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पितरों की मोक्ष की कामना को श्रद्धालुओं ने किया तर्पण
Updated Wed, 06 Sep 2017 11:36 PM IST
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हर हर गंगे ... गंगा घाटों पर गूंजें गंगा मैया के जयकारें
- फोटो : अमर उजाला
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कासगंज/सोरों।
पितरों को प्रसन्न करने के लिए श्राद्ध पक्ष के पहले दिन बुधवार को सूकर क्षेत्र की हरिपदी के घाटों में श्रद्धालुओं ने विधि विधान से मंत्रोच्चार के साथ पितरों का श्राद्ध किया और गंगाजल से तर्पण किया। गंगा के लहरा, कछला और अन्य घाटों पर श्रद्धालुओं ने जलदान किया।
पहले श्राद्ध के दिन लहरा, कछला सहित शहवाजपुर, कादरगंज, इस्माइलपुर आदि गंगा घाटों पर श्रद्धालु पितरों के तर्पण को पहुंचे। दूरस्थ इलाकों से आने वाले श्रद्धालु तो एक दिन पूर्व ही गंगा घाटों पर पहुंचे और वहां धर्मशालाओं में ढेरा जमा लिया। श्रद्धालु ब्रह्म मुहूर्त के साथ ही गंगा स्नान कर पितरों का स्मरण करने लगे। सूर्योदय की घड़ी में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पितरों का स्मरण करके कृतज्ञता जाहिर की और गंगाजल से तर्पण कराया। इस तर्पण के दौरान श्रद्धालुओं ने कुशा हाथ में लेकर जल दान किया।
सूकर क्षेत्र सोरों की हरिपदी के घाटों पर राजस्थान, मध्यप्रदेश, आगरा आदि दूरस्थ इलाकों के श्रद्धालु पहुंचे और इन श्रद्धालुओं ने पुरोहितों के जरिए पूजा कर जलदान किया। हरिपदी के घाटों पर जगह जगह हवन पूजा के नजारे थे। श्रद्धालुओं ने भगवान वराह के मंदिर पर माथा टेक कर देव दर्शन प्राप्त किए। वराह भूमि को नमन करते हुए श्रद्धालुओं ने यहां के पौराणिक और प्राचीन मंदिरों में देव दर्शन कर मनोकामनाएं कीं।
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पंडित जगदीश पारासर ने कहा पितृ पक्ष में हमारे पूर्वजों की आत्मा हमारे निवास स्थल पर आती है। श्रद्धा से उनका अन्न, प्रसाद या तर्पण से स्वागत करना, उन्हें परम तृष्टि देना उनके प्रति अपनी श्रद्धा है। कछला व लहरा गंगाघाट पर सजी प्रसाद की दुकानों पर काफी भीड़ थी।
बसों की छत पर बैठकर पहुंचे श्रद्धालु
कासगंज। श्राद्ध पक्ष पर गंगा स्थान को पहुंची श्रद्धालु की भीड़ का आलम यह था कि श्रद्धालु ट्रेनों एवं सड़क मार्ग पर गंगा की ओर आने जाने वाले वाहनों में ठंसा ठस भरे हुए थे। टेंपों बस सहित कई वाहनों में यात्री छत पर सवार थे। जिला मुख्यालय सरकुलर रोड पर वाहनों की भीड़ का आलम था। वाहनों की कतारें लगी नजर आई। चिलचिलाती धूप में वाहनों की छतों पर सवार श्रद्धालु बेहद परेशान होते नजर आए। श्राद्ध पक्ष में घर घर में बुधवार को कौओं का इंतजार रहा।
20 किलोमीटर ट्राई साइकिल से पहुंचा सूकर क्षेत्र
कासगंज। सूकर क्षेत्र में पितरों के श्राद्ध का इतना महत्व है। गांव भरसौली का युवक रामसिंह 10 सालों से अपनी ट्राई साइकिल से ही सूकर क्षेत्र पहुंचकर गंगा स्नान कर पितरों का तर्पण करता है।
घाटों पर बच्चे कुशा बेचने खड़े थे
गंगाघाटों पर जगह जगह बच्चे कुशा घास बेचने के लिए खड़े हुए थे। पितरों का तर्पण करने के लिए कुशा घास को साथ लेकर जल दान किया जाता है। हर श्रद्धालु जलदान में इसका प्रयोग करता है। जिसके चलते जगह जगह बच्चे कुशा घास बेच रहे थे। गंगा नदी में पानी अधिक होने के कारण गंगास्नान करने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए प्रशासन खासा सतर्क नजर आया। गंगा में बैरीकेडिंग करके लाल झंडियां बांधी गईं थी।
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पितरों को प्रसन्न करने के लिए श्राद्ध पक्ष के पहले दिन बुधवार को सूकर क्षेत्र की हरिपदी के घाटों में श्रद्धालुओं ने विधि विधान से मंत्रोच्चार के साथ पितरों का श्राद्ध किया और गंगाजल से तर्पण किया। गंगा के लहरा, कछला और अन्य घाटों पर श्रद्धालुओं ने जलदान किया।
पहले श्राद्ध के दिन लहरा, कछला सहित शहवाजपुर, कादरगंज, इस्माइलपुर आदि गंगा घाटों पर श्रद्धालु पितरों के तर्पण को पहुंचे। दूरस्थ इलाकों से आने वाले श्रद्धालु तो एक दिन पूर्व ही गंगा घाटों पर पहुंचे और वहां धर्मशालाओं में ढेरा जमा लिया। श्रद्धालु ब्रह्म मुहूर्त के साथ ही गंगा स्नान कर पितरों का स्मरण करने लगे। सूर्योदय की घड़ी में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पितरों का स्मरण करके कृतज्ञता जाहिर की और गंगाजल से तर्पण कराया। इस तर्पण के दौरान श्रद्धालुओं ने कुशा हाथ में लेकर जल दान किया।
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सूकर क्षेत्र सोरों की हरिपदी के घाटों पर राजस्थान, मध्यप्रदेश, आगरा आदि दूरस्थ इलाकों के श्रद्धालु पहुंचे और इन श्रद्धालुओं ने पुरोहितों के जरिए पूजा कर जलदान किया। हरिपदी के घाटों पर जगह जगह हवन पूजा के नजारे थे। श्रद्धालुओं ने भगवान वराह के मंदिर पर माथा टेक कर देव दर्शन प्राप्त किए। वराह भूमि को नमन करते हुए श्रद्धालुओं ने यहां के पौराणिक और प्राचीन मंदिरों में देव दर्शन कर मनोकामनाएं कीं।
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पंडित जगदीश पारासर ने कहा पितृ पक्ष में हमारे पूर्वजों की आत्मा हमारे निवास स्थल पर आती है। श्रद्धा से उनका अन्न, प्रसाद या तर्पण से स्वागत करना, उन्हें परम तृष्टि देना उनके प्रति अपनी श्रद्धा है। कछला व लहरा गंगाघाट पर सजी प्रसाद की दुकानों पर काफी भीड़ थी।
बसों की छत पर बैठकर पहुंचे श्रद्धालु
कासगंज। श्राद्ध पक्ष पर गंगा स्थान को पहुंची श्रद्धालु की भीड़ का आलम यह था कि श्रद्धालु ट्रेनों एवं सड़क मार्ग पर गंगा की ओर आने जाने वाले वाहनों में ठंसा ठस भरे हुए थे। टेंपों बस सहित कई वाहनों में यात्री छत पर सवार थे। जिला मुख्यालय सरकुलर रोड पर वाहनों की भीड़ का आलम था। वाहनों की कतारें लगी नजर आई। चिलचिलाती धूप में वाहनों की छतों पर सवार श्रद्धालु बेहद परेशान होते नजर आए। श्राद्ध पक्ष में घर घर में बुधवार को कौओं का इंतजार रहा।
20 किलोमीटर ट्राई साइकिल से पहुंचा सूकर क्षेत्र
कासगंज। सूकर क्षेत्र में पितरों के श्राद्ध का इतना महत्व है। गांव भरसौली का युवक रामसिंह 10 सालों से अपनी ट्राई साइकिल से ही सूकर क्षेत्र पहुंचकर गंगा स्नान कर पितरों का तर्पण करता है।
घाटों पर बच्चे कुशा बेचने खड़े थे
गंगाघाटों पर जगह जगह बच्चे कुशा घास बेचने के लिए खड़े हुए थे। पितरों का तर्पण करने के लिए कुशा घास को साथ लेकर जल दान किया जाता है। हर श्रद्धालु जलदान में इसका प्रयोग करता है। जिसके चलते जगह जगह बच्चे कुशा घास बेच रहे थे। गंगा नदी में पानी अधिक होने के कारण गंगास्नान करने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए प्रशासन खासा सतर्क नजर आया। गंगा में बैरीकेडिंग करके लाल झंडियां बांधी गईं थी।