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खाते में 27 लाख, विकास के नाम पद छलावा
Updated Sun, 15 Oct 2017 10:43 PM IST
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खाते में 27 लाख रुपये का बजट है, लेकिन गांव के विकास पर फूटी कौड़ी खर्च नहीं हुई। पूरी साल गांव के लोग विकास की मांग करते रहे और जनप्रतिनिधि बजट का रोना रोते रहे। न तो सड़कें बनी और टूटे नाले सही हुए। विकास के लिए आए धन को ठिकाने लगाने की तैयारी में विकास से मुंह मोड़ लिया गया। गांव को आदर्श बनाने की दलीलें देने वाले फर्रुखाबाद सांसद ने भी विकास की सुध नहीं ली। आइए जानते हैं सांसद आदर्श गांव अमरौली रतनपुर का हाल...।
कार्ययोजना में भेजे गए लाखों के प्रस्ताव
ग्राम पंचायत की वार्षिक कार्ययोजना 2016-17 में गांव के विकास को लाखों के प्रस्ताव भेजे गए। इसमें नाला निर्माण, सोलर लाइटें, हैंडपंप रिबोर समेत तमाम कामों का ब्यौरा दर्ज कराया गया। सापेक्ष शासन की ओर से गांव के विकास के लिए 16 लाख रुपये की किश्त भी भेजी गई। मगर एक भी रुपया खर्च नहीं किया गया।
गांव जाने वाला रास्ता जर्जर
कहने को गांव अमरौली रतनपुर को फर्रुखाबाद के सांसद मुकेश राजपूत ने आदर्श बनाने के लिए गोद लिया है। मगर हकीकत कुछ और ही है। गांव जाने वाला करीब पांच किलोमीटर मार्ग जर्जर पड़ा है। साथ ही कच्चे रास्तों के साथ गांव की गलियों में जलभराव है। वहीं विद्युतीकरण के नाम पर गांव में लगे खंबे और तार टूटे पड़े हैं।
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पूरी साल में खर्च किए महज 40 हजार
प्रधान ने पूरी साल में विकास को आए धन में महज 40 हजार रुपये खर्च किए। इसमें 10 हजार रुपये से कैमरा खरीदा गया और 30 हजार रुपये से इन्वर्टर बैटरी लगवाई गई। जबकि खाते में पड़ी धनराशि के सापेक्ष 53 हजार रुपये की ब्याज मिली।
टंकी तक सीमित रह गए सांसद
सांसद आदर्श गांव में सांसद ने महज एक पानी की टंकी बनवाई है। इसमें भी पानी की आपूर्ति आए दिन ठप रहती है। इसके साथ ही गांव में कहीं भी सांसद आदर्श गांव होने का बोर्ड तक नजर नहीं आया।
कहते हैं लोग
गांव में विकास के नाम पर कुछ भी नहीं हो सका। जनप्रतिनिधि आते रहे और आश्वासन देकर जाते रहे।
बहादुर सिंह
गांव में सड़कें टूटी हुई पड़ी हैं। गलियोें में पानी भरा हुआ है। कोई भी सुनवाई करने वाला नहीं है।
कुंदन
गांव को सांसद आदर्श गांव घोषित किया गया है। मगर आज तक आदर्श गांव जैसा कोई विकास कार्य नहीं हुआ।
लालाराम
गांव में एक पानी की टंकी बनवाई गई है। तार टूटे पड़े हैं। बिजली आती नहीं है। ऐसा आदर्श गांव आज तक न देखा।
राधेश्याम
कहते हैं आंकड़े
16 लाख रुपये की किश्त मिली वर्ष 2016-17 में
53 हजार रुपये की ब्याज ग्राम निधि खाते में
6.5 लाख रुपये की पहली किश्त 2017-18 की खाते में
40 हजार रुपये किए गए पूरी साल में खर्च
नोट :: यह वर्जन है, सांसद गांव वाली खबर के साथ लगाने की कोशिश करें
इनका कहना है
ग्राम पंचायतों की विकास कार्यों की प्रक्रिया जटिल होने से खाते से धन नहीं निकाला जा सका है। कार्ययोजना फीड होने के बाद प्रधानों के अधिकारों में बदलाव कर दिया गया। फिर भी अपने स्तर से दो गलियों में खड़ंजा बनवाया है और सोलर लाइटें लगवाई हैं। मगर अब तक धन निकालने का आदेश नहीं मिल सका है। ऐसे में विकास कार्य अटक गए हैं।
राजेश कुमार, ग्राम प्रधान
ग्राम पंचायतों की धन निकासी प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं हुआ है। प्रधान मनमाने तरीके से निधि को खर्च करना चाहते हैं। जबकि आदेश के मुताबिक पहले एस्टीमेट और वर्क आईडी जारी होने के बाद ही धन की निकासी की जाएगी। प्रधान आदेशोें को समझ नहीं रहे हैं।
धनंजय जायसवाल, डीपीआरओ, एटा
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खाते में 27 लाख रुपये का बजट है, लेकिन गांव के विकास पर फूटी कौड़ी खर्च नहीं हुई। पूरी साल गांव के लोग विकास की मांग करते रहे और जनप्रतिनिधि बजट का रोना रोते रहे। न तो सड़कें बनी और टूटे नाले सही हुए। विकास के लिए आए धन को ठिकाने लगाने की तैयारी में विकास से मुंह मोड़ लिया गया। गांव को आदर्श बनाने की दलीलें देने वाले फर्रुखाबाद सांसद ने भी विकास की सुध नहीं ली। आइए जानते हैं सांसद आदर्श गांव अमरौली रतनपुर का हाल...।
कार्ययोजना में भेजे गए लाखों के प्रस्ताव
ग्राम पंचायत की वार्षिक कार्ययोजना 2016-17 में गांव के विकास को लाखों के प्रस्ताव भेजे गए। इसमें नाला निर्माण, सोलर लाइटें, हैंडपंप रिबोर समेत तमाम कामों का ब्यौरा दर्ज कराया गया। सापेक्ष शासन की ओर से गांव के विकास के लिए 16 लाख रुपये की किश्त भी भेजी गई। मगर एक भी रुपया खर्च नहीं किया गया।
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गांव जाने वाला रास्ता जर्जर
कहने को गांव अमरौली रतनपुर को फर्रुखाबाद के सांसद मुकेश राजपूत ने आदर्श बनाने के लिए गोद लिया है। मगर हकीकत कुछ और ही है। गांव जाने वाला करीब पांच किलोमीटर मार्ग जर्जर पड़ा है। साथ ही कच्चे रास्तों के साथ गांव की गलियों में जलभराव है। वहीं विद्युतीकरण के नाम पर गांव में लगे खंबे और तार टूटे पड़े हैं।
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पूरी साल में खर्च किए महज 40 हजार
प्रधान ने पूरी साल में विकास को आए धन में महज 40 हजार रुपये खर्च किए। इसमें 10 हजार रुपये से कैमरा खरीदा गया और 30 हजार रुपये से इन्वर्टर बैटरी लगवाई गई। जबकि खाते में पड़ी धनराशि के सापेक्ष 53 हजार रुपये की ब्याज मिली।
टंकी तक सीमित रह गए सांसद
सांसद आदर्श गांव में सांसद ने महज एक पानी की टंकी बनवाई है। इसमें भी पानी की आपूर्ति आए दिन ठप रहती है। इसके साथ ही गांव में कहीं भी सांसद आदर्श गांव होने का बोर्ड तक नजर नहीं आया।
कहते हैं लोग
गांव में विकास के नाम पर कुछ भी नहीं हो सका। जनप्रतिनिधि आते रहे और आश्वासन देकर जाते रहे।
बहादुर सिंह
गांव में सड़कें टूटी हुई पड़ी हैं। गलियोें में पानी भरा हुआ है। कोई भी सुनवाई करने वाला नहीं है।
कुंदन
गांव को सांसद आदर्श गांव घोषित किया गया है। मगर आज तक आदर्श गांव जैसा कोई विकास कार्य नहीं हुआ।
लालाराम
गांव में एक पानी की टंकी बनवाई गई है। तार टूटे पड़े हैं। बिजली आती नहीं है। ऐसा आदर्श गांव आज तक न देखा।
राधेश्याम
कहते हैं आंकड़े
16 लाख रुपये की किश्त मिली वर्ष 2016-17 में
53 हजार रुपये की ब्याज ग्राम निधि खाते में
6.5 लाख रुपये की पहली किश्त 2017-18 की खाते में
40 हजार रुपये किए गए पूरी साल में खर्च
नोट :: यह वर्जन है, सांसद गांव वाली खबर के साथ लगाने की कोशिश करें
इनका कहना है
ग्राम पंचायतों की विकास कार्यों की प्रक्रिया जटिल होने से खाते से धन नहीं निकाला जा सका है। कार्ययोजना फीड होने के बाद प्रधानों के अधिकारों में बदलाव कर दिया गया। फिर भी अपने स्तर से दो गलियों में खड़ंजा बनवाया है और सोलर लाइटें लगवाई हैं। मगर अब तक धन निकालने का आदेश नहीं मिल सका है। ऐसे में विकास कार्य अटक गए हैं।
राजेश कुमार, ग्राम प्रधान
ग्राम पंचायतों की धन निकासी प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं हुआ है। प्रधान मनमाने तरीके से निधि को खर्च करना चाहते हैं। जबकि आदेश के मुताबिक पहले एस्टीमेट और वर्क आईडी जारी होने के बाद ही धन की निकासी की जाएगी। प्रधान आदेशोें को समझ नहीं रहे हैं।
धनंजय जायसवाल, डीपीआरओ, एटा