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युवा बोले, जातिगत नहीं आर्थिक आधार पर ही आरक्षण है सही
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फिरोजाबाद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्थिक रूप से पिछड़े सामान्य वर्ग को 10 फीसदी का आरक्षण देने की मंजूरी घोषणा की है। आर्थिक सवर्ण आरक्षण को लेकर राजनीति में तरह-तरह की चर्चाएं हैं।
मगर पढ़े-लिखे युवाओं ने आरक्षण को सही ठहराया है। पढ़ा-लिखा तबका चाहे ओबीसी वर्ग का हो या फिर एससी, जनरल वर्ग का। सभी ने आर्थिक आरक्षण को सही ठहराया है। मोदी सरकार के फैसले का स्वागत भी किया है।
छात्रा दीक्षा गौतम ने कहा कि आर्थिक आधार पर ही आरक्षण मिलना चाहिए। क्योंकि गरीब किसी भी जाति का हो, उसे समान स्तर तक पहुंचाने के लिए आरक्षण होना चाहिए। मोदी सरकार का यह अच्छा फैसला है।
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छात्रा राशि जैन ने कहा कि आरक्षण उस समय बनाया था, तब एससी वर्ग काफी पिछड़ा था। उसके बाद यह राजनीतिक मुद्दा बन गया। आरक्षण के कारण सवर्ण पिछड़ता जा रहा है। यह सबका साथ, सबका विकास की बात है।
स्वाती राठौर ने कहा कि जरूरी नहीं की हर एससी कमजोर है। यह भी जरूरी नहीं कि हर सवर्ण पैसे वाला हो। इसलिए आर्थिक आधार पर आरक्षण को प्राथमिकता देनी चाहिए। हमें किसी परीक्षा का फार्म भरने से लेकर नौकरी तक संघर्ष करना पड़ता है।
आमिर ने कहा कि हम मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। दाखिले के लिए एससी वर्ग से हमारे अच्छे अंक आए तो भी एससी वर्ग को प्राथमिकता दी जाएगी। आरक्षण से संकट है। आर्थिक आरक्षण ही सबसे अच्छा तरीका है।
शिमाव दानिश ने कहा कि आरक्षण के कारण अमीर और अमीर हो रहा है। गरीब और गरीब होता जाता जा रहा है। इसलिए जिन लोगों को आरक्षण की जरूरत है, उन्हें ही आरक्षण दिया जाए। आर्थिक आरक्षण का फैसला सर्वश्रेष्ठ है।
इंजीनियरिंग की तैयारी कर रही छात्रा स्वाती सिंह ने कहा कि जातिगत आरक्षण गलत है। क्योंकि कम अंक पाकर एससी, ओबीसी वर्ग का व्यक्ति अच्छी नौकरी पा लेता है। काबलियत होकर भी सवर्ण बेरोजगार या छोटे पदों पर ही रह जाता है।
नैंसी चौहान ने कहा कि हम किसी परीक्षा का फार्म भरते हैं तो आरक्षण दिखने लगता है। जिस फार्म के 1500 रुपये देते हैं, वो फार्म एससी वर्ग के लिए 150 रुपये का है। चाहे एससी कितना अमीर हो या फिर सवर्ण गरीब हो। मोदी सरकार सवर्णों को आर्थिक आरक्षण देने की बात कर रही है, वो सराहनीय है।
छात्र सुधांशु यादव ने कहा कि आरक्षण देने का भी कोई मकसद था। सभी जातिगत आरक्षण खत्म कर गरीब को आरक्षण देने की व्यवस्था करनी चाहिए। चाहे वो एसी वर्ग का हो या फिर ओबीसी, जनरल। भेदभाव रहित माहौल होना चाहिए।
मगर पढ़े-लिखे युवाओं ने आरक्षण को सही ठहराया है। पढ़ा-लिखा तबका चाहे ओबीसी वर्ग का हो या फिर एससी, जनरल वर्ग का। सभी ने आर्थिक आरक्षण को सही ठहराया है। मोदी सरकार के फैसले का स्वागत भी किया है।
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छात्रा दीक्षा गौतम ने कहा कि आर्थिक आधार पर ही आरक्षण मिलना चाहिए। क्योंकि गरीब किसी भी जाति का हो, उसे समान स्तर तक पहुंचाने के लिए आरक्षण होना चाहिए। मोदी सरकार का यह अच्छा फैसला है।
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छात्रा राशि जैन ने कहा कि आरक्षण उस समय बनाया था, तब एससी वर्ग काफी पिछड़ा था। उसके बाद यह राजनीतिक मुद्दा बन गया। आरक्षण के कारण सवर्ण पिछड़ता जा रहा है। यह सबका साथ, सबका विकास की बात है।
स्वाती राठौर ने कहा कि जरूरी नहीं की हर एससी कमजोर है। यह भी जरूरी नहीं कि हर सवर्ण पैसे वाला हो। इसलिए आर्थिक आधार पर आरक्षण को प्राथमिकता देनी चाहिए। हमें किसी परीक्षा का फार्म भरने से लेकर नौकरी तक संघर्ष करना पड़ता है।
आमिर ने कहा कि हम मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। दाखिले के लिए एससी वर्ग से हमारे अच्छे अंक आए तो भी एससी वर्ग को प्राथमिकता दी जाएगी। आरक्षण से संकट है। आर्थिक आरक्षण ही सबसे अच्छा तरीका है।
शिमाव दानिश ने कहा कि आरक्षण के कारण अमीर और अमीर हो रहा है। गरीब और गरीब होता जाता जा रहा है। इसलिए जिन लोगों को आरक्षण की जरूरत है, उन्हें ही आरक्षण दिया जाए। आर्थिक आरक्षण का फैसला सर्वश्रेष्ठ है।
इंजीनियरिंग की तैयारी कर रही छात्रा स्वाती सिंह ने कहा कि जातिगत आरक्षण गलत है। क्योंकि कम अंक पाकर एससी, ओबीसी वर्ग का व्यक्ति अच्छी नौकरी पा लेता है। काबलियत होकर भी सवर्ण बेरोजगार या छोटे पदों पर ही रह जाता है।
नैंसी चौहान ने कहा कि हम किसी परीक्षा का फार्म भरते हैं तो आरक्षण दिखने लगता है। जिस फार्म के 1500 रुपये देते हैं, वो फार्म एससी वर्ग के लिए 150 रुपये का है। चाहे एससी कितना अमीर हो या फिर सवर्ण गरीब हो। मोदी सरकार सवर्णों को आर्थिक आरक्षण देने की बात कर रही है, वो सराहनीय है।
छात्र सुधांशु यादव ने कहा कि आरक्षण देने का भी कोई मकसद था। सभी जातिगत आरक्षण खत्म कर गरीब को आरक्षण देने की व्यवस्था करनी चाहिए। चाहे वो एसी वर्ग का हो या फिर ओबीसी, जनरल। भेदभाव रहित माहौल होना चाहिए।