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‘राम’ से ज्यादा हैं ‘रावण’ के भाव

Tue, 12 Sep 2017 12:16 AM IST
पुनीत शर्मा
पुनीत शर्मा Updated Tue, 12 Sep 2017 12:16 AM IST
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‘राम’ से ज्यादा हैं ‘रावण’ के भाव
सांकेतिक चित्र - फोटो : demo
मथुरा। इस साल रामलीला में रावण का किरदार निभाने वाले कलाकार श्रीराम से भी महंगे हो गए हैं। रावण बनने वाले कलाकार 25 से 30 हजार ले रहे हैं जबकि राम-लक्ष्मण बनने वाले 15 से 20 हजार में उपलब्ध हैं। माना जा रहा है कि रावण जैसी रौबदार पर्सनालिटी निभाने वाले नए-नए कलाकार ढूंढे नहीं रहे हैं, जो हैं वे मुंह मांगी फीस ले रहे हैं। वहीं, अबकी रामलीला मंडलियों में दर्शकों को बांधे रखने वाले हास्य कलाकारों की भी कमी हो गई है। यही वजह है इन कलाकारों ने भी अपनी फीस बढ़ा दी है।
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रामलीला का मंचन शुरू होने जा रहा है। 15 सितंबर से 20 सितंबर के बीच में रामलीला शुरू हो जाएंगी। रामलीला मंडलियों ने भी तैयारियां कर ली हैं। कोई मंडली 16 को रवाना होगी तो कोई 19 को। रामलीला मंडलियों के संचालकों का कहना है कि रामलीला पर हर साल महंगाई आ रही है। कई पात्र मिलने मुश्किल हो जाते हैं। सबसे ज्यादा महंगाई रावण का किरदार निभाने वाले पर आई है।
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श्री अनन्त रामलीला मंडल के संचालक बैजनाथ चतुर्वेदी का कहना है कि रावण के लिए अच्छा कलाकार मिलना मुश्किल होता है। वैसे भी रावण का रोल सबसे रूआबदार होता है उसकी पर्सनालिटी होती है। अब रावण तीस हजार से कम नहीं ले रहे हैं। उसकी बड़ी वजह रावण का किरदार करने वालों की कमी होना भी है।
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श्री आदर्श रामलीला मंडल के निर्देशक राघवेंद्र वासुदेव चतुर्वेदी का कहना है कि पहले रावण का रोल करने वाले कलाकार 10 से 15 हजार में मिल जाया करते थे। अब से दस साल पहले की बात करें तो उस वक्त रावण का रोल करने वालों की कमी नहीं थी लेकिन अब कम हो गए हैं। यही वजह है कि मुंह मांगा पैसा भी देना पड़ता है।

ढूंढे नहीं मिल रहे रावण
मथुरा। अब रावण का मिल पाना भी आसान नहीं रहा। रामलीला कमेटियों की मानें तो रावण का रोल मजबूत कद काठी के शख्स को दिया जाता है। चतुर्वेद रामलीला मंच के महेश दत्त चतुर्वेदी का कहना है कि रावण के लिए लंबाई कम से कम साढ़े छह फुट होनी चाहिए। शरीर भी दम-खम वाला चाहिए। आवाज में भी वजन और खनक हो। चेहरे पर भाव और रूआब हो। आजकल के युवाओं में ऐसी खूबियां कम ही देखने को मिलती है। ऐसे में पुराने कलाकारों के भाव चढ़े हुए हैं।

देश भर में है मथुरा की रामलीला मंडलियों की पहचान
मथुरा। भगवान कृष्ण की नगरी मथुरा की रामलीला मंडलियों की पहचान देश भर में हैं। उत्तर प्रदेश के साथ ही उत्तराखंड, दिल्ली, मुंबई, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब तक में रामलीला करने के लिए मथुरा की मंडलियां जाती हैं। कई रामलीला मंडलियां तो ऐसी हैं जो पिछले कई वर्षों से एक ही शहर में रामलीला करती आ रही हैं। पंद्रह सितंबर से सभी की रवानगी शुरू हो जाएगी। दशहरा के बाद ही यह लोग वापस मथुरा को लौटेंगे।



इन शहरों में रामलीला करने रवाना होंगे कलाकार
मंडलियां अबकी साल मथुरा से आगरा, अलीगढ़, एटा, मैनपुरी, फिरोजाबाद, बुलंदशहर, मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर, हापुड़, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, अमरोहा, बरेली कानपुर, फतेहपुर, कोटद्वार जाएंगी।
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