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पालकी में सवार हुए गोदारंगमन्नार, हुई जय जयकार
Updated Wed, 14 Mar 2018 08:11 PM IST
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पालकी में विराजे ठाकुरजी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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वृंदावन (मथुरा)। रंगनाथ मंदिर के दस दिवसीय ब्रह्मोसव के अंतर्गत बुधवार को भगवान गोदारंगमन्नार ने पालकी में सवार होकर भक्तों को दर्शन दिए। ब्रह्मोत्सव पर भगवान गोदारंगमन्नार ने श्रीपुष्करणी कुंड में स्नान किया। इस दिव्य दर्शन की अभिलाषा लिए भक्त की भीड़ दोपहर में मंदिर प्रांगण में जुटी रही।
इससे पूर्व सुबह दक्षिण भारत से आए वेदपाठी ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य भगवान गोदारंगमन्नार को रजत पालकी में विराजमान कराया। इस दौरान मंदिर परिसर भगवान गोदारंगमन्नार के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। पालकी सवारी रंगनाथ मंदिर से शुरू होकर मंदिर के पश्चिम गेट पर पहुंची। यहां से पत्थरपुरा, गोपीनाथ बाजार होते हुए प्राचीन केशीघाट पहुंची। यहां मंदिर सेवायतों ने आराध्य को मां यमुना के दर्शन कराए। इसके बाद ब्राह्मणों और सेवायतों ने मां यमुना और भगवान गोदारंगमन्नार की आरती उतारी।
भक्तों ने जगह-जगह आरती और पुष्पवर्षा कर भगवान गोदारंगमन्नार का स्वागत किया। इसके बाद भगवान गोदारंगमन्नार को श्रीपुष्करणी कुंड ले जाया गया। यहां सेवायतों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य भगवान गोदारंगमन्नार को प्रतीकात्मक रूप से पुष्करणी स्नान कराया।
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कभी यमुना जल में स्नान करते थे गोदारंगमन्नार
यमुना में प्रदूषण के बढ़ते स्तर ने उत्तर भारत के प्रमुख दक्षिण शैली के रंगनाथ मंदिर की आस्था को समाप्त कर दिया। रामानुज परंपरा के इस मंदिर में कभी यमुना जल से भगवान गोदारंगमन्ना स्नान करते थे, लेकिन करीब 10 वर्षों से मंदिर में ही स्थित श्रीपुष्करणी कुंड में स्नान कराया जाता है। इसके साथ ही ठाकुरजी के सेवा कार्य में भी यहीं का जल लिया जाता है।
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इससे पूर्व सुबह दक्षिण भारत से आए वेदपाठी ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य भगवान गोदारंगमन्नार को रजत पालकी में विराजमान कराया। इस दौरान मंदिर परिसर भगवान गोदारंगमन्नार के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। पालकी सवारी रंगनाथ मंदिर से शुरू होकर मंदिर के पश्चिम गेट पर पहुंची। यहां से पत्थरपुरा, गोपीनाथ बाजार होते हुए प्राचीन केशीघाट पहुंची। यहां मंदिर सेवायतों ने आराध्य को मां यमुना के दर्शन कराए। इसके बाद ब्राह्मणों और सेवायतों ने मां यमुना और भगवान गोदारंगमन्नार की आरती उतारी।
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भक्तों ने जगह-जगह आरती और पुष्पवर्षा कर भगवान गोदारंगमन्नार का स्वागत किया। इसके बाद भगवान गोदारंगमन्नार को श्रीपुष्करणी कुंड ले जाया गया। यहां सेवायतों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य भगवान गोदारंगमन्नार को प्रतीकात्मक रूप से पुष्करणी स्नान कराया।
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कभी यमुना जल में स्नान करते थे गोदारंगमन्नार
यमुना में प्रदूषण के बढ़ते स्तर ने उत्तर भारत के प्रमुख दक्षिण शैली के रंगनाथ मंदिर की आस्था को समाप्त कर दिया। रामानुज परंपरा के इस मंदिर में कभी यमुना जल से भगवान गोदारंगमन्ना स्नान करते थे, लेकिन करीब 10 वर्षों से मंदिर में ही स्थित श्रीपुष्करणी कुंड में स्नान कराया जाता है। इसके साथ ही ठाकुरजी के सेवा कार्य में भी यहीं का जल लिया जाता है।