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साधना में उतरना ही जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि
Updated Sun, 28 Jan 2018 12:00 AM IST
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कथा का आयोजन
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मैनपुरी। कबीर आश्रम में चल रहे ध्यान शिविर में शनिवार को महंत अमर साहेब ने अनेक जानकारियां प्रदान की। शिविर में मैनपुरी तथा फर्रुखाबाद जनपद के भक्त भाग ले रहे हैं।
महंत अमर साहेब ने बताया कि साधना में उतरना ही जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है । आवश्यक काम समय निकालकर किया जाता हैं। अनाआवश्यक कार्य समय मिलने पर किया जाता है। सबसे भाग्यशाली व्यक्ति वह होता है जो ध्यान में आकर जागृति में होता है वही ध्यान के लिए समय निकाल पाता है ।
पूजा भजन साधना तभी हो सकती जब राग द्वेष से दूर रहें तन मय सेवा हो तो मन में त्याग भाव जागृत होता है । अमर साहेब ने बताया कि तन से तीन पाप होते हैं। चोरी, हिंसा ,व्यभिचार यह तीन पाप छोड़ देने से तन पवित्र होता है । मन से चार पाप होते हैं छल, ईर्ष्या, मान, कपट दूसरे के साथ छल करना ईर्ष्या रखना अपने मन की चाह ना करना दूसरे से कपट व्यवहार करके धोखा देते रहना यह चार पाप मन से होते हैं । इनको छोड़ने से मन पवित्र होता है । मन की एकाग्रता तन की निर्मलता पर निर्भर है।
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महंत अमर साहेब ने बताया कि साधना में उतरना ही जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है । आवश्यक काम समय निकालकर किया जाता हैं। अनाआवश्यक कार्य समय मिलने पर किया जाता है। सबसे भाग्यशाली व्यक्ति वह होता है जो ध्यान में आकर जागृति में होता है वही ध्यान के लिए समय निकाल पाता है ।
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पूजा भजन साधना तभी हो सकती जब राग द्वेष से दूर रहें तन मय सेवा हो तो मन में त्याग भाव जागृत होता है । अमर साहेब ने बताया कि तन से तीन पाप होते हैं। चोरी, हिंसा ,व्यभिचार यह तीन पाप छोड़ देने से तन पवित्र होता है । मन से चार पाप होते हैं छल, ईर्ष्या, मान, कपट दूसरे के साथ छल करना ईर्ष्या रखना अपने मन की चाह ना करना दूसरे से कपट व्यवहार करके धोखा देते रहना यह चार पाप मन से होते हैं । इनको छोड़ने से मन पवित्र होता है । मन की एकाग्रता तन की निर्मलता पर निर्भर है।
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