई दफा नगर निगम अधिकारियों को भी अवगत कराया।
यमुना किनारे बने टीले पर करीब एक लाख परिवार रह रहे हैं। इन परिवारों को पेयजल और पानी की निकासी के लिए अंग्रेजों के समय में पाइप लाइन डाली गईं थीं। सीवर लाइन तो लगभग पूरी तरह चोक है लेकिन पेयजल को बिछाई पाइप लाइन जर्जर होने के कारण टूटती रहती हैं और इसका पानी घरों की जड़ों में जाता रहता है। वहीं बारिश के बाद जमीन के सूखते ही लोगों के घरों में दरार आ जाती है। कई मकान दरार आने के चलते गिर भी चुके हैं।
वार्ड 59 की पार्षद नीलम गोयल का कहना है कि यह एक बड़ी समस्या है निगम को इससे निजात दिलाने के लिए कुछ उपाय करना चाहिए। इससे प्रभावित इसी क्षेत्र के निवासी पप्पू शर्मा शीतला घाटी, केशव पंडा, पुष्पा देवी, सोहन लाल, मुरारीलाल, केशव देव और प्रमोद ने बताया कि बारिश में भय लगा रहता है कि कौन सा घर दरक जाए।
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घरों से लोग निकल नहीं पाए। दुकानों के आगे भी पानी भर गया। कई मोहल्लों में तो घरों के भीतर तक पानी पहुंच गया। स्थिति यह थी कि बरसात तो दोपहर को ही बंद हो गई लेकिन पानी सड़कों पर शाम तक जमा रहा।
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बुधवार सुबह को करीब दस बजे झमाझम बरसात शुरू हो गई। दो घंटे से भी अधिक समय तक बरसात हुई। बरसात के कारण भूतेश्वर, नए बस स्टैंड और पुराना बस स्टैंड के ओवर ब्रिज के नीचे पानी भरने से लोगों के लिए रास्ते बंद हो गए। वहीं, चंदनवन, द्वारिकापुरी और इंडस्ट्रियल एरिया, बल्देवपुरी आदि क्षेत्र की कालोनियों में लोगों के घरों में पानी घुस गया।
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परेशान लोगों ने किसी प्रकार से खुद को तथा परिवार को सामान को सुरक्षित किया। शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो गई थी। जो जहां था वहीं फंस गया।
पानी में घिरे रहे यह इलाके
चंदनवन, मोतीकुंज, महोली रोड, बल्देवपुरी एक्सटेंशन, बल्देवपुरी, माधवपुरी दीपनगर, शक्ति नगर, इंडस्ट्रीयल एरिया, द्वारिकापुरी, मोहनबाग कालोनी, अग्रसेन नगर आंनदपुरी, प्रोफेसर कालोनी, कृष्ण विहार फेस एक-दो-तीन मंशापुरी , टीचर कॉलोनी , जमुना विहार, मदन विहार सरस्वती विहार, चंदानगर, प्रकाश नगर, जनकपुरी, नवनीत नगर, मानसनगर, चंदा नगर, तेज नगर, प्रताप नगर, नटवर नगर, मोतीकुंज, बुध विहार कालोनी, मोती कुंज एक्सटेंशन, हनुमान नगर, मोती कुंज, चंदनवन आदि।
बारिश से दहशत में आ जाते एक लाख परिवार
जैसे ही बारिश होती है पुराने शहर में टीले पर बसे एक लाख परिवारों में दहशत फैल जाती है। उनको डर लगता है कि कहीं उनका मकान जमीन में धंस न जाए। क्षेत्र के पार्षद नीलम गोयल और रीतेश पाठक द्वारा कई दफा नगर निगम अधिकारियों को भी अवगत कराया।
यमुना किनारे बने टीले पर करीब एक लाख परिवार रह रहे हैं। इन परिवारों को पेयजल और पानी की निकासी के लिए अंग्रेजों के समय में पाइप लाइन डाली गईं थीं। सीवर लाइन तो लगभग पूरी तरह चोक है लेकिन पेयजल को बिछाई पाइप लाइन जर्जर होने के कारण टूटती रहती हैं और इसका पानी घरों की जड़ों में जाता रहता है। वहीं बारिश के बाद जमीन के सूखते ही लोगों के घरों में दरार आ जाती है। कई मकान दरार आने के चलते गिर भी चुके हैं।
वार्ड 59 की पार्षद नीलम गोयल का कहना है कि यह एक बड़ी समस्या है निगम को इससे निजात दिलाने के लिए कुछ उपाय करना चाहिए। इससे प्रभावित इसी क्षेत्र के निवासी पप्पू शर्मा शीतला घाटी, केशव पंडा, पुष्पा देवी, सोहन लाल, मुरारीलाल, केशव देव और प्रमोद ने बताया कि बारिश में भय लगा रहता है कि कौन सा घर दरक जाए।