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आनंदमय जीवन के लिए योग जरूरी: आचार्य स्वदेश
Updated Mon, 19 Jun 2017 11:35 PM IST
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आनंदमय जीवन जीना है तो योग से जुड़ना होगा: आचार्य स्वदेश
- फोटो : अमर उजाला
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कासगंज। पतंजलि योग समिति एवं भारत स्वाभिमान ट्रस्ट हरिद्वार के केंद्रीय प्रभारी आचार्य स्वदेश का कहना है कि यदि आनंदमय एवं शांत जीवन जीना है तो निश्चित रूप से हमें योग से जुड़ना पड़ेगा। योग का तात्पर्य आसन और प्राणायाम तक सीमित नहीं है, ये तो योग करने के एकमात्र साधन हैं।
आचार्य स्वदेश ने पतंजलि चिकित्सालय सुकेंद्र सदन के शुभारंभ के मौके पर अमर उजाला से योग पर खास बातचीत की। उन्होंने कहा कि मनुष्य शक्ति का केंद्र है। जहां शक्ति होती है वहीं आनंद होता है। उन्होंने कहा कि परमात्मा आनंद का स्वरूप इसलिए है, क्योंकि वह शक्तिशाली है।
हमें भी उस शक्ति को विकसित करना है,जो परमात्मा से मिला दे। वह शक्ति मनुष्य के अंदर ही निहित है। शक्ति के विकास के लिए जो शिक्षा दी जाती है उसका ही नाम योग है। आचार्य स्वदेश ने बताया कि श्रष्टि का यह नियम है, कि ज्ञान कभी फल नहीं देता जब तक वह परम में परिवर्तित न कर दिया जाए।
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उन्होंने बताया कि इसलिए महर्षि पतंजलि ने केवल योग ही नहीं क्रिया योग को भी प्रधानता दी है। जन्मों के द्वंदों के बीच में अपनी आत्मा को स्थित करना योगाभ्यास है। उन्होंने द्वंदों के उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे हानि-लाभ, जय-पराजय, मान-अपमान, जन्म-मृत्यु, सुख-दुख इन सब के मध्य में अपने को स्थिर करना योग कहलाता है।
आचार्य स्वदेश ने कहा कि अब योग के प्रति लोग जागरूक हुए हैं। देश और विदेश में लोग योग के मिशन से जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पतंजलि योग समिति योग के व्यापक प्रचार,प्रसार और लाभ व्यकित् को देने के लिए मिशन के रूप में कार्य कर रही है। देश, विदेश, गांव, कस्बा, शहर हर जगह केंद्र स्थापित करके लोगों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
पांच उपयोगी आसन-
1. सिद्धासन
2. बज्रासन
3. सर्पासन
4. मण्डूकआसन
5. श्वासन
पांच महत्वपूर्ण प्रणायाम-
1. अनुलोम-विलोम
2. कपालभांति
3. कुंभक
4. रेचक
5. भस्त्रिका
करें योग रहें निरोग
कासगंज। पतंजलि चिकित्सालय के योगाचार्य आईडी शर्मा का कहना है कि योग प्रत्येक व्यक्ति को अपनाना चाहिए, क्योंकि इससे त्वरित लाभ व्यक्ति को प्राप्त होता है। निरोगी काया के लिए, रोगों से बचाव के लिए योग और प्रणायाम जरूरी है।
आचार्य स्वदेश ने पतंजलि चिकित्सालय सुकेंद्र सदन के शुभारंभ के मौके पर अमर उजाला से योग पर खास बातचीत की। उन्होंने कहा कि मनुष्य शक्ति का केंद्र है। जहां शक्ति होती है वहीं आनंद होता है। उन्होंने कहा कि परमात्मा आनंद का स्वरूप इसलिए है, क्योंकि वह शक्तिशाली है।
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हमें भी उस शक्ति को विकसित करना है,जो परमात्मा से मिला दे। वह शक्ति मनुष्य के अंदर ही निहित है। शक्ति के विकास के लिए जो शिक्षा दी जाती है उसका ही नाम योग है। आचार्य स्वदेश ने बताया कि श्रष्टि का यह नियम है, कि ज्ञान कभी फल नहीं देता जब तक वह परम में परिवर्तित न कर दिया जाए।
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उन्होंने बताया कि इसलिए महर्षि पतंजलि ने केवल योग ही नहीं क्रिया योग को भी प्रधानता दी है। जन्मों के द्वंदों के बीच में अपनी आत्मा को स्थित करना योगाभ्यास है। उन्होंने द्वंदों के उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे हानि-लाभ, जय-पराजय, मान-अपमान, जन्म-मृत्यु, सुख-दुख इन सब के मध्य में अपने को स्थिर करना योग कहलाता है।
आचार्य स्वदेश ने कहा कि अब योग के प्रति लोग जागरूक हुए हैं। देश और विदेश में लोग योग के मिशन से जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पतंजलि योग समिति योग के व्यापक प्रचार,प्रसार और लाभ व्यकित् को देने के लिए मिशन के रूप में कार्य कर रही है। देश, विदेश, गांव, कस्बा, शहर हर जगह केंद्र स्थापित करके लोगों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
पांच उपयोगी आसन-
1. सिद्धासन
2. बज्रासन
3. सर्पासन
4. मण्डूकआसन
5. श्वासन
पांच महत्वपूर्ण प्रणायाम-
1. अनुलोम-विलोम
2. कपालभांति
3. कुंभक
4. रेचक
5. भस्त्रिका
करें योग रहें निरोग
कासगंज। पतंजलि चिकित्सालय के योगाचार्य आईडी शर्मा का कहना है कि योग प्रत्येक व्यक्ति को अपनाना चाहिए, क्योंकि इससे त्वरित लाभ व्यक्ति को प्राप्त होता है। निरोगी काया के लिए, रोगों से बचाव के लिए योग और प्रणायाम जरूरी है।