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दोषियों को बचाने जांच में हो रहा खेल
Updated Sat, 06 Oct 2018 10:49 PM IST
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एटा। विकास खंड सकीट की क्षेत्र पंचायत में मनरेगा घोटाले में नेताओं ने भी अपने हाथ काले कर लिए हैं। घोटाले में कार्रवाई से बचने और विभागीय दोषियों को बचाने के लिए पूर्व नेता जांच को प्रभावित करने में जुट गए हैं। सत्यापन में लगाए गए अधिकारियों की टीम से सांठगांठ का दौर चल निकला है। इसके चलते जांच रिपोर्ट मिलने में देरी हो रही है।
शनिवार को जांच रिपोर्ट और सत्यापन की हकीकत जानने के लिए सीडीओ उग्रसेन पांडेय ने सकीट ब्लॉक का निरीक्षण किया। ग्राम प्रधानों से चर्चा की। इसमें सामने आया कि एक बड़े नेता की शह पर जांच प्रक्रिया को धीमी गति से चलाया जा रहा है। सूत्र बताते है कि कई जांच टीमों ने दोषियों को बचाने के लिए बड़ी सांठगाठ की है। इसके बाद दोषियों पर लगे आरोपों को कम करने की कवायद शुरू हो चुकी है। प्रशासन के अधिकारी पूर्व सत्ताधारी पार्टी के एक नेता के साथ मिलकर घोटाले को दबाने की कवायद में जुटे है। इसके चलते पूरी जांच में खेल होने की संभावना है। बताया जाता है कि जांच प्रभावित करने वाले पूर्व नेता ब्लॉक में कुछ सालों पूर्व विधान सभा क्षेत्र के बड़े पद पर काबिज रहे हैं। मौजूदा दौर में उनकी क्षेत्र में अच्छी पकड़ मानी जाती है।
- दावा, हर स्तर तक पहुंची थी घोटाले की रकम
मनरेगा घोटाले को लेकर जिले में हड़कंप है। हालांकि जिला प्रशासन अभी जिला स्तरीय जांच तक ही सीमित है। दावा किया जा रहा है कि घोटाले में ब्लॉक से लेकर जिला स्तर तक के अधिकारियों की मिलीभगत रही है। घोटालेबाजों ने वर्ष 2016-17 में जिले में तैनात अधिकारियों को खेल के एवज में पूरे हिस्सेदारी दी है।
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- खाते से किस तरह निकली मजदूरी की हो रही जांच
जिले में सामने आए मनरेगा घोटाले में जांच धीमी गति से चल रही है, लेकिन आए दिन खुल रही परतें बड़े खेल की ओर इशारा करती नजर आ रही है। ब्लॉक स्तर पर श्रमिकों को मजदूरी देने के लिए बनाई जाने वाली मस्टररोल भी फर्जी मानी जा रही है। जिला प्रशासन अब मस्टर रोल के माध्यम से मजदूरी पाने वाले श्रमिको के खातों को खंगालने की तैयारी में है। इसमें देखा जाएगा कि मजदूरी को श्रमिकों ने किस तरह से खाते से आहरित किया है।
- यह है पूरा मामला
सकीट ब्लॉक में मनरेगा के तहत वर्ष 2016-17 और 2017-18 में कराए गए कच्चे पक्के 73 कार्यों का फर्जी तरीके से भुगतान कर दिया गया। मौके पर एक फावड़ा मिट्टी तक नहीं डाली गई है। जबकि 1.76 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया। इसको लेकर डीडीओ एसएन कुशवाहा ने अपनी जांच रिपोर्ट में घोटाले की पुष्टि भी कर दी है। इसके बाद सीडीओ उग्रसेन पांडेय ने दस जिला स्तरीय अधिकारियों की टीम लगाकर सभी कार्यों का सत्यापन कराया जा रहा है।
- घोटाले की जांच को सकीट पहुंचे सीडीओ
मनरेगा घोटाले की जांच के लिए खुद सीडीओ उग्रसेन पांडेय शनिवार को सकीट ब्लॉक पहुंचे। उन्होंने ग्राम प्रधानों के साथ मनरेगा में घोटाले को लेकर चर्चा की।
- तत्कालीन बीडीओ को डीएम ने किया तलब
मामले में सामने आ रहे तत्कालीन बीडीओ को डीएम ने घोटाला खुलने के बाद तलब कर लिया है। अधिकारी ने जिले में डीएम के सामने अपनी आमद करा दी है। पूछताछ का दौर जारी है। बताते चले कि तत्कालीन बीडीओ दूसरे जनपद में तैनात है।
सत्यापन में लगाई गई टीमों ने अभी तक अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपी है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। सकीट के ग्राम प्रधानों के साथ समीक्षा बैठक करने के लिए ब्लॉक गए थे। प्रधानों ने कुछ समस्या सामने रखी है। उनका निस्तारण कराया जाएगा।
उग्रसेन पांडेय, सीडीओ
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शनिवार को जांच रिपोर्ट और सत्यापन की हकीकत जानने के लिए सीडीओ उग्रसेन पांडेय ने सकीट ब्लॉक का निरीक्षण किया। ग्राम प्रधानों से चर्चा की। इसमें सामने आया कि एक बड़े नेता की शह पर जांच प्रक्रिया को धीमी गति से चलाया जा रहा है। सूत्र बताते है कि कई जांच टीमों ने दोषियों को बचाने के लिए बड़ी सांठगाठ की है। इसके बाद दोषियों पर लगे आरोपों को कम करने की कवायद शुरू हो चुकी है। प्रशासन के अधिकारी पूर्व सत्ताधारी पार्टी के एक नेता के साथ मिलकर घोटाले को दबाने की कवायद में जुटे है। इसके चलते पूरी जांच में खेल होने की संभावना है। बताया जाता है कि जांच प्रभावित करने वाले पूर्व नेता ब्लॉक में कुछ सालों पूर्व विधान सभा क्षेत्र के बड़े पद पर काबिज रहे हैं। मौजूदा दौर में उनकी क्षेत्र में अच्छी पकड़ मानी जाती है।
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- दावा, हर स्तर तक पहुंची थी घोटाले की रकम
मनरेगा घोटाले को लेकर जिले में हड़कंप है। हालांकि जिला प्रशासन अभी जिला स्तरीय जांच तक ही सीमित है। दावा किया जा रहा है कि घोटाले में ब्लॉक से लेकर जिला स्तर तक के अधिकारियों की मिलीभगत रही है। घोटालेबाजों ने वर्ष 2016-17 में जिले में तैनात अधिकारियों को खेल के एवज में पूरे हिस्सेदारी दी है।
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- खाते से किस तरह निकली मजदूरी की हो रही जांच
जिले में सामने आए मनरेगा घोटाले में जांच धीमी गति से चल रही है, लेकिन आए दिन खुल रही परतें बड़े खेल की ओर इशारा करती नजर आ रही है। ब्लॉक स्तर पर श्रमिकों को मजदूरी देने के लिए बनाई जाने वाली मस्टररोल भी फर्जी मानी जा रही है। जिला प्रशासन अब मस्टर रोल के माध्यम से मजदूरी पाने वाले श्रमिको के खातों को खंगालने की तैयारी में है। इसमें देखा जाएगा कि मजदूरी को श्रमिकों ने किस तरह से खाते से आहरित किया है।
- यह है पूरा मामला
सकीट ब्लॉक में मनरेगा के तहत वर्ष 2016-17 और 2017-18 में कराए गए कच्चे पक्के 73 कार्यों का फर्जी तरीके से भुगतान कर दिया गया। मौके पर एक फावड़ा मिट्टी तक नहीं डाली गई है। जबकि 1.76 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया। इसको लेकर डीडीओ एसएन कुशवाहा ने अपनी जांच रिपोर्ट में घोटाले की पुष्टि भी कर दी है। इसके बाद सीडीओ उग्रसेन पांडेय ने दस जिला स्तरीय अधिकारियों की टीम लगाकर सभी कार्यों का सत्यापन कराया जा रहा है।
- घोटाले की जांच को सकीट पहुंचे सीडीओ
मनरेगा घोटाले की जांच के लिए खुद सीडीओ उग्रसेन पांडेय शनिवार को सकीट ब्लॉक पहुंचे। उन्होंने ग्राम प्रधानों के साथ मनरेगा में घोटाले को लेकर चर्चा की।
- तत्कालीन बीडीओ को डीएम ने किया तलब
मामले में सामने आ रहे तत्कालीन बीडीओ को डीएम ने घोटाला खुलने के बाद तलब कर लिया है। अधिकारी ने जिले में डीएम के सामने अपनी आमद करा दी है। पूछताछ का दौर जारी है। बताते चले कि तत्कालीन बीडीओ दूसरे जनपद में तैनात है।
सत्यापन में लगाई गई टीमों ने अभी तक अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपी है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। सकीट के ग्राम प्रधानों के साथ समीक्षा बैठक करने के लिए ब्लॉक गए थे। प्रधानों ने कुछ समस्या सामने रखी है। उनका निस्तारण कराया जाएगा।
उग्रसेन पांडेय, सीडीओ