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चारा-पानी नहीं मिलने से दो गोवंशों की मौत
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एटा। सरकार तो गोवंश के संरक्षण को लेकर सख्ती बरत रही है। गोवंशों को आश्रय स्थल तक पहुंचाने के लिए तरह तरह के दिशा निर्देश जारी किए जा रहे हैं। वहीं जिला प्रशासन गोवंश को संरक्षण देने में फेल नजर आ रहा है। अलीगंज में बने कान्हा पशु आश्रय स्थल में एक गाय और एक बछड़े की मौत हो गई। बताया जाता है कि सही तरीके से चारा-पानी न मिलने से गाय ने तड़प तड़पकर दम तोड़ दिया। जबकि निधौलीकलां और मलावन से 138 गोवंश बाड़ा तोड़कर भाग गए।
प्रदेश सरकार ने जिला प्रशासन को अस्थाई गोवंश आश्रय स्थलों में आवारा पशुओं को संरक्षण प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। पशुओं को चारा-पानी मुहैया कराने के लिए एक करोड़ रुपये का बजट भी दिया जा चुका है। जिले में 23 गोवंश आश्रय स्थलों में करीब 1886 पशुओं को रखा गया है। बताया जाता है कि अलीगंज के कान्हा पशु आश्रय स्थल में दो गोवंशों की मौत हो गई।
उचित समय पर चारा-पानी नहीं मिलने और ठंड के चलते गाय और उसके बछड़े ने दम तोड़ दिया। जबकि निधौलीकलां में मंडी समिति में बनाए गए गोवंश आश्रय स्थल से 98 और मलावन से 40 पशु बाड़ा तोड़कर भाग गए। मामले में पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है। बता दें कि पहले भी निधौलीकलां में दो गोवंशों की मौत हो चुकी है।
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दो दिन में दो गाय की बच्चों की मौत हुई है। उनका उपचार चल रहा था। मगर वह कमजोर होने की वजह से मर गए। जो निधौलीकलां से गाय भागीं थी। उनमें से अधिकांश को पकड़ लिया गया है। सभी स्थानों पर स्थिति नियंत्रित है। - डॉ. केपी सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
प्रदेश सरकार ने जिला प्रशासन को अस्थाई गोवंश आश्रय स्थलों में आवारा पशुओं को संरक्षण प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। पशुओं को चारा-पानी मुहैया कराने के लिए एक करोड़ रुपये का बजट भी दिया जा चुका है। जिले में 23 गोवंश आश्रय स्थलों में करीब 1886 पशुओं को रखा गया है। बताया जाता है कि अलीगंज के कान्हा पशु आश्रय स्थल में दो गोवंशों की मौत हो गई।
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उचित समय पर चारा-पानी नहीं मिलने और ठंड के चलते गाय और उसके बछड़े ने दम तोड़ दिया। जबकि निधौलीकलां में मंडी समिति में बनाए गए गोवंश आश्रय स्थल से 98 और मलावन से 40 पशु बाड़ा तोड़कर भाग गए। मामले में पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है। बता दें कि पहले भी निधौलीकलां में दो गोवंशों की मौत हो चुकी है।
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दो दिन में दो गाय की बच्चों की मौत हुई है। उनका उपचार चल रहा था। मगर वह कमजोर होने की वजह से मर गए। जो निधौलीकलां से गाय भागीं थी। उनमें से अधिकांश को पकड़ लिया गया है। सभी स्थानों पर स्थिति नियंत्रित है। - डॉ. केपी सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी