{"_id":"5ad0be094f1c1b08638b4568","slug":"141523629577-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"डीएम से एनजीटी नाराज, 23 अप्रैल को फिर किया तलब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डीएम से एनजीटी नाराज, 23 अप्रैल को फिर किया तलब
Updated Fri, 13 Apr 2018 08:45 PM IST
विज्ञापन
एनजीटी
- फोटो : डैमो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मथुरा। डीएम और नगर आयुक्त सहित चार अफसरों की शुक्रवार को राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) में पेशी हुई। यहां सुनवाई के दौरान यमुना में नालों के गंदे पानी को लेकर तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध न कराए जाने पर एनजीटी ने तीखी नाराजगी जताई। इस पर डीएम सहित सभी अफसरों को फिर 23 अप्रैल को हाजिर होने के आदेश दिए हैं।
सिटीजन वेलफेयर सोसायटी की याचिका पर शुक्रवार को एनजीटी में सुनवाई हुई। छह अप्रैल के आदेश के तहत 13 अप्रैल को डीएम सर्वज्ञराम मिश्र, नगर आयुक्त डा.उज्ज्वल कुमार और महाप्रबंधक जलकल मंजू गुप्ता और जल निगम के अफसर एनजीटी पहुंचे। यहां यमुना को लेकर सुनवाई के दौरान उक्त अधिकारी एनजीटी के सवालों का जवाब नहीं दे सके। यहां तक कि डीएम सर्वज्ञराम मिश्र भी कई तथ्यों से अनिभिज्ञ थे।
एनजीटी के न्यायाधीश ने मथुरा में टेप नालों की संख्या, उत्सर्जित जल की मात्रा, एसटीपी और एसपीएस की संख्या, शोधित जल की क्षमता सहित यमुना में गिर रहे पानी की मात्रा की भी जानकारी ली। अधिकारी सब कुछ नहीं बता सके। इस पर नाराज एनजीटी ने संबंधित अफसरों को फिर तलब कर लिया। कहा कि 23 अप्रैल को सभी जानकारी शपथ पत्र के साथ दें। भविष्य में गंदे पानी को रोकने के लिए प्रस्तावित योजना की जानकारी भी शपथ पत्र पर ही दें।
विज्ञापन
गौरतलब रहे कि सिटीजन वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष उमेश भारद्वाज, संयोजक हेमंत अग्रवाल, कुसुमलता चौधरी और सचिव राजीव सिंह ने एनजीटी में यमुना प्रदूषण को लेकर उक्त याचिका दायर की है। इसमें सरकारी तंत्र द्वारा की जा रही अनदेखी और यमुना की वर्तमान दशा को भी वीडियो और फोटो के माध्यम से जाहिर किया है।
विज्ञापन
सिटीजन वेलफेयर सोसायटी की याचिका पर शुक्रवार को एनजीटी में सुनवाई हुई। छह अप्रैल के आदेश के तहत 13 अप्रैल को डीएम सर्वज्ञराम मिश्र, नगर आयुक्त डा.उज्ज्वल कुमार और महाप्रबंधक जलकल मंजू गुप्ता और जल निगम के अफसर एनजीटी पहुंचे। यहां यमुना को लेकर सुनवाई के दौरान उक्त अधिकारी एनजीटी के सवालों का जवाब नहीं दे सके। यहां तक कि डीएम सर्वज्ञराम मिश्र भी कई तथ्यों से अनिभिज्ञ थे।
विज्ञापन
एनजीटी के न्यायाधीश ने मथुरा में टेप नालों की संख्या, उत्सर्जित जल की मात्रा, एसटीपी और एसपीएस की संख्या, शोधित जल की क्षमता सहित यमुना में गिर रहे पानी की मात्रा की भी जानकारी ली। अधिकारी सब कुछ नहीं बता सके। इस पर नाराज एनजीटी ने संबंधित अफसरों को फिर तलब कर लिया। कहा कि 23 अप्रैल को सभी जानकारी शपथ पत्र के साथ दें। भविष्य में गंदे पानी को रोकने के लिए प्रस्तावित योजना की जानकारी भी शपथ पत्र पर ही दें।
विज्ञापन
गौरतलब रहे कि सिटीजन वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष उमेश भारद्वाज, संयोजक हेमंत अग्रवाल, कुसुमलता चौधरी और सचिव राजीव सिंह ने एनजीटी में यमुना प्रदूषण को लेकर उक्त याचिका दायर की है। इसमें सरकारी तंत्र द्वारा की जा रही अनदेखी और यमुना की वर्तमान दशा को भी वीडियो और फोटो के माध्यम से जाहिर किया है।