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प्रतियोगी परीक्षा नजदीक, स्टडी सर्किल में पढ़ाई बंद
Updated Wed, 23 Aug 2017 11:09 PM IST
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सिर पर प्रतियोगी परीक्षा, स्टडी सर्किल में पढ़ाई बंद
- फोटो : अमर उजाला
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एटा। प्रतियोगी परीक्षाएं सिर पर आ गई हैं, मगर गरीब बच्चों की तैयारी ठप पड़ गई है। वेतन नहीं मिलने से शिक्षकों ने आना बंद कर दिया है और शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है। विद्यार्थियों के मंगाई गईं हजारों रुपये की किताबें भी रख रखाव के अभाव में धूल फांक रही हैं। ऐसे में गरीब बच्चों के उत्थान को शुरू हुई पहल दम तोड़ती नजर आ रही है।
शहर स्थित मेहता पार्क पुस्तकालय में चार वर्ष पूर्व कांपटीटिव स्टडी सर्किल की शुरुआत हुई थी। इसमें शहर के गरीब बच्चों को प्रतिभा के आधार पर चयन करके नि:शुल्क प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती थी। कई सालों तक सबकुछ ठीक चला, लेकिन पिछले पांच महीने से स्टडी सर्किल में पढ़ाई ठप हो गई है।
वेतन नहीं मिलने से शिक्षकों ने स्टडी सर्किल आना बंद कर दिया है। आलम यह है कि विद्यार्थी स्टडी सर्किल पहुंचते हैं और अखबारों को टटोलकर चले जाते हैं। लाइब्रेरी प्रभारी देवेंद्र बहादुर दीक्षित बताते हैं कि स्टडी सर्किल मेें शिक्षकों ने आना बंद कर दिया है। किताबोें के रखरखाव के लिए प्रबंध किए जा रहे हैं।
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विद्यार्थी कहते हैं
तीन महीने से आ रहा हूं। कोई शिक्षक नहीं आता है। अखबार पढ़कर लौट जाते हैं। कोई व्यवस्था नहीं मिल पाती है।
कुलदीप वर्मा
शिक्षक नहीं आने से समस्या बढ़ रही है। प्रतियोगी परीक्षाएं सिर पर आ गई हैं। प्राइवेट संस्थानों पर फीस ज्यादा होती है।
दानिश सैफी
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शहर स्थित मेहता पार्क पुस्तकालय में चार वर्ष पूर्व कांपटीटिव स्टडी सर्किल की शुरुआत हुई थी। इसमें शहर के गरीब बच्चों को प्रतिभा के आधार पर चयन करके नि:शुल्क प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती थी। कई सालों तक सबकुछ ठीक चला, लेकिन पिछले पांच महीने से स्टडी सर्किल में पढ़ाई ठप हो गई है।
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वेतन नहीं मिलने से शिक्षकों ने स्टडी सर्किल आना बंद कर दिया है। आलम यह है कि विद्यार्थी स्टडी सर्किल पहुंचते हैं और अखबारों को टटोलकर चले जाते हैं। लाइब्रेरी प्रभारी देवेंद्र बहादुर दीक्षित बताते हैं कि स्टडी सर्किल मेें शिक्षकों ने आना बंद कर दिया है। किताबोें के रखरखाव के लिए प्रबंध किए जा रहे हैं।
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विद्यार्थी कहते हैं
तीन महीने से आ रहा हूं। कोई शिक्षक नहीं आता है। अखबार पढ़कर लौट जाते हैं। कोई व्यवस्था नहीं मिल पाती है।
कुलदीप वर्मा
शिक्षक नहीं आने से समस्या बढ़ रही है। प्रतियोगी परीक्षाएं सिर पर आ गई हैं। प्राइवेट संस्थानों पर फीस ज्यादा होती है।
दानिश सैफी