{"_id":"5be5b948bdec2269bb420469","slug":"131541781832-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रबी फसल के बेहतर उत्पादन को किसान सीखेंगे गुर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रबी फसल के बेहतर उत्पादन को किसान सीखेंगे गुर
Updated Fri, 09 Nov 2018 10:13 PM IST
विज्ञापन
अंबेडकरनगर में मौसम साफ होने से इस तरह खेतों में लहरा रही सरसों की फसल।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कासगंज।रबी फसल की तैयारियों में कृषि विभाग जुट गया है। बेहतर उत्पादन के लिए अभी से तैयारियां की जा रहीं हैं। किसानों के मार्गदर्शन को जिले में 14 समितियां गठित की गईं हैं। समितियां किसानों को विकास खंडवार प्रशिक्षण भी देंगी। सबसे अधिक बल कंपोस्ट खाद की तैयारी पर रहेगा।
विगत कई वर्षों से पारंपरिक खेती की ओर किसानों का रुझान कम हो रहा है। इसका कारण हैं कि खेतों की उर्वरा शक्ति कम होने से फसलों की पैदावार गिर रही है। कृषि विभाग खेतों की मृदा के नमूने के लेकर जांच करा रहा है। हर साल जांच रिपोर्ट में पाया जा रहा है कि मृदा में सूक्ष्म तत्व कम होते जा रहे हैं। इस साल मृदा के 25 हजार नमूनों की जांच में फास्फोरस की मात्रा शून्य पाई गई। जांच रिपोर्ट के बाद कृषि विभाग चिंतित है। अब जब रबी अभियान की शुरूआत हुई है तो विभाग पारंपरिक खेती गेहूं और जौ का बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है। विभाग ने किसानों को जागरूक करने एवं पैदावार के गुर बताने के लिए समितियां बना दीं हैं। मार्गदर्शक समिति ने कृषि विभाग का विषय वस्तु विशेषज्ञ और विकासखंड का एक प्रगतिशील किसान शामिल किया गया है। प्रत्येक विकासखंड में दो समितियां बनाई गईं हैं। यह समितियां न्याय पंचायतवार किसानों को प्रशिक्षण देंगी।
बताएंगी कंपोस्ट खाद के तरीके
कासगंज। फसलों में उर्वरक के अंधाधुंध प्रयोग को रोकने के लिए मार्गदर्शक समितियां कंपोस्ट खाद तैयार कराएंगी। यह समितियां खेतों में कंपोस्ट खाद के गड्ढे बनवाकर गोबर से खाद तैयार कराएंगी।
विज्ञापन
- मार्गदर्शक समितियां किसानों को प्रेरित करेंगी। सबसे अधिक बल रहेगा कि किसान उर्वरक के प्रयोग से बचकर कंपोस्ट खाद तैयार करें।
सुमित चौहान, जिला कृषि अधिकारी।
विज्ञापन
विगत कई वर्षों से पारंपरिक खेती की ओर किसानों का रुझान कम हो रहा है। इसका कारण हैं कि खेतों की उर्वरा शक्ति कम होने से फसलों की पैदावार गिर रही है। कृषि विभाग खेतों की मृदा के नमूने के लेकर जांच करा रहा है। हर साल जांच रिपोर्ट में पाया जा रहा है कि मृदा में सूक्ष्म तत्व कम होते जा रहे हैं। इस साल मृदा के 25 हजार नमूनों की जांच में फास्फोरस की मात्रा शून्य पाई गई। जांच रिपोर्ट के बाद कृषि विभाग चिंतित है। अब जब रबी अभियान की शुरूआत हुई है तो विभाग पारंपरिक खेती गेहूं और जौ का बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है। विभाग ने किसानों को जागरूक करने एवं पैदावार के गुर बताने के लिए समितियां बना दीं हैं। मार्गदर्शक समिति ने कृषि विभाग का विषय वस्तु विशेषज्ञ और विकासखंड का एक प्रगतिशील किसान शामिल किया गया है। प्रत्येक विकासखंड में दो समितियां बनाई गईं हैं। यह समितियां न्याय पंचायतवार किसानों को प्रशिक्षण देंगी।
विज्ञापन
बताएंगी कंपोस्ट खाद के तरीके
कासगंज। फसलों में उर्वरक के अंधाधुंध प्रयोग को रोकने के लिए मार्गदर्शक समितियां कंपोस्ट खाद तैयार कराएंगी। यह समितियां खेतों में कंपोस्ट खाद के गड्ढे बनवाकर गोबर से खाद तैयार कराएंगी।
विज्ञापन
- मार्गदर्शक समितियां किसानों को प्रेरित करेंगी। सबसे अधिक बल रहेगा कि किसान उर्वरक के प्रयोग से बचकर कंपोस्ट खाद तैयार करें।
सुमित चौहान, जिला कृषि अधिकारी।