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कार्यकर्ताओं के चंदे से लड़े, 28 हजार रुपये हुआ खर्च
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कार्यकर्ताओं के चंदे से लड़े, 28 हजार रुपये हुआ खर्च
- फोटो : अमर उजाला
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एटा। तब न जीप थी न कारें। चुनाव खर्च के लिए भी पैसे नहीं थे लेकिन चुनाव लड़ने का मौका मिला तो कार्यकर्ताओं ने जोश भर दिया। कार्यकर्ताओं ने ही चंदा कर रुपये इकट्ठे किए और चुनाव लड़ाया ही नहीं जिता भी दिया। छह बार सांसद रहे डा. महादीपक सिंह की बैठकों के लिए उस समय लंच पैकेट कार्यकर्ताओं के घर से आते थे। उनके अनुसार पहला चुनाव मात्र 28 हजार रुपये खर्च कर जीता था।
सामान्य किसान परिवार से आने वाले डॉ. महादीपक सिंह ने भारतीय जनसंघ का प्रत्याशी बनाकर कांग्रेस की सामंतशाही संस्कृति को कड़ी चुनौती दी थी। सत्तारूढ़ दल के प्रत्याशी के पास संसाधन की चकाचौंध के साथ ही कार्यकर्ताओं की फौज थी। वहीं दीपक चुनाव चिह्न के सहारे निकले महादीपक के पास कार्यकर्ताओं का समर्थन तो था लेकिन संसाधन नहीं। डा. शाक्य के अनुसार, पहले चुनाव में पार्टी से कोई आर्थिक सहायता नहीं मिली। यह चुनाव कार्यकर्ताओं द्वारा एकत्रित चंदे से लड़ा गया। उनकी जेब से मात्र 28 हजार रुपये खर्च हुए थे। 1971 से 1998 तक छह बार संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले महादीपक जीत के कई ऐसे रिकार्ड बना गए जिन्हें पार करना भविष्य में भी आसान नहीं होगा। 16 संसदीय चुनाव में छह बार की जीत उन्हीं के नाम है।
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कार्यकर्ताओं के उत्साह से जीता चुनाव
डा. महादीपक के पांच चुनावों के संयोजक रहे भाजपा नेता सुरेंद्र प्रकाश गुप्ता बताते हैं कि सत्तारूढ़ दल की सामंती चकाचौंध के विरुद्ध यह ऐसा चुनाव था जो कार्यकर्ताओं के उत्साह से लड़ा गया। संसाधनों के अभाव के बाद भी मनोबल कम नहीं था। बदायूं तक फैले संसदीय क्षेत्र में बस से जाना पड़ा। बैनर, होर्डिंग तो दूर कार्यकर्ताओं को झंडी तक नहीं मिलती थी। बैठकों केे लिए भोजन की व्यवस्था भी कार्यकर्ताओं के घरों से पैकेट मंगाकर की जाती थी।
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चुनाव विजेता वोट मुख्य प्रतिद्वंदी वोट
1977 डा. महादीपक सिंह 268136 राशिद सेरवानी 86616
1989 डा.महादीपक सिंह 143442 सलीम इकबाल 135969
1991 डा.महादीपक सिंह 148169 लटूरी सिंह 123937
1996 डा.महादीपक सिंह 190855 रमेश यादव 145152
1998 डा.महादीपक सिंह 286982 देवेंद्र यादव 274842
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सामान्य किसान परिवार से आने वाले डॉ. महादीपक सिंह ने भारतीय जनसंघ का प्रत्याशी बनाकर कांग्रेस की सामंतशाही संस्कृति को कड़ी चुनौती दी थी। सत्तारूढ़ दल के प्रत्याशी के पास संसाधन की चकाचौंध के साथ ही कार्यकर्ताओं की फौज थी। वहीं दीपक चुनाव चिह्न के सहारे निकले महादीपक के पास कार्यकर्ताओं का समर्थन तो था लेकिन संसाधन नहीं। डा. शाक्य के अनुसार, पहले चुनाव में पार्टी से कोई आर्थिक सहायता नहीं मिली। यह चुनाव कार्यकर्ताओं द्वारा एकत्रित चंदे से लड़ा गया। उनकी जेब से मात्र 28 हजार रुपये खर्च हुए थे। 1971 से 1998 तक छह बार संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले महादीपक जीत के कई ऐसे रिकार्ड बना गए जिन्हें पार करना भविष्य में भी आसान नहीं होगा। 16 संसदीय चुनाव में छह बार की जीत उन्हीं के नाम है।
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कार्यकर्ताओं के उत्साह से जीता चुनाव
डा. महादीपक के पांच चुनावों के संयोजक रहे भाजपा नेता सुरेंद्र प्रकाश गुप्ता बताते हैं कि सत्तारूढ़ दल की सामंती चकाचौंध के विरुद्ध यह ऐसा चुनाव था जो कार्यकर्ताओं के उत्साह से लड़ा गया। संसाधनों के अभाव के बाद भी मनोबल कम नहीं था। बदायूं तक फैले संसदीय क्षेत्र में बस से जाना पड़ा। बैनर, होर्डिंग तो दूर कार्यकर्ताओं को झंडी तक नहीं मिलती थी। बैठकों केे लिए भोजन की व्यवस्था भी कार्यकर्ताओं के घरों से पैकेट मंगाकर की जाती थी।
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चुनाव विजेता वोट मुख्य प्रतिद्वंदी वोट
1977 डा. महादीपक सिंह 268136 राशिद सेरवानी 86616
1989 डा.महादीपक सिंह 143442 सलीम इकबाल 135969
1991 डा.महादीपक सिंह 148169 लटूरी सिंह 123937
1996 डा.महादीपक सिंह 190855 रमेश यादव 145152
1998 डा.महादीपक सिंह 286982 देवेंद्र यादव 274842