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अब गूगल पर दिखेंगे किसानों के खेत
Updated Thu, 27 Jul 2017 11:44 PM IST
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गूगल
- फोटो : Google
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मथुरा। किसानों के खेत, दगरे, नाली व जमीन के रकबे आदि की पूरी जानकारी अब एक क्लिक करते ही गूगल पर होगी। कृषि विभाग द्वारा तहसीलों से किसानों के भूलेख नक्शों की आनलाइन फीडिंग कराई जा रही है। पहले चरण में ऋणमाफी के दायरे में आए 1.08 लाख से अधिक किसानों का डाटा फीड कराया जा रहा है।
जनपद मेें 1.75 लाख से अधिक लोग कृषि करते हैं। किसानों को लोन, बीज, उर्वरक व अन्य तरह की छूट का लाभ सीधे देने के लिए अब उनका पूरा ब्योरा जुटाया जा रही है। इसमें किसानों के आधार कार्ड, मोबाइल नंबर के साथ ही जमीन की गाटा संख्या, खसरा नंबर व अन्य जानकारी एवं खेत के नक्शा भी फीड कराया जा रहा है। यह फीडिंग ऑन लाइन हो रही है।
जिला कृषि अधिकारी प्रमोद कुमार ने बताया कि भूलेख मैपिंग में जिले में ऋणमाफी योजना में शामिल हुए किसानों को पहले चरण में शामिल किया गया है। इसमें एक लाख आठ हजार किसानों की जमीनों की भूलेख मैपिंग कराकर फीड कराए गए हैं। इसे कृषि विभाग के पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है। कहीं भी कोई भी विभाग, बैंक, राजस्व रिकार्ड किसानों का आधार कार्ड नंबर डालकर किसी भी किसान के बारे में पूरी जानकारी जुटा सकेें गे।
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भूलेख मैपिंग से किसान एक खेत पर दो या अधिक जगह से उस जमीन पर लोन नहीं ले सकेंगे। आधार कार्ड, मोबाइल नंबर डालते ही किसानों की पूरी जमीन का ब्योरा ऑन लाइन मिल जाएगा। इसमें किसान ने कितना कर्ज किस बैंक से कब लिया है? यह सब पता चल जाएगा।
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जनपद मेें 1.75 लाख से अधिक लोग कृषि करते हैं। किसानों को लोन, बीज, उर्वरक व अन्य तरह की छूट का लाभ सीधे देने के लिए अब उनका पूरा ब्योरा जुटाया जा रही है। इसमें किसानों के आधार कार्ड, मोबाइल नंबर के साथ ही जमीन की गाटा संख्या, खसरा नंबर व अन्य जानकारी एवं खेत के नक्शा भी फीड कराया जा रहा है। यह फीडिंग ऑन लाइन हो रही है।
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जिला कृषि अधिकारी प्रमोद कुमार ने बताया कि भूलेख मैपिंग में जिले में ऋणमाफी योजना में शामिल हुए किसानों को पहले चरण में शामिल किया गया है। इसमें एक लाख आठ हजार किसानों की जमीनों की भूलेख मैपिंग कराकर फीड कराए गए हैं। इसे कृषि विभाग के पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है। कहीं भी कोई भी विभाग, बैंक, राजस्व रिकार्ड किसानों का आधार कार्ड नंबर डालकर किसी भी किसान के बारे में पूरी जानकारी जुटा सकेें गे।
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भूलेख मैपिंग से किसान एक खेत पर दो या अधिक जगह से उस जमीन पर लोन नहीं ले सकेंगे। आधार कार्ड, मोबाइल नंबर डालते ही किसानों की पूरी जमीन का ब्योरा ऑन लाइन मिल जाएगा। इसमें किसान ने कितना कर्ज किस बैंक से कब लिया है? यह सब पता चल जाएगा।