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पुलिस की कहानी फेल, कोर्ट ने माना तारकोल व्यापारी की हुई है हत्या
Updated Tue, 16 Oct 2018 11:55 PM IST
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डेमो
- फोटो : डेमो
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मथुरा। तारकोल व्यापारी की मौत को आत्महत्या बताने वाली कोतवाली पुलिस को बड़ा झटका लगा है। अदालत ने रिमांड की सुनवाई पर हुई बहस के दौरान माना कि तारकोल व्यापारी की हत्या हुई है। अदालत ने शिवराज और उसके साथी लक्ष्मण को हत्या के मामले में जेल भेज दिया है। साथ ही विवेचक के खिलाफ जांच कर कार्रवाई के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को लिखा गया है।
रुक्मिणी विहार निवासी तारकोल व्यापारी अशोक अग्रवाल का शव 13 अक्तूबर को कोसीकलां के कोटवन बार्डर के समीप मिला था। परिजन उनकी मौत को हत्या बता रहे थे तथा बाद निवासी शिवराज ठाकुर पर धमकी देने का आरोप लगा रहे थे। उनके द्वारा इस संबंध में कोतवाली पुलिस को तहरीर भी दी थी लेकिन कोतवाली पुलिस इसे आत्महत्या मानकर चल रही थी।
शहर कोतवाली पुलिस ने वारदात के बाद आरोपी राधा टाउन कालोनी बाद निवासी शिवराज और उसके साथी लक्ष्मण को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस इन दोनों को आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा में जेल भेज रही थी।
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सोमवार को कोतवाली पुलिस ने दोनों को एसीजेएम तृतीय न्यायाधिकारी मयूर जैन की अदालत में पेश भी किया लेकिन कोर्ट ने धारा 306 के पर्याप्त सबूत न होने पर जेल नहीं भेजा। मंगलवार को इसकी सुनवाई सीजेएम कोर्ट में हुई। न्यायाधिकारी संजय कुमार यादव की अदालत में भी कोतवाली पुलिस आत्महत्या को उकसाने के प्रयास के पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर सकी।
लिहाजा कोर्ट ने तारकोल व्यापारी की हत्या के आरोपी मानते हुए आरोपी शिवराज और लक्ष्मण को जेल भेज दिया। कोर्ट ने विवेचना में लापरवाही बरतने वाले कृष्णा नगर चौकी इंचार्ज अनुराग शर्मा के खिलाफ कार्रवाई के लिए एसएसपी को पत्र लिखा है।
इस संबंध में वादी के अधिवक्ता भूपेंद्र उपाध्याय और राजेश कुमार सिंघल ने बताया कि पुलिस इस मामले में आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रही थी। बचाव पक्ष के अधिवक्ता नंदकिशोर उपमन्यु ने बताया कि कोर्ट ने मामले को हत्या की वारदात माना है। कोतवाली प्रभारी विकास तोमर ने बताया कि वारदात में मिले साक्ष्य के आधार पर विवेचना की जाएगी।
सीजेएम कोर्ट ने पुलिस जांच को कटघरे में खड़ा किया, लगाई फटकार
मथुरा। तारकोल व्यापारी अशोक अग्रवाल की मौत के मामले में धाराओं में खेल करने वाली पुलिस को मंगलवार को कोर्ट में मुंह की खानी पड़ी। कोर्ट ने पुलिस द्वारा विवेचना में की गई लापरवाही पर सख्ती दिखाई है तथा वारदात के पर्याप्त साक्ष्य जुटाने के आदेश दिए हैं।
सीजेएम कोर्ट ने माना कि तारकोल व्यापारी अशोक अग्रवाल के अपहरण से लेकर मौत तक पुलिस ने भारी लापरवाही बरती। कोर्ट ने पुलिस जांच को कटघरे में खड़ा करते हुए रिमांड आदेश में लिखा है कि तारकोल व्यापारी अशोक अग्रवाल द्वारा चौधरी टेलीकॉम बामनी रोड पलवल के पेटीएम से निकाली गई धनराशि के समय की सीसीटीवी रिकार्डिंग का साक्ष्य, मृतक के मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल भी संकलित नहीं की गई। इन सबको आधार मानते हुए कोर्ट ने पुलिस द्वारा लगाई गई आत्महत्या को प्रेरित करने वाली धारा को बदल दिया बल्कि हत्या तथा अन्य धाराओं में जेल भेजा है।
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रुक्मिणी विहार निवासी तारकोल व्यापारी अशोक अग्रवाल का शव 13 अक्तूबर को कोसीकलां के कोटवन बार्डर के समीप मिला था। परिजन उनकी मौत को हत्या बता रहे थे तथा बाद निवासी शिवराज ठाकुर पर धमकी देने का आरोप लगा रहे थे। उनके द्वारा इस संबंध में कोतवाली पुलिस को तहरीर भी दी थी लेकिन कोतवाली पुलिस इसे आत्महत्या मानकर चल रही थी।
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शहर कोतवाली पुलिस ने वारदात के बाद आरोपी राधा टाउन कालोनी बाद निवासी शिवराज और उसके साथी लक्ष्मण को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस इन दोनों को आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा में जेल भेज रही थी।
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सोमवार को कोतवाली पुलिस ने दोनों को एसीजेएम तृतीय न्यायाधिकारी मयूर जैन की अदालत में पेश भी किया लेकिन कोर्ट ने धारा 306 के पर्याप्त सबूत न होने पर जेल नहीं भेजा। मंगलवार को इसकी सुनवाई सीजेएम कोर्ट में हुई। न्यायाधिकारी संजय कुमार यादव की अदालत में भी कोतवाली पुलिस आत्महत्या को उकसाने के प्रयास के पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर सकी।
लिहाजा कोर्ट ने तारकोल व्यापारी की हत्या के आरोपी मानते हुए आरोपी शिवराज और लक्ष्मण को जेल भेज दिया। कोर्ट ने विवेचना में लापरवाही बरतने वाले कृष्णा नगर चौकी इंचार्ज अनुराग शर्मा के खिलाफ कार्रवाई के लिए एसएसपी को पत्र लिखा है।
इस संबंध में वादी के अधिवक्ता भूपेंद्र उपाध्याय और राजेश कुमार सिंघल ने बताया कि पुलिस इस मामले में आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रही थी। बचाव पक्ष के अधिवक्ता नंदकिशोर उपमन्यु ने बताया कि कोर्ट ने मामले को हत्या की वारदात माना है। कोतवाली प्रभारी विकास तोमर ने बताया कि वारदात में मिले साक्ष्य के आधार पर विवेचना की जाएगी।
सीजेएम कोर्ट ने पुलिस जांच को कटघरे में खड़ा किया, लगाई फटकार
मथुरा। तारकोल व्यापारी अशोक अग्रवाल की मौत के मामले में धाराओं में खेल करने वाली पुलिस को मंगलवार को कोर्ट में मुंह की खानी पड़ी। कोर्ट ने पुलिस द्वारा विवेचना में की गई लापरवाही पर सख्ती दिखाई है तथा वारदात के पर्याप्त साक्ष्य जुटाने के आदेश दिए हैं।
सीजेएम कोर्ट ने माना कि तारकोल व्यापारी अशोक अग्रवाल के अपहरण से लेकर मौत तक पुलिस ने भारी लापरवाही बरती। कोर्ट ने पुलिस जांच को कटघरे में खड़ा करते हुए रिमांड आदेश में लिखा है कि तारकोल व्यापारी अशोक अग्रवाल द्वारा चौधरी टेलीकॉम बामनी रोड पलवल के पेटीएम से निकाली गई धनराशि के समय की सीसीटीवी रिकार्डिंग का साक्ष्य, मृतक के मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल भी संकलित नहीं की गई। इन सबको आधार मानते हुए कोर्ट ने पुलिस द्वारा लगाई गई आत्महत्या को प्रेरित करने वाली धारा को बदल दिया बल्कि हत्या तथा अन्य धाराओं में जेल भेजा है।