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मैरो कान्हा झूले पलना, नैक हौले झोटा दियौ...
Updated Sat, 01 Sep 2018 06:28 PM IST
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मैरो कान्हा झूले पलना, नैक हौले झोटा दियौ...
मथुरा में एक करोड़ का है झूले-पालने का कारोबार
अमर उजाला ब्यूरो
मथुरा। मैरो कान्हा झूले पलना, नैक हौले झोटा दियौ...जन्माष्टमी पर जन्म के बाद कान्हा को पालने में झुलाने की तैयारियां घर-घर में शुरू हो गई हैं। कोई लकड़ी के पालने पर की गई कारीगरी को पसंद कर रहा है तो कोई सोने-चांदी के पालने बनवा रहा है। गोटा-जरी व मोती के झूले भी खूब पसंद किए जा रहे हैं। प्रमुख कारोबारियों की मानें तो इस वर्ष जन्माष्टमी पर झूले-पालनों का कारोबार करीब एक करोड़ का होगा।
वृंदावन के बांकेबिहारी मार्केट, रंगजी, पत्थरपुरा, अठखंभा आदि के अलावा राजाधिराज बाजार, डोरी बाजार, छत्ता बाजार, चौक बाजार, श्रीकृष्ण जन्मस्थान आदि पर करीब दो सैकड़ा झूले-पालने की दुकानें सज गई हैं। लकड़ी के झूले पर की गई हीरे-मोती, गोटा-जरी व मीना की कारीगरी भी भक्तों को लुभा रही है। दुकानदारों ने मुरादाबाद के अलावा अलीगढ़ व जलेसर से भी पीतल के पालनों का स्टॉक किया हुआ है। आभूषण विक्रेताओं के यहां भी सोने-चांदी के झूलों के आर्डर दिए गए हैं। इनके दाम साइजों और आकारों के आधार पर तय किए गए है। बाजार में इस समय 100 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक के ठाकुर जी के पालने-झूले मौजूद है।
पिछली बार की अपेक्षा इस वर्ष बिक्री का ग्राफ बढ़ने की उम्मीद है। करीब 60 से 70 लाख के पालने व झूलों की बिक्री इस वर्ष होगी।
महेश अग्रवाल झूले वाले, थोक विक्रेता
पांच दिनों में झूले व पालने की बिक्री तेजी से होती है। यदि बरसात हुई तो नुकसान उठाना पड़ सकता है। फिलहाल बाजार की स्थिति अच्छी है।
-मुकेश कृष्ण शर्मा, थोक विक्रेता
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मैरो कान्हा झूले पलना, नैक हौले झोटा दियौ...
मथुरा में एक करोड़ का है झूले-पालने का कारोबार
अमर उजाला ब्यूरो
मथुरा। मैरो कान्हा झूले पलना, नैक हौले झोटा दियौ...जन्माष्टमी पर जन्म के बाद कान्हा को पालने में झुलाने की तैयारियां घर-घर में शुरू हो गई हैं। कोई लकड़ी के पालने पर की गई कारीगरी को पसंद कर रहा है तो कोई सोने-चांदी के पालने बनवा रहा है। गोटा-जरी व मोती के झूले भी खूब पसंद किए जा रहे हैं। प्रमुख कारोबारियों की मानें तो इस वर्ष जन्माष्टमी पर झूले-पालनों का कारोबार करीब एक करोड़ का होगा।
वृंदावन के बांकेबिहारी मार्केट, रंगजी, पत्थरपुरा, अठखंभा आदि के अलावा राजाधिराज बाजार, डोरी बाजार, छत्ता बाजार, चौक बाजार, श्रीकृष्ण जन्मस्थान आदि पर करीब दो सैकड़ा झूले-पालने की दुकानें सज गई हैं। लकड़ी के झूले पर की गई हीरे-मोती, गोटा-जरी व मीना की कारीगरी भी भक्तों को लुभा रही है। दुकानदारों ने मुरादाबाद के अलावा अलीगढ़ व जलेसर से भी पीतल के पालनों का स्टॉक किया हुआ है। आभूषण विक्रेताओं के यहां भी सोने-चांदी के झूलों के आर्डर दिए गए हैं। इनके दाम साइजों और आकारों के आधार पर तय किए गए है। बाजार में इस समय 100 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक के ठाकुर जी के पालने-झूले मौजूद है।
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पिछली बार की अपेक्षा इस वर्ष बिक्री का ग्राफ बढ़ने की उम्मीद है। करीब 60 से 70 लाख के पालने व झूलों की बिक्री इस वर्ष होगी।
महेश अग्रवाल झूले वाले, थोक विक्रेता
पांच दिनों में झूले व पालने की बिक्री तेजी से होती है। यदि बरसात हुई तो नुकसान उठाना पड़ सकता है। फिलहाल बाजार की स्थिति अच्छी है।
-मुकेश कृष्ण शर्मा, थोक विक्रेता