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नगर की सरकार के लिए वोटों के ध्रुवीकरण की जंग
Updated Wed, 15 Nov 2017 11:43 PM IST
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फिरोजाबाद। महापौर के लिए पहली बार हो रहे चुनाव में मतदाता खामोश हैं। महापौर पद के प्रत्याशी गली-गली घूम कर नुक्कड़ सभाएं कर रहे हैं। मतदाताओं की खामोशी ने बैचेनी बढ़ा दी है। महापौर के लिए 11 प्रत्याशियों के बीच मुकाबला है। वोटों के धुव्रीकरण के लिए कसरत हो रही है। जंग किसके बीच होगी तस्वीर अभी धुंधली है। अपना एजेंडा लेकर उम्मीदवार लोगों के बीच जा रहे हैं।
पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित महापौर की सीट पर किसे बैैठने का मौका मिलेगा। 29 नवंबर को नगर के पांच लाख मतदाता तय करेंगे। नगर निगम की सरकार के लिए मतदाता प्रत्याशियों का मन टटोल रहे हैं, लेकिन चुप्पी नहीं तोड़ रहे। टिकट को लेकर सभी दलों में घमासान रहा, इसका असर चुनाव दिखाई दे रहा है। भाजपा में टिकट के दावेदारों की लंबी सूची थी, लेकिन बाजी नूतन राठौर के हाथ लगी। नूतन ने गली-गली प्रचार शुरू कर दिया है।
बसपा ने पायल राठौर को उम्मीदवार बनाया है। एक ही समाज के दो उम्मीदवारों के बीच सजातीय वोटों की गोलबंदी के लिए अंदरखाने पंचायतों का दौर चल रहा है। समाज का वोट किसके साथ जाता है यह वक्त तय करेगा। बसपा अपने परंपरागत वोट के साथ दीगर जातियों और मुस्लिम वोटों पर नजरें लगाए है। भाजपा अपने वोट बैैंक को संजोने में जुटी है। समाजवादी पार्टी ने सावित्री देवी गुप्ता को मैदान में लाकर एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश की है।
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इसका संकेत सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने फरीदा में आयोजित सभा में यह कहते हुए दिए कि हमने इस बार व्यापारी वर्ग को टिकट दी है। सपा इस चुनाव में वैश्य कार्ड पर पूरा जोर लगाए हुए है। मुस्लिम वोटों के लिए पार्टी ने पूरी ताकत लगा दी है। कांग्रेस ने शहजहां परवीन को टिकट देकर मुस्लिम कार्ड खेला है। बहुचर्चित अंसार ग्लास परिवार के प्रत्याशी पर दांव लगा कर कांग्रेस ने समीकरणों को उलझा दिया है। एआईएमआईएम ने मशरूर फातिमा पर दांव लगाया है।
ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम यहां मुस्लिम मतों को एकजुट करने में पूरी ताकत लगाए हुए है। अन्य दलों से मुुस्लिमों की नाराजगी को इस चुनाव में अपने पक्ष में खड़ा करने के लिए बड़ी कवायद हो रही है। कई दलों ने मिल कर शशि देवी सविता को चुनाव में उतारा है और आम आदमी पार्टी ने सुनीता वर्मा को टिकट दिया है। मतदान अभी दूर है इसलिए चुनाव की तस्वीर धुंधली है। वोटों के धुव्रीकरण के लिए सभी दल एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। दिन में जनसंपर्क और रात को दीगर जातियों के बीच पंचायतें चल रही हैं। एक-एक वर्ग के वोट पर बिसात बिछाई जा रही है।
भीतरघात से सभी दल जूझ रहे हैं। भाजपा में टिकट को लेकर घमासान रहा। पार्टी का एक धड़ा अब भी खुद को दूर रखे हुए है। यही स्थिति सपा में है। सपा में मुस्लिम नेता की नाराजगी को पार्टी दूर नहीं कर पा रही है। कांग्रेस में गुटबाजी का अंदाजा से लगाया जा सकता हैै कि बीच में चुनाव में संगठन में फेरबदल करना पड़ा है।
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पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित महापौर की सीट पर किसे बैैठने का मौका मिलेगा। 29 नवंबर को नगर के पांच लाख मतदाता तय करेंगे। नगर निगम की सरकार के लिए मतदाता प्रत्याशियों का मन टटोल रहे हैं, लेकिन चुप्पी नहीं तोड़ रहे। टिकट को लेकर सभी दलों में घमासान रहा, इसका असर चुनाव दिखाई दे रहा है। भाजपा में टिकट के दावेदारों की लंबी सूची थी, लेकिन बाजी नूतन राठौर के हाथ लगी। नूतन ने गली-गली प्रचार शुरू कर दिया है।
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बसपा ने पायल राठौर को उम्मीदवार बनाया है। एक ही समाज के दो उम्मीदवारों के बीच सजातीय वोटों की गोलबंदी के लिए अंदरखाने पंचायतों का दौर चल रहा है। समाज का वोट किसके साथ जाता है यह वक्त तय करेगा। बसपा अपने परंपरागत वोट के साथ दीगर जातियों और मुस्लिम वोटों पर नजरें लगाए है। भाजपा अपने वोट बैैंक को संजोने में जुटी है। समाजवादी पार्टी ने सावित्री देवी गुप्ता को मैदान में लाकर एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश की है।
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इसका संकेत सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने फरीदा में आयोजित सभा में यह कहते हुए दिए कि हमने इस बार व्यापारी वर्ग को टिकट दी है। सपा इस चुनाव में वैश्य कार्ड पर पूरा जोर लगाए हुए है। मुस्लिम वोटों के लिए पार्टी ने पूरी ताकत लगा दी है। कांग्रेस ने शहजहां परवीन को टिकट देकर मुस्लिम कार्ड खेला है। बहुचर्चित अंसार ग्लास परिवार के प्रत्याशी पर दांव लगा कर कांग्रेस ने समीकरणों को उलझा दिया है। एआईएमआईएम ने मशरूर फातिमा पर दांव लगाया है।
ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम यहां मुस्लिम मतों को एकजुट करने में पूरी ताकत लगाए हुए है। अन्य दलों से मुुस्लिमों की नाराजगी को इस चुनाव में अपने पक्ष में खड़ा करने के लिए बड़ी कवायद हो रही है। कई दलों ने मिल कर शशि देवी सविता को चुनाव में उतारा है और आम आदमी पार्टी ने सुनीता वर्मा को टिकट दिया है। मतदान अभी दूर है इसलिए चुनाव की तस्वीर धुंधली है। वोटों के धुव्रीकरण के लिए सभी दल एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। दिन में जनसंपर्क और रात को दीगर जातियों के बीच पंचायतें चल रही हैं। एक-एक वर्ग के वोट पर बिसात बिछाई जा रही है।
भीतरघात से सभी दल जूझ रहे हैं। भाजपा में टिकट को लेकर घमासान रहा। पार्टी का एक धड़ा अब भी खुद को दूर रखे हुए है। यही स्थिति सपा में है। सपा में मुस्लिम नेता की नाराजगी को पार्टी दूर नहीं कर पा रही है। कांग्रेस में गुटबाजी का अंदाजा से लगाया जा सकता हैै कि बीच में चुनाव में संगठन में फेरबदल करना पड़ा है।