{"_id":"5c699a1cbdec22271a77c353","slug":"101550424604-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुविधाओं को तरसते रह गए निशानेबाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुविधाओं को तरसते रह गए निशानेबाज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
एटा। राइफल क्लब है, लेकिन सुविधा नहीं है। न तो प्रशिक्षण मिलता है और न ही कोई प्रोत्साहन। निशानेबाजों को अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने के लिए महज जिला स्तरीय प्रतियोगिता पर भी निर्भर रहना है। आलम यह है कि निशानेबाजी को करियर बनाने वाली प्रतिभाओं को सही मुकाम नहीं मिल पाता। जिले में बदइंतजामी झेल रही निशानेबाजी की विधा से शूटरों का मोहभंग हो रहा है।
जिले में सालों पहले खुले राइफल क्लब का हाल सबको पता है। ऐसे में प्रतिभाएं तरस रही हैं। बताया जाता है कि जिले के कई शूटरों ने राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर तक धाक जमाई है, लेकिन प्रोत्साहन का अभाव उनको सालता है।
इसके चलते नई प्रतिभाएं इस क्षेत्र में आना नहीं चाहतीं। साथ ही दो साल पहले तक जिले में हर साल प्रशिक्षण का आयोजन होता था, लेकिन अब यह पूरी तरह से बंद है। ऐसे में प्रतिभाओं को शूटिंग के सही तरीकों से भी अनजान रहना होता है। वरिष्ठ निशानेबाजों की मानें तो जिला प्रशासन को इस विधा को पुर्नस्थापित करने की जरूरत है। तभी इस विधा को कायम रखा जा सकता है।
विज्ञापन
---------
कहते हैं निशानेबाज
जिले में निशानेबाजी को लेकर क्रेज है, लेकिन प्रशासन के प्रयास नहीं होने से कोई इस क्षेत्र में आना नहीं चाहता है।
एके कौशल, प्रदेश स्तर पर स्वर्ण पदक विजेता
---------
निशानेबाजी को लेकर जिले में सुविधाएं कम होती जा रही हैं। राइफल क्लब में प्रशासन ने कार्यालय खोल दिया है। ऐसे में नई पीढ़ी क्लब से दूर है।
ज्ञानेंद्र तोमर, प्रदेश स्तर पर पदक विजेता
--------
प्रशासन को निशानेबाजों को उचित तरजीह देने की जरूरत है। जिले में विधा महज जिला स्तरीय प्रतियोगिता तक सिमटी हुई है।
पवन गौतम, प्रदेश स्तरीय निशानेबाज
---------
जिले में अंतरजिला स्तरीय प्रतियोगिता तक निशानेबाजी सिमटी हुई है। प्रशासन को इसे आगे बढ़ाने की जरूरत है।
प्रदीप तोमर, प्रदेश स्तरीय चैपिंयन
जिले में सालों पहले खुले राइफल क्लब का हाल सबको पता है। ऐसे में प्रतिभाएं तरस रही हैं। बताया जाता है कि जिले के कई शूटरों ने राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर तक धाक जमाई है, लेकिन प्रोत्साहन का अभाव उनको सालता है।
विज्ञापन
इसके चलते नई प्रतिभाएं इस क्षेत्र में आना नहीं चाहतीं। साथ ही दो साल पहले तक जिले में हर साल प्रशिक्षण का आयोजन होता था, लेकिन अब यह पूरी तरह से बंद है। ऐसे में प्रतिभाओं को शूटिंग के सही तरीकों से भी अनजान रहना होता है। वरिष्ठ निशानेबाजों की मानें तो जिला प्रशासन को इस विधा को पुर्नस्थापित करने की जरूरत है। तभी इस विधा को कायम रखा जा सकता है।
विज्ञापन
---------
कहते हैं निशानेबाज
जिले में निशानेबाजी को लेकर क्रेज है, लेकिन प्रशासन के प्रयास नहीं होने से कोई इस क्षेत्र में आना नहीं चाहता है।
एके कौशल, प्रदेश स्तर पर स्वर्ण पदक विजेता
---------
निशानेबाजी को लेकर जिले में सुविधाएं कम होती जा रही हैं। राइफल क्लब में प्रशासन ने कार्यालय खोल दिया है। ऐसे में नई पीढ़ी क्लब से दूर है।
ज्ञानेंद्र तोमर, प्रदेश स्तर पर पदक विजेता
--------
प्रशासन को निशानेबाजों को उचित तरजीह देने की जरूरत है। जिले में विधा महज जिला स्तरीय प्रतियोगिता तक सिमटी हुई है।
पवन गौतम, प्रदेश स्तरीय निशानेबाज
---------
जिले में अंतरजिला स्तरीय प्रतियोगिता तक निशानेबाजी सिमटी हुई है। प्रशासन को इसे आगे बढ़ाने की जरूरत है।
प्रदीप तोमर, प्रदेश स्तरीय चैपिंयन