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अधिकारियों के गोद लिए गांव से भी दूर नहीं हो रहा कुपोषण
Updated Wed, 21 Nov 2018 10:56 PM IST
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कासगंज। जनपद में नौनिहालों को पोषित करने में लापरवाही हो रही है। यहां तक कि अधिकारियों के गोद लिए गांव भी पोषित नहीं हो सके हैं। विभाग की माने तो 33 प्रतिशत गांव ओडीएफ घोषित हो चुके हैं, जल्द ही और भी गांव घोषित हो जाएंगे।
जनपद में 423 ग्राम पंचायतों में 647 राजस्व ग्राम हैं। इन ग्रामों मे से 52 ग्रामों को कुपोषण मुक्त कराने के लिए अधिकारियों ने गोद ले लिया। इसके बाद भी जनपद से कुपोषण दूर नहीं हो पा रहा। जनपद में 2445 आगनबाड़ी केंद्रों से 0 से 6 साल तक के 163599 बच्चे जुड़े हुए हैं। इन में से 20555 बच्चे कुपोषित हैं। जिन ग्रामों में सबसे अधिक बच्चे कुपोषित हैं उन ग्रामों को अधिकारियों ने गोद ले ले लिया। बच्चों को पोषित करने के लिए पौष्टिक पंजीरी, पोष्टिक लडड़ू उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा जो बच्चे लाल श्रेणी में होते हैं उनके परिवारों के राशन कार्ड भी बनवाए जाते हैं, जिससे इन परिवारों मेें भोजन की समस्या न रहे। इसके अलावा टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं को आयरन की गोली आदि भी उपलब्ध कराई जाती है। विभिन्न विभागों केो माध्यम से दी जाने वाली योजनों का लाभ पात्रों को देने में लापरवाही बरती जा रही है। अभी तक मात्र 17 गांव ही ओडीएफ घोषित किए जा चुके हैं। जबकि 35 ग्रामों को अभी ओडीएफ घोषित होना शेष है। डीपीओ संजीव कुमार का कहना है कि अधिकारियों के गोद लिए ग्रामों में कुपोषण दूर करने के लिए लागू सभी योजनों का लाभ पात्रों तक पहुंचाया जा रहा है। 17 ग्राम तो अब तक घोषित हो चुुके हैं। अन्य ग्रामों की रिपोर्ट अभी आना शेष है। जल्द ही और गांव भी ओडीएफ की श्रेणी में आ जाएंगे।
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जनपद में 423 ग्राम पंचायतों में 647 राजस्व ग्राम हैं। इन ग्रामों मे से 52 ग्रामों को कुपोषण मुक्त कराने के लिए अधिकारियों ने गोद ले लिया। इसके बाद भी जनपद से कुपोषण दूर नहीं हो पा रहा। जनपद में 2445 आगनबाड़ी केंद्रों से 0 से 6 साल तक के 163599 बच्चे जुड़े हुए हैं। इन में से 20555 बच्चे कुपोषित हैं। जिन ग्रामों में सबसे अधिक बच्चे कुपोषित हैं उन ग्रामों को अधिकारियों ने गोद ले ले लिया। बच्चों को पोषित करने के लिए पौष्टिक पंजीरी, पोष्टिक लडड़ू उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा जो बच्चे लाल श्रेणी में होते हैं उनके परिवारों के राशन कार्ड भी बनवाए जाते हैं, जिससे इन परिवारों मेें भोजन की समस्या न रहे। इसके अलावा टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं को आयरन की गोली आदि भी उपलब्ध कराई जाती है। विभिन्न विभागों केो माध्यम से दी जाने वाली योजनों का लाभ पात्रों को देने में लापरवाही बरती जा रही है। अभी तक मात्र 17 गांव ही ओडीएफ घोषित किए जा चुके हैं। जबकि 35 ग्रामों को अभी ओडीएफ घोषित होना शेष है। डीपीओ संजीव कुमार का कहना है कि अधिकारियों के गोद लिए ग्रामों में कुपोषण दूर करने के लिए लागू सभी योजनों का लाभ पात्रों तक पहुंचाया जा रहा है। 17 ग्राम तो अब तक घोषित हो चुुके हैं। अन्य ग्रामों की रिपोर्ट अभी आना शेष है। जल्द ही और गांव भी ओडीएफ की श्रेणी में आ जाएंगे।
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