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एडवांस: आगरा केंद्र के लिए: योजनाओं के अभाव में बिलख रहा पिलखतरा: फोटो
Updated Thu, 31 May 2018 11:12 PM IST
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एडवांस: आगरा केंद्र के लिए: योजनाओं के अभाव में बिलख रहा पिलखतरा: फोटो
सांसद आदर्श गांव में योजनाएं का हाल बेहाल
महज आश्वासनों तक सिमट कर रह गया गांव का विकास
अमर उजाला ब्यूरो
जलेसर। तमाम वादे, आश्वासन और योजनाओं का ढिंढोरा, लेकिन मयस्सर कुछ भी नहीं। योजनाओं की बात करें तो सांसद रामशंकर कठेरिया का आदर्श गांव पिलखतरा आज भी बिलख रहा है। न तो शौचालय पूरे और न ही बिजली। उज्जवला भी घरों के चूल्हे नहीं बुझा सकी है। ऐसे में ग्रामीण बस पछताने को मजबूर हैं। आदर्श गांव होने का खिताब ग्रामीणों के दर्द को बढ़ा रहा है। पढ़िए रिपोर्ट...
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लाइटों को रोशन होने की उम्मीद
सांसद ने गांव को गोद लेने के बाद दो हाईमास्ट लाइटें मुहैया कराई थीं, लेकिन वे आज तक रोशन नहीं हो सकी हैं। पोल लगा दिए गए हैं, लेकिन सरकारी सुस्ती से लाइटें पोल पर लग नहीं सकीं। गांव के गरीब कनेक्शन को तरस रहे हैं।
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खुले में शौच जाते हैं लोग
स्वच्छता अभियान के तहत गांव में शौचालय निर्माण का राग छेड़ा गया, लेकिन आज भी लोग खुले में शौच जाते हैं। शौचालय बने हैं, लेकिन गुणवत्ता के अभाव में जर्जर हो चुके हैं।
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सपना बनकर रह गया इंटर कालेज
सांसद रामशंकर कठेरिया ने गांव को गोद लेने के बाद गांव के इंटर कालेज बनवाने का वादा किया, लेकिन वह भी पूरा नहीं हुआ। गांव पिलखतरा में बने उच्च प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक पहुंचते नहीं हैं, तो बच्चे पढ़ाई से वंचित हैं।
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टूटी पाइपलाइन, किसी को नहीं सुध
गांव में बनी पेयजल टंकी की पाइपलाइन जर्जर हो चुकी है। कई बार ग्रामीणों ने शिकायत की, लेकिन किसी को दुरुस्त कराने की सुध नहीं है। लीकेज होने के चलते गांव की गलियां जलमग्र हैं। ग्रामीण हैंडपंप का पानी पीने को मजबूर हैं।
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वादे नहीं हो सके पूरे
गांव के लोग एक बारातघर चाहते हैं, लेकिन चार साल में वो भी नहीं मिल सका। आंगनबाड़ी और खेल का मैदान नहीं होने से बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण बताते हैं कि सांसद ने आंगनबाड़ी, बारातघर और खेल मैदान का आश्वासन दिया, लेकिन वह पूरा नहीं हो सका।
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यहां भी चूल्हे पर पकती है रोटी
आदर्श गांव में उज्जवला योजना का हाल भी बेहाल है। घरों में चूल्हे पर खाना पकता है। कु छ घरों को योजना का लाभ मिला है, लेकिन जरूरतमंद योजना से कोसों दूर हैं।
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न दवा और न डाक्टर
गांव पिलखतरा में एक सरकारी अस्पताल बना है, लेकिन यहां न तो दवा है और न ही डाक्टर। ऐसे में जननी सुरक्षा योजना की उम्मीद बेमानी साबित होती है। महिलाओं को इलाज के लिए जलेसर और आगरा दौडना पड़ता है।
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सांसद आदर्श गांव में योजनाएं का हाल बेहाल
महज आश्वासनों तक सिमट कर रह गया गांव का विकास
अमर उजाला ब्यूरो
जलेसर। तमाम वादे, आश्वासन और योजनाओं का ढिंढोरा, लेकिन मयस्सर कुछ भी नहीं। योजनाओं की बात करें तो सांसद रामशंकर कठेरिया का आदर्श गांव पिलखतरा आज भी बिलख रहा है। न तो शौचालय पूरे और न ही बिजली। उज्जवला भी घरों के चूल्हे नहीं बुझा सकी है। ऐसे में ग्रामीण बस पछताने को मजबूर हैं। आदर्श गांव होने का खिताब ग्रामीणों के दर्द को बढ़ा रहा है। पढ़िए रिपोर्ट...
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लाइटों को रोशन होने की उम्मीद
सांसद ने गांव को गोद लेने के बाद दो हाईमास्ट लाइटें मुहैया कराई थीं, लेकिन वे आज तक रोशन नहीं हो सकी हैं। पोल लगा दिए गए हैं, लेकिन सरकारी सुस्ती से लाइटें पोल पर लग नहीं सकीं। गांव के गरीब कनेक्शन को तरस रहे हैं।
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खुले में शौच जाते हैं लोग
स्वच्छता अभियान के तहत गांव में शौचालय निर्माण का राग छेड़ा गया, लेकिन आज भी लोग खुले में शौच जाते हैं। शौचालय बने हैं, लेकिन गुणवत्ता के अभाव में जर्जर हो चुके हैं।
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सपना बनकर रह गया इंटर कालेज
सांसद रामशंकर कठेरिया ने गांव को गोद लेने के बाद गांव के इंटर कालेज बनवाने का वादा किया, लेकिन वह भी पूरा नहीं हुआ। गांव पिलखतरा में बने उच्च प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक पहुंचते नहीं हैं, तो बच्चे पढ़ाई से वंचित हैं।
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टूटी पाइपलाइन, किसी को नहीं सुध
गांव में बनी पेयजल टंकी की पाइपलाइन जर्जर हो चुकी है। कई बार ग्रामीणों ने शिकायत की, लेकिन किसी को दुरुस्त कराने की सुध नहीं है। लीकेज होने के चलते गांव की गलियां जलमग्र हैं। ग्रामीण हैंडपंप का पानी पीने को मजबूर हैं।
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वादे नहीं हो सके पूरे
गांव के लोग एक बारातघर चाहते हैं, लेकिन चार साल में वो भी नहीं मिल सका। आंगनबाड़ी और खेल का मैदान नहीं होने से बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण बताते हैं कि सांसद ने आंगनबाड़ी, बारातघर और खेल मैदान का आश्वासन दिया, लेकिन वह पूरा नहीं हो सका।
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यहां भी चूल्हे पर पकती है रोटी
आदर्श गांव में उज्जवला योजना का हाल भी बेहाल है। घरों में चूल्हे पर खाना पकता है। कु छ घरों को योजना का लाभ मिला है, लेकिन जरूरतमंद योजना से कोसों दूर हैं।
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न दवा और न डाक्टर
गांव पिलखतरा में एक सरकारी अस्पताल बना है, लेकिन यहां न तो दवा है और न ही डाक्टर। ऐसे में जननी सुरक्षा योजना की उम्मीद बेमानी साबित होती है। महिलाओं को इलाज के लिए जलेसर और आगरा दौडना पड़ता है।
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