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सिर कटी लाश किसकी, दो परिवारों ने जताया दावा
Updated Thu, 26 Apr 2018 11:18 PM IST
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कासगंज।
ढोलना के मारूपुर में मिली अलीगढ़ के युवक की सिर कटी लाश ने पुलिस को उलझा दिया है। लाश पर दो परिवार अपना दावा कर रहे हैं। इससे पुलिस भी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाई है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
राकेश पुत्र बनवारी लाल निवासी नौगवां गंगीरी अलीगढ़ की ससुराल मारहरा एटा में है। उसने गाजियाबाद में अपनी मां के नाम से एक मकान बना रखा है। 14 फरवरी को उसकी पत्नी दो बच्चों के साथ गाजियाबाद से लापता हो गई। वह अपने दोस्त राजेंद्र पुत्र दिलीप सिंह निवासी नौगंवा गंगीरी अलीगढ़ के साथ 25 अप्रैल को अपनी पत्नी का पता करने के लिए मारहरा के लिए आया था।
कासगंज मथुरा रेल लाइन की पुलिया संख्या 406 के नीचे खाई में एक सिर कटी लाश बरामद हुई। लाश के हाथ भी आगे से काटे हुए हैं। हत्या करने के बाद पहचान छिपाने के लिए पेट्रोल डालकर आग लगा दी गई। लेकिन लाश पूरी तरह से नहीं जल पाई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने लाश को कब्जे में ले लिया। जेब से राकेश के नाम की एलआईसी की पर्ची बरामद हुई। इसके आधार पर मामले की सूचना नौगवां भेजी गई। चूंकि एक लाश मिल गई। जबकि साथी युवक गायब है। इसलिए दोनों ही परिवार के लोग पहुंच गए। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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परिजनों के पहुंचने के साथ ही मामला उलझ गया। लाश पर मिले कपड़े व पर्ची के आधार पर उसके भाई राजीव ने अपने भाई की लाश होने का दावा किया। जबकि कद काटी के आधार पर राजेंद्र का भाई बंटी लाश को अपने भाई की होने का दावा करने लगा। ऐसी स्थिति में पुलिस भी पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हो पा रही कि लाश किसकी है।
मामला भी सुलझाना भी पुलिस के लिए चुनौती
कासगंज। दो दोस्तों में से एक युवक की लाश बरामद हो जाने के बाद लापता दूसरे युवक की गुत्थी सुलझाना भी पुलिस के लिए चुनौती है। दूसरा युवक वास्तव में कहीं लापता हो गया है या फिर उसकी भी किसी ने हत्या करके शव कहीं और डाल दिया है। या फिर उसने ही अपने साथी की हत्या की और कहीं गायब हो गया।
डीएन से खुलेगा असली राज
कासगंज। दोनों दोस्तों में से लाश वास्तव में किसकी है इसका रहस्य जानने के लिए पुलिस डीएनए टैस्ट कराने की तैयारी कर रही है। इस संबंध में थाना प्रभारी का कहना है कि कद काटी के हिसाब से लाश राजेद्र की लग रही है, लेकिन कपड़े व एलआईसी का कागज राकेश का मिला है, लेकिन वास्तविक तौर पर कुछ कहा नहीं जा सकता। इसलिए दोनों परिवारों से लाश का डीएनए मैच कराया जाएगा। इसके बाद ही सही स्थिति सामने आएगी।
ढोलना के मारूपुर में मिली अलीगढ़ के युवक की सिर कटी लाश ने पुलिस को उलझा दिया है। लाश पर दो परिवार अपना दावा कर रहे हैं। इससे पुलिस भी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाई है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
राकेश पुत्र बनवारी लाल निवासी नौगवां गंगीरी अलीगढ़ की ससुराल मारहरा एटा में है। उसने गाजियाबाद में अपनी मां के नाम से एक मकान बना रखा है। 14 फरवरी को उसकी पत्नी दो बच्चों के साथ गाजियाबाद से लापता हो गई। वह अपने दोस्त राजेंद्र पुत्र दिलीप सिंह निवासी नौगंवा गंगीरी अलीगढ़ के साथ 25 अप्रैल को अपनी पत्नी का पता करने के लिए मारहरा के लिए आया था।
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कासगंज मथुरा रेल लाइन की पुलिया संख्या 406 के नीचे खाई में एक सिर कटी लाश बरामद हुई। लाश के हाथ भी आगे से काटे हुए हैं। हत्या करने के बाद पहचान छिपाने के लिए पेट्रोल डालकर आग लगा दी गई। लेकिन लाश पूरी तरह से नहीं जल पाई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने लाश को कब्जे में ले लिया। जेब से राकेश के नाम की एलआईसी की पर्ची बरामद हुई। इसके आधार पर मामले की सूचना नौगवां भेजी गई। चूंकि एक लाश मिल गई। जबकि साथी युवक गायब है। इसलिए दोनों ही परिवार के लोग पहुंच गए। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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परिजनों के पहुंचने के साथ ही मामला उलझ गया। लाश पर मिले कपड़े व पर्ची के आधार पर उसके भाई राजीव ने अपने भाई की लाश होने का दावा किया। जबकि कद काटी के आधार पर राजेंद्र का भाई बंटी लाश को अपने भाई की होने का दावा करने लगा। ऐसी स्थिति में पुलिस भी पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हो पा रही कि लाश किसकी है।
मामला भी सुलझाना भी पुलिस के लिए चुनौती
कासगंज। दो दोस्तों में से एक युवक की लाश बरामद हो जाने के बाद लापता दूसरे युवक की गुत्थी सुलझाना भी पुलिस के लिए चुनौती है। दूसरा युवक वास्तव में कहीं लापता हो गया है या फिर उसकी भी किसी ने हत्या करके शव कहीं और डाल दिया है। या फिर उसने ही अपने साथी की हत्या की और कहीं गायब हो गया।
डीएन से खुलेगा असली राज
कासगंज। दोनों दोस्तों में से लाश वास्तव में किसकी है इसका रहस्य जानने के लिए पुलिस डीएनए टैस्ट कराने की तैयारी कर रही है। इस संबंध में थाना प्रभारी का कहना है कि कद काटी के हिसाब से लाश राजेद्र की लग रही है, लेकिन कपड़े व एलआईसी का कागज राकेश का मिला है, लेकिन वास्तविक तौर पर कुछ कहा नहीं जा सकता। इसलिए दोनों परिवारों से लाश का डीएनए मैच कराया जाएगा। इसके बाद ही सही स्थिति सामने आएगी।