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धनराशि का इंतजार तो कहीं बजट की भरमार
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मैनपुरी। जिले की बड़ी परियोजनाओं के लोकार्पण के लिए अभी और इंतजार करना होगा। पुराने साल में इनका कार्य पूरा नहीं हो सका। अब नए साल में इन परियोजनाओं के पूरे होने की उम्मीद की जा रही है। इन परियोजनाओं में कुछ धनराशि के अभाव में धीमी गति से चल रही है तो कुछ बजट होने के बाद भी फर्राटा नहीं भर सकीं।
वर्तमान में जिले में तीन बड़ी परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इसमें बहुप्रतीक्षित सैनिक स्कूल, राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज और भोगांव शिकोहाबाद फोरेलेन मार्ग प्रमुख हैं। कई सालों से लोगों को इन परियोजनाओं के पूरा होने का इंतजार है, लेकिन साल दर साल इंतजार बढ़ता चला जा रहा है। राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज की बात करें तो यहां बजट उपलब्ध है। 4.20 करोड़ की स्वीकृत लागत के सापेक्ष अब तक 3.10 करोड़ की धनराशि अवमुक्त हुई। इसमें से 2.9 करोड़ रुपये ही खर्च किए जा सके हैं। जब तक पूरी धनराशि खर्च नहीं हो जाती है तब तक शासन से बजट की मांग भी नहीं की जा सकती।
वहीं सैनिक स्कूल का हाल भी कुछ ऐसा ही है 69 करोड़ अवमुक्त धनराशि में से 66 करोड़ रुपये ही अब तक निर्माण में खर्च हो पाए हैं। इसके चलते अब तक निर्माण कार्य अधूरा है। 2018 में लोगों को उम्मीद थी कि ये परियोजनाएं पूरी हो जाएंगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। तीसरी और सबसे बड़ी परियोजना है भोगांव-शिकोहाबाद फोरलेन। 292 करोड़ की लागत से सड़क का चौड़ीकरण किया जा रहा है। काम अक्तूबर 2017 तक पूरा होना था, लेकिन बजट के अभाव में इस परियोजना को पंख नहीं लग सके।
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हाल ये है कि अब तक कुल 75 करोड़ रुपये की धनराशि ही अवमुक्त की गई है। अवमुक्त धनराशि के सापेक्ष कार्य भी शत-प्रतिशत पूर्ण कर लिया गया है। अगर समय से शासन से बजट मिलता रहता तो आज वाहन फोरलेन पर फर्राटा भर रहे होते। इसके अलावा अन्य कई परियोजनाएं भी इस वर्ष पूरी नहीं हो सकीं। अब नए वर्ष में ही इनके पूरे होने की उम्मीद है।
सभी विभागों की कोशिश है कि योजनाएं समय से पूरी हों, शासन से विकास कार्यों के लिए पर्याप्त बजट मिल रहा है।
बी राम, एडीएम
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वर्तमान में जिले में तीन बड़ी परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इसमें बहुप्रतीक्षित सैनिक स्कूल, राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज और भोगांव शिकोहाबाद फोरेलेन मार्ग प्रमुख हैं। कई सालों से लोगों को इन परियोजनाओं के पूरा होने का इंतजार है, लेकिन साल दर साल इंतजार बढ़ता चला जा रहा है। राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज की बात करें तो यहां बजट उपलब्ध है। 4.20 करोड़ की स्वीकृत लागत के सापेक्ष अब तक 3.10 करोड़ की धनराशि अवमुक्त हुई। इसमें से 2.9 करोड़ रुपये ही खर्च किए जा सके हैं। जब तक पूरी धनराशि खर्च नहीं हो जाती है तब तक शासन से बजट की मांग भी नहीं की जा सकती।
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वहीं सैनिक स्कूल का हाल भी कुछ ऐसा ही है 69 करोड़ अवमुक्त धनराशि में से 66 करोड़ रुपये ही अब तक निर्माण में खर्च हो पाए हैं। इसके चलते अब तक निर्माण कार्य अधूरा है। 2018 में लोगों को उम्मीद थी कि ये परियोजनाएं पूरी हो जाएंगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। तीसरी और सबसे बड़ी परियोजना है भोगांव-शिकोहाबाद फोरलेन। 292 करोड़ की लागत से सड़क का चौड़ीकरण किया जा रहा है। काम अक्तूबर 2017 तक पूरा होना था, लेकिन बजट के अभाव में इस परियोजना को पंख नहीं लग सके।
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हाल ये है कि अब तक कुल 75 करोड़ रुपये की धनराशि ही अवमुक्त की गई है। अवमुक्त धनराशि के सापेक्ष कार्य भी शत-प्रतिशत पूर्ण कर लिया गया है। अगर समय से शासन से बजट मिलता रहता तो आज वाहन फोरलेन पर फर्राटा भर रहे होते। इसके अलावा अन्य कई परियोजनाएं भी इस वर्ष पूरी नहीं हो सकीं। अब नए वर्ष में ही इनके पूरे होने की उम्मीद है।
सभी विभागों की कोशिश है कि योजनाएं समय से पूरी हों, शासन से विकास कार्यों के लिए पर्याप्त बजट मिल रहा है।
बी राम, एडीएम