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नोटबंदी की विफलता की कांग्रेसियों ने किया आंदोलन
Updated Mon, 12 Nov 2018 10:25 PM IST
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नोटबंदी की विफलता की कांग्रेसियों ने किया आंदोलन
- फोटो : अमर उजाला
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कासगंज। केंद्र सरकार की नोटबंदी की विफलता की दूसरी वर्षी पर कांग्रेसी आंदोलन कर रहे हैं। प्रदेश कमेटी के आह्वान पर कांग्रेसियों ने कलक्ट्रेट परिसर में धरना दिया। राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।
जिलाध्यक्ष डा. शशिलता चौहान ने कहा कि दो साल पहले केंद्र सरकार ने नोट बंदी कर दी थी। दो साल में यह नोटबंदी पूरी तरह विफल साबित हुई है। प्रधानमंत्री ने नाटकीय ढंग से 500 और 1000 के पुराने नोटों को चलन से बाहर कर दिया। उसके बाद पुरानी मुद्रा बदलने के लिए लोगों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा। रिजर्व बैंक मान रही है कि नई मुद्रा छापने में करोड़ों रुपये की लागत आई। जिससे देश को राजस्व की हानि हुई है। सरकार का यह निर्णय पूरी तरह गलत था। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा नोट बंदी के बाद जिन उद्यमियों को नुकसान हुआ है उन्हें मुआवजा दिया जाए और लाइन में लगकर जान गवा देने वाले मृतकों के परिजनों को 25-25 लाख रुपये दिए जाए। ज्ञापन देने वालों में राजवीर सिंह राना, सुबोध शर्मा, बाल किशन दुबे, सत्यप्रकाश गुप्ता, शशीवाला गुप्ता, सुरेश चंद्र पटियात, राजीव चौहान, देवी प्रसाद, विनय कुमार सिंह, अदनान, अशोक पचौरी, कबीर प्रताप सिंह, अशोक कुमार मिश्रा सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसी शामिल रहे।
नोटबंदी के विरोध में कांग्रेसियों ने किया प्रदर्शन
एटा। जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से मंगलवार को नोटबंदी के विरोध में कलक्ट्रेट स्थित धरना स्थल पर प्रदर्शन किया और 8 नवंबर 2016 को पांच सौ और एक हजार के रुपये के नोट बंद करने के विरोध में राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन भी सौंपा। जिलाध्यक्ष चोब सिंह धनगर ने कहा है कि नाटकीय ढंग से नोटबंदी करने से देश की आर्थिक कमजोरी हुई है। 15.44 लाख मुद्रा चलन से बाहर कर दी गई, बैंकों से अपनी पुरानी मुद्रा को बदलने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कांग्रेस उस दिन को काला दिवस के रूप में मानती हैं। रामकुमार सक्सेना, अनिल सोलंकी, पतरस वाल्मीकि, भगवान स्वरूप, सौदान सिंह, महेश वरिष्ठ, आलोक राजपूत, मोहम्मद इरफान एडवोकेट, जसवीर सिंह यादव आदि मौजूद रहे।
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जिलाध्यक्ष डा. शशिलता चौहान ने कहा कि दो साल पहले केंद्र सरकार ने नोट बंदी कर दी थी। दो साल में यह नोटबंदी पूरी तरह विफल साबित हुई है। प्रधानमंत्री ने नाटकीय ढंग से 500 और 1000 के पुराने नोटों को चलन से बाहर कर दिया। उसके बाद पुरानी मुद्रा बदलने के लिए लोगों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा। रिजर्व बैंक मान रही है कि नई मुद्रा छापने में करोड़ों रुपये की लागत आई। जिससे देश को राजस्व की हानि हुई है। सरकार का यह निर्णय पूरी तरह गलत था। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा नोट बंदी के बाद जिन उद्यमियों को नुकसान हुआ है उन्हें मुआवजा दिया जाए और लाइन में लगकर जान गवा देने वाले मृतकों के परिजनों को 25-25 लाख रुपये दिए जाए। ज्ञापन देने वालों में राजवीर सिंह राना, सुबोध शर्मा, बाल किशन दुबे, सत्यप्रकाश गुप्ता, शशीवाला गुप्ता, सुरेश चंद्र पटियात, राजीव चौहान, देवी प्रसाद, विनय कुमार सिंह, अदनान, अशोक पचौरी, कबीर प्रताप सिंह, अशोक कुमार मिश्रा सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसी शामिल रहे।
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नोटबंदी के विरोध में कांग्रेसियों ने किया प्रदर्शन
एटा। जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से मंगलवार को नोटबंदी के विरोध में कलक्ट्रेट स्थित धरना स्थल पर प्रदर्शन किया और 8 नवंबर 2016 को पांच सौ और एक हजार के रुपये के नोट बंद करने के विरोध में राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन भी सौंपा। जिलाध्यक्ष चोब सिंह धनगर ने कहा है कि नाटकीय ढंग से नोटबंदी करने से देश की आर्थिक कमजोरी हुई है। 15.44 लाख मुद्रा चलन से बाहर कर दी गई, बैंकों से अपनी पुरानी मुद्रा को बदलने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कांग्रेस उस दिन को काला दिवस के रूप में मानती हैं। रामकुमार सक्सेना, अनिल सोलंकी, पतरस वाल्मीकि, भगवान स्वरूप, सौदान सिंह, महेश वरिष्ठ, आलोक राजपूत, मोहम्मद इरफान एडवोकेट, जसवीर सिंह यादव आदि मौजूद रहे।
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