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पचास हजार किसानों को नहीं दिए मृदा परीक्षण कार्ड
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एटा। मिट्टी की जांच होने से किसानों को 12 प्रकार के पैरामीटर का पता चलता है। इसमें पीएच मान का बहुत महत्व होता है। जिनके अनुसार किसान मिट्टी को सही पोषण दे पाते हैं। लेकिन यहां करीब 50 हजार किसानों को एक साल पहले लिए गए मिट्टी के नमूनों के मृदा स्वास्थ्य परीक्षण कार्ड अब तक नहीं मिल सके हैं।
कृषि विभाग की ओर से अब तक जिले के किसानों को एक लाख किसानों को मिट्टी की जांच कराकर मृदा स्वास्थ्य परीक्षण कार्ड वितरित कराए जा चुके हैं। लेकिन 50 हजार किसान ऐसे भी बचे हैं इनके खेतों से मिट्टी के नमूने तो लिए गए हैं लेकिन जांच के बाद कार्ड उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
मृदा कार्ड में अम्लता और क्षारीयता की माप अंकित होती है। जिन तत्वों की जांच की जाती है उनमें पीएच, ईसी, आर्गेनिक कार्बन, उपलब्ध नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम, सल्फर, जिंक, बोरोन, आयरन, मैगनीज और कॉपर शामिल रहती है। कृषि वैज्ञानिक पीएच मान 7 से 8.5 तक मिट्टी को बेहतर मानते हैं।
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जिसमें किसी भी तरह की फसल की उपज लेने के लिए बहुत ज्यादा उर्वरक की आवश्यकता नहीं होती और जैविक खेती आसानी से की जा सकती है। लेकिन जिन किसानों को मृदा स्वास्थ्य परीक्षण कार्ड नहीं दिए गए हैं वह मिट्टी में अंदाज से ही उर्वरक दे रहे हैं। ऐसे में उनको बेहतर उपज भी नहीं मिल पा रही है।
ंमिट्टी जांच के लिए नमूने लिए गए थे, लेकिन नमूनों की जांच समय पर नहीं हो पाने के कारण किसानों को मृदा स्वास्थ्य परीक्षण कार्ड वितरित नहीं हो पाए हैं। कर्मचारियों को विभिन्न योजनाओं के सफल संचालन में लगा देने से कार्य को गति नहीं मिल पाई। अब जल्द ही किसानों को कार्ड वितरित कराए जाएंगे।
-विजय शंकर, उप कृषि निदेशक
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कृषि विभाग की ओर से अब तक जिले के किसानों को एक लाख किसानों को मिट्टी की जांच कराकर मृदा स्वास्थ्य परीक्षण कार्ड वितरित कराए जा चुके हैं। लेकिन 50 हजार किसान ऐसे भी बचे हैं इनके खेतों से मिट्टी के नमूने तो लिए गए हैं लेकिन जांच के बाद कार्ड उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
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मृदा कार्ड में अम्लता और क्षारीयता की माप अंकित होती है। जिन तत्वों की जांच की जाती है उनमें पीएच, ईसी, आर्गेनिक कार्बन, उपलब्ध नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम, सल्फर, जिंक, बोरोन, आयरन, मैगनीज और कॉपर शामिल रहती है। कृषि वैज्ञानिक पीएच मान 7 से 8.5 तक मिट्टी को बेहतर मानते हैं।
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जिसमें किसी भी तरह की फसल की उपज लेने के लिए बहुत ज्यादा उर्वरक की आवश्यकता नहीं होती और जैविक खेती आसानी से की जा सकती है। लेकिन जिन किसानों को मृदा स्वास्थ्य परीक्षण कार्ड नहीं दिए गए हैं वह मिट्टी में अंदाज से ही उर्वरक दे रहे हैं। ऐसे में उनको बेहतर उपज भी नहीं मिल पा रही है।
ंमिट्टी जांच के लिए नमूने लिए गए थे, लेकिन नमूनों की जांच समय पर नहीं हो पाने के कारण किसानों को मृदा स्वास्थ्य परीक्षण कार्ड वितरित नहीं हो पाए हैं। कर्मचारियों को विभिन्न योजनाओं के सफल संचालन में लगा देने से कार्य को गति नहीं मिल पाई। अब जल्द ही किसानों को कार्ड वितरित कराए जाएंगे।
-विजय शंकर, उप कृषि निदेशक