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कागजों पर की जा रही गोसेवा

Tue, 01 May 2018 11:21 PM IST
Updated Tue, 01 May 2018 11:21 PM IST
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कागजों पर की जा रही गोसेवा
कागजों पर की जा रही गोसेवा - फोटो : अमर उजाला

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एटा।
एक ओर योगी सरकार गो सेवा को बढ़ावा देने की कवायद कर रही है, वहीं दूसरी ओर जिले में कागजों पर ही गो सेवा हो रही है। जिले में तमाम गौशालाएं महज दिखावे के लिए चल रही हैं। इनमें तमाम गौशालाएं ऐसी हैं, जो सरकारी अनुदान लेने के बाद बंद हो चुकी हैं। वहीं विभाग में पंजीकृत सात गौशालाएं हैं, तो वेबसाइट पर 10 गौशालाओं का पंजीकरण है। ऐसे में गौशालाओं के संचालन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।


दरअसल, पिछले साल जिले में 15 गौशालाओं के पंजीकरण थे। हर गौशाला को सरकार की ओर से प्रति पशु के हिसाब से अनुदान दिया जाता है। पिछले कुछ वर्षों पूर्व जिले के गौशाला संचालकों ने अनुदान के लिए आवेदन किया था। इसके बाद शासन की ओर से पशुपालन विभाग को सर्वे कराने के निर्देश दिए गए। पिछले साल हुए सर्वे में जिले में महज तीन गौशालाएं ही संचालित होते मिलीं। जबकि 12 अन्य गौशालाएं बंद थीं। जिस पर विभाग ने अनुदान रोकने की कार्रवाई करते हुए रिपोर्ट शासन को भेजी।
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इस पर अनुदान रोका गया। मौजूदा दौर में विभाग की ओर से सात गौशालाएं पंजीकृत हैं। विभाग का कहना है कि सात गौशालाएं मानकों के आधार पर संचालित हो रही हैं। जबकि विभाग की वेबसाइट पर 10 गौशालाओं का पंजीकरण है। ऐसे में गौशालाओं के संचालन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। विभाग की मानें तो गोशालाओं के संचालन पर पूरी नजर रखी जा रही है। कागजों पर दौड़ रही गौशालाओं की रिपोर्ट शासन को भेजी गई है।
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अनुदान को लेकर होता था खेल
अब तक गोशालाओं को मिलने वाला अनुदान सीधे शासन की ओर से जारी किया जाता था। जिसमें गोशाला संचालक खेल कर लेते थे। अब सरकार ने गोशाला में अनुदान के उपभोग की रिपोर्ट पशुपालन विभाग से मांगनी शुरू कर दी है। ताकि खेल पर लगाम लग सके।

दो गोशालाओं ने किया आवेदन
जिले में चल रही सात गोशालाओं में से इस बार महज दो गोशालाओं ने अनुदान के लिए आवेदन किया है। सरकार की सख्ती को देखते हुए गोशाला संचालक भी सतर्क हो गए हैं।

गोवंश की संख्या में भी खेल
जिले में कागजों पर संचालित गोशालाओं में गोवंश की संख्या में भी खेल किया गया है। मानकों के अनुसार गोशाला के लिए 100 से अधिक गोवंश होने चाहिए। मगर जिले में संचालित कई गोशालाओं में गोवंश नहीं हैं, तो कई में मानक से कम गोवंश है।

इनका कहना है
अभी कुछ दिन पहले ही कार्यभार ग्रहण किया है। जिले में सात गौशालाएं पंजीकृत हैं। कागजों पर चल रही गौशालाओं के बारे में जानकारी नहीं है। दो गौशालाओं के आवेदन शासन को भेज दिए गए हैं।
डा. केपी सिंह, सीवीओ, एटा

आंकड़ों में नजर
07 गौशाला का विभाग में पंजीकरण
10 गौशाला बेवसाइट पर पंजीकृत
15 गौशालाओं के पंजीकरण थे पिछले साल
12 गौशालाएं सर्वे मेें मिली थी बंद
100 होनी चाहिए गौशाला में गाय
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