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बिगड़ी आबोहवा में ताजनगरी पांचवें नंबर पर
Updated Wed, 28 Jun 2017 02:05 AM IST
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आगरा। दुनिया के सातवें अजूबे ताजमहल के शहर की आबोहवा में सुधार नहीं हो रहा है। आईआईटी दिल्ली, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कांप्रहेंसिव एनवायरमेंट पाल्यूशन इंडेक्स (सीईपीआई) में आगरा की स्थिति गंभीर बनी हुई है। आगरा की आबोहवा यानी हवा और पानी दोनों ही गंभीर स्तर पर है। बिगड़ी आबोहवा में प्रदेश में आगरा पांचवे नंबर पर है, जबकि गाजियाबाद पहले नंबर पर बरकरार है।
देश के 43 बेहद प्रदूषित शहरों में प्रदूषण की स्थिति की जांच के बाद एक्शन प्लान बनाए गए, लेकिन ताजनगरी के प्रदूषण पर इसका असर नहीं नजर आ रहा। एयर क्वालिटी इंडेक्स में आगरा अक्तूबर से फरवरी तक देश के टॉप 3 शहरों की सूची में बना रहा। इन पांच महीनों में 10 दिन भी शहर की हवा सामान्य स्तर पर नहीं रही। हर बार यह खतरनाक स्तर पर बरकरार रही। एयर क्वालिटी इंडेक्स की तरह ही सीईपीआई में भी आगरा की हवा, मिट्टी और पानी में प्रदूषण की जांच की गई। इसमें हवा को गंभीर, जल प्रदूषण को गंभीर और मृदा प्रदूषण को सामान्य स्तर पर माना गया। प्रदेश में गाजियाबाद 87.37 अंक के साथ पहले नंबर पर है।
सीईपीआई में आगरा का हाल ये
ताजनगरी के हालात गंभीर
वायु प्रदूषण 57
जल प्रदूषण 55
मृदा प्रदूषण 49.50
कुल ग्रेड 68.71
यहां की गई जांच
वायु प्रदूषण के लिए रूनकता, फाउंड्री नगर, नुनिहाई, जल प्रदूषण के लिए यमुना नदी में हाथी घाट, वाटर वर्क्स, दशहरा घाट और कैलाश घाट तथा मृदा प्रदूषण के लिए नुनिहाई, सिकंदरा, फाउंड्री नगर में जांच की गई।
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यहां तो सांस लेना भी खतरनाक
शहर में सांस लेना भी खतरनाक है। धूल के कण लोगों की सांस के साथ फेफड़ों में प्रवेश कर रहे हैं जो गंभीर बीमारियों को जन्म दे रहे हैं। मानक से चार से पांच गुने तक एसपीएम शहर की हवा में है। जनवरी के बाद फरवरी में कुछ स्थिति सुधरी, लेकिन मार्च में फिर से एसपीएम के स्तर में बढ़ोतरी दर्ज की गई।
माह एसपीएम पीएम 10
मार्च 429 229
फरवरी 381 206
जनवरी 476 315
दिसंबर 394 269
सांस रोग, ब्लड कैंसर का सर्वाधिक खतरा
आगरा।
लोगों में बढ़ते रोगों के लिए दूषित हवा और पानी महत्वपूर्ण कारक हैं। एसएन मेडिकल कालेज के वरिष्ठ फिजीशियन डा. आशीष गौतम बताते हैं कि दूषित हवा से लोग सांस रोगी बन रहे हैं। सांस नलिकाओं में संक्रमण के मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। प्रदूषित पानी के इस्तेमाल से पेट में संक्रमण का खतरा सर्वाधिक है। सबसे घातक प्रदूषित पानी में पाए जाने वाले भारी तत्व रहते हैं, जिनसे रक्त संबंधी बीमारियां पनपती हैं। ब्लड कैंसर का खतरा भी रहता है। लंबे समय तक दूषित पानी के पीने से लोग मधुमेह के भी शिकार हो सकते हैं।
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देश के 43 बेहद प्रदूषित शहरों में प्रदूषण की स्थिति की जांच के बाद एक्शन प्लान बनाए गए, लेकिन ताजनगरी के प्रदूषण पर इसका असर नहीं नजर आ रहा। एयर क्वालिटी इंडेक्स में आगरा अक्तूबर से फरवरी तक देश के टॉप 3 शहरों की सूची में बना रहा। इन पांच महीनों में 10 दिन भी शहर की हवा सामान्य स्तर पर नहीं रही। हर बार यह खतरनाक स्तर पर बरकरार रही। एयर क्वालिटी इंडेक्स की तरह ही सीईपीआई में भी आगरा की हवा, मिट्टी और पानी में प्रदूषण की जांच की गई। इसमें हवा को गंभीर, जल प्रदूषण को गंभीर और मृदा प्रदूषण को सामान्य स्तर पर माना गया। प्रदेश में गाजियाबाद 87.37 अंक के साथ पहले नंबर पर है।
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सीईपीआई में आगरा का हाल ये
ताजनगरी के हालात गंभीर
वायु प्रदूषण 57
जल प्रदूषण 55
मृदा प्रदूषण 49.50
कुल ग्रेड 68.71
यहां की गई जांच
वायु प्रदूषण के लिए रूनकता, फाउंड्री नगर, नुनिहाई, जल प्रदूषण के लिए यमुना नदी में हाथी घाट, वाटर वर्क्स, दशहरा घाट और कैलाश घाट तथा मृदा प्रदूषण के लिए नुनिहाई, सिकंदरा, फाउंड्री नगर में जांच की गई।
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यहां तो सांस लेना भी खतरनाक
शहर में सांस लेना भी खतरनाक है। धूल के कण लोगों की सांस के साथ फेफड़ों में प्रवेश कर रहे हैं जो गंभीर बीमारियों को जन्म दे रहे हैं। मानक से चार से पांच गुने तक एसपीएम शहर की हवा में है। जनवरी के बाद फरवरी में कुछ स्थिति सुधरी, लेकिन मार्च में फिर से एसपीएम के स्तर में बढ़ोतरी दर्ज की गई।
माह एसपीएम पीएम 10
मार्च 429 229
फरवरी 381 206
जनवरी 476 315
दिसंबर 394 269
सांस रोग, ब्लड कैंसर का सर्वाधिक खतरा
आगरा।
लोगों में बढ़ते रोगों के लिए दूषित हवा और पानी महत्वपूर्ण कारक हैं। एसएन मेडिकल कालेज के वरिष्ठ फिजीशियन डा. आशीष गौतम बताते हैं कि दूषित हवा से लोग सांस रोगी बन रहे हैं। सांस नलिकाओं में संक्रमण के मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। प्रदूषित पानी के इस्तेमाल से पेट में संक्रमण का खतरा सर्वाधिक है। सबसे घातक प्रदूषित पानी में पाए जाने वाले भारी तत्व रहते हैं, जिनसे रक्त संबंधी बीमारियां पनपती हैं। ब्लड कैंसर का खतरा भी रहता है। लंबे समय तक दूषित पानी के पीने से लोग मधुमेह के भी शिकार हो सकते हैं।