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कागजों में अभियान, हाेर्डिंग में स्वच्छता
Updated Sun, 18 Feb 2018 12:29 AM IST
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फिरोजाबाद। नगर निगम प्रशासन कागजों में शहर को स्वच्छ बनाने की मशक्कत में जुटा है। शहर में सफाई केवल होर्डिंग और बैनर पर नजर आ रही है, जबकि मुख्य चौराहों से लेकर गली-मोहल्लों में गंदगी के ढेर नजर आ रहे हैं। ऐसे में धरातल पर कम कागजों पर स्वच्छता अभियान ज्यादा दिखाई दे रहा है।
केंद्र सरकार पूरे देश में स्वच्छता की रैकिंग के लिए चार जनवरी से स्वच्छ सर्वेक्षण करा रही है। नगर निगम चुनाव के बाद मेयर नूतन राठौर को पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ ने स्वच्छता का मंत्र दिया था। नगर निगम प्रशासन ने स्वच्छ सर्वेक्षण में शहर को नंबर वन बनाने के नाम पर लाखों रुपये खर्च कर दिए। नगर निगम अफसर शहर को स्वच्छ बनाने में सिर्फ कागजों पर ही मशक्कत कर रहे हैं। शहर के मुख्य चौराहों पर होर्डिंग बैनर लगवाए गए, बाल पेंटिंग कराई, परंतु वास्तव में शहर को स्वच्छ बनाने की दिशा में कोई प्रयास नहीं किया।
वर्तमान में स्वच्छता अभियान की तस्वीर हकीकत से जुदा है। शहर के मुख्य चौराहों से लेकर गली-मोहल्लों में गंदगी के ढेर लगे हैं। नाले-नालियां चोक होने से सड़कों पर जलभराव की स्थिति बनी हुई है। नई आबादी एवं मुस्लिम क्षेत्रों में हालात नारकीय बने हैं। आलम यह है कि आज भी शहर में तमाम ऐसे मोहल्ले हैं, जहां कई दिनों तक झाडू़ तक नहीं लगती। खाली प्लाट में खत्ताघर बन चुके हैं।
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नगर निगम द्वारा स्वच्छता अभियान के तहत शहर के प्रमुख चौराहों, व्यवसायिक स्थलों पर 45 हरे ओर नीले डस्टबिन लगवाए गए, जो शो-पीस बने हुए हैं। निगम की लापरवाही के कारण डस्टबिन कई दिनों से भरे पड़े हैं। डस्टबिन के आसपास सड़कों पर गंदगी के ढेर लगे हैं।
नगर निगम का भले ही स्वच्छ सर्वेक्षण चल रहा है, परंतु नगर निगम अफसरों की लापरवाही का आलम है कि दोपहर तक शहर के मुख्य मार्गों से कूड़ा नहीं उठ पा रहा है। सफाई वाहन बाजार में फंसने से जाम के हालात पैदा हो जाते हैं। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
नगर निगम प्रशासन लापरवाही के कारण सुभाष तिराहा स्थित जिला अस्पताल से लेकर जलेसर रोड, बोधाश्रम होते हुए कोटला चुंगी दो दर्जन से अधिक मैनहॉल खुले पड़े हैं। इन मैनहॉल में गिरने से आए दिन राहगीर चुटैल हो रहे हैं। नगर निगम में लगातार मैनहॉल बंद कराने को शिकायत दर्ज कराई जा रही हैं, परंतु निगम अफसरों को शायद किसी बड़े हादसे का इंतजार है।
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केंद्र सरकार पूरे देश में स्वच्छता की रैकिंग के लिए चार जनवरी से स्वच्छ सर्वेक्षण करा रही है। नगर निगम चुनाव के बाद मेयर नूतन राठौर को पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ ने स्वच्छता का मंत्र दिया था। नगर निगम प्रशासन ने स्वच्छ सर्वेक्षण में शहर को नंबर वन बनाने के नाम पर लाखों रुपये खर्च कर दिए। नगर निगम अफसर शहर को स्वच्छ बनाने में सिर्फ कागजों पर ही मशक्कत कर रहे हैं। शहर के मुख्य चौराहों पर होर्डिंग बैनर लगवाए गए, बाल पेंटिंग कराई, परंतु वास्तव में शहर को स्वच्छ बनाने की दिशा में कोई प्रयास नहीं किया।
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वर्तमान में स्वच्छता अभियान की तस्वीर हकीकत से जुदा है। शहर के मुख्य चौराहों से लेकर गली-मोहल्लों में गंदगी के ढेर लगे हैं। नाले-नालियां चोक होने से सड़कों पर जलभराव की स्थिति बनी हुई है। नई आबादी एवं मुस्लिम क्षेत्रों में हालात नारकीय बने हैं। आलम यह है कि आज भी शहर में तमाम ऐसे मोहल्ले हैं, जहां कई दिनों तक झाडू़ तक नहीं लगती। खाली प्लाट में खत्ताघर बन चुके हैं।
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नगर निगम द्वारा स्वच्छता अभियान के तहत शहर के प्रमुख चौराहों, व्यवसायिक स्थलों पर 45 हरे ओर नीले डस्टबिन लगवाए गए, जो शो-पीस बने हुए हैं। निगम की लापरवाही के कारण डस्टबिन कई दिनों से भरे पड़े हैं। डस्टबिन के आसपास सड़कों पर गंदगी के ढेर लगे हैं।
नगर निगम का भले ही स्वच्छ सर्वेक्षण चल रहा है, परंतु नगर निगम अफसरों की लापरवाही का आलम है कि दोपहर तक शहर के मुख्य मार्गों से कूड़ा नहीं उठ पा रहा है। सफाई वाहन बाजार में फंसने से जाम के हालात पैदा हो जाते हैं। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
नगर निगम प्रशासन लापरवाही के कारण सुभाष तिराहा स्थित जिला अस्पताल से लेकर जलेसर रोड, बोधाश्रम होते हुए कोटला चुंगी दो दर्जन से अधिक मैनहॉल खुले पड़े हैं। इन मैनहॉल में गिरने से आए दिन राहगीर चुटैल हो रहे हैं। नगर निगम में लगातार मैनहॉल बंद कराने को शिकायत दर्ज कराई जा रही हैं, परंतु निगम अफसरों को शायद किसी बड़े हादसे का इंतजार है।