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आज शिक्षा को व्यवसायीकरण ने जकड़ा: डॉ. अरुण
Updated Thu, 07 Dec 2017 08:33 PM IST
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डेमो
- फोटो : डेमो
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वृंदावन (मथुरा)। फोगला आश्रम में संवैधानिक एवं संसदीय अध्ययन संस्थान की शिक्षा का व्यवसायीकरण पर आयोजित संगोष्ठी का समापन गुरुवार को हो गया। प्रो. डॉ. अरुण कुमार यादव ने कहा कि आज शिक्षा को व्यापारी करण, व्यवसायीकरण और निजी करण ने जकड़ लिया है।
देश में कुल सात सौ विवि हैं, जिनमें 251 राज्य, 45 केंद्रीय, 285 प्राइवेट और 125 डीम्ड विवि हैं। 102 निजी स्वामित्व वाले संस्थान हैं। इसके अलावा तीन लाख महाविद्यालय हैं। जिन्होंने उच्च शिक्षा को मुनाफे का धंधा बना रखा है।
विधान परिषद के सभापति रमेश यादव ने कहा कि भारत शुरू से ही ज्ञान और शिक्षा का केंद्र रहा है। ईसा से 700 वर्ष पूर्व तक्षशिला विवि उच्च शिक्षा का महान केंद्र बिंदु था। इसके अतिरिक्त काशी, नालंदा और विक्रमशिला में विश्वभर से लोग शिक्षा ग्रहण करने आते थे। अल्पा यादव ने कहा कि शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है।
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धन के आधार पर आईआईटी, एमबीए, सीए, एमबीबीएस आदि उपाधियोें के लिए प्रवेश पाकर छात्र उच्च भावना से ग्रस्त और धन अभाव के कारण प्रवेश से वंचित छात्र हीन भावना से ग्रस्त रहते हैं। कृष्ण नारायण मिश्र, डॉ. अरुण यादव, डॉ. कृष्णकांत यादव, डॉ. राधेश्वर प्रसाद, डॉ. कमलेश सिंह, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. नरेश सिंह, डॉ. आशा त्रिपाठी, प्रो. ब्रजेश चंद्रा, शिवबोध राम आदि मौजूद थे।
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देश में कुल सात सौ विवि हैं, जिनमें 251 राज्य, 45 केंद्रीय, 285 प्राइवेट और 125 डीम्ड विवि हैं। 102 निजी स्वामित्व वाले संस्थान हैं। इसके अलावा तीन लाख महाविद्यालय हैं। जिन्होंने उच्च शिक्षा को मुनाफे का धंधा बना रखा है।
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विधान परिषद के सभापति रमेश यादव ने कहा कि भारत शुरू से ही ज्ञान और शिक्षा का केंद्र रहा है। ईसा से 700 वर्ष पूर्व तक्षशिला विवि उच्च शिक्षा का महान केंद्र बिंदु था। इसके अतिरिक्त काशी, नालंदा और विक्रमशिला में विश्वभर से लोग शिक्षा ग्रहण करने आते थे। अल्पा यादव ने कहा कि शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है।
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धन के आधार पर आईआईटी, एमबीए, सीए, एमबीबीएस आदि उपाधियोें के लिए प्रवेश पाकर छात्र उच्च भावना से ग्रस्त और धन अभाव के कारण प्रवेश से वंचित छात्र हीन भावना से ग्रस्त रहते हैं। कृष्ण नारायण मिश्र, डॉ. अरुण यादव, डॉ. कृष्णकांत यादव, डॉ. राधेश्वर प्रसाद, डॉ. कमलेश सिंह, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. नरेश सिंह, डॉ. आशा त्रिपाठी, प्रो. ब्रजेश चंद्रा, शिवबोध राम आदि मौजूद थे।