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1.30 करोड़ का बैंक घोटाला: गिरवी और नीलाम संपत्तियों के फर्जी दस्तावेज से लिया लोन, दर्ज हुई एफआईआर
Tue, 26 May 2026 11:31 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Tue, 26 May 2026 11:31 AM IST
सार
आगरा में गिरवी और पहले से नीलाम संपत्तियों के फर्जी दस्तावेज दिखाकर 1.30 करोड़ रुपये का बैंक लोन लेने का मामला सामने आया है। बैंक की जांच में घोटाला उजागर होने के बाद हरीपर्वत थाने में एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
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FIR Demo
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आगरा के थाना हरीपर्वत क्षेत्र में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की संजय प्लेस शाखा में दूसरे बैंक में गिरवी और नीलाम संपत्तियों के दस्तावेज जमाकर 1.30 करोड़ रुपये का लोन ले लिया गया। बैंक के डिप्टी मैनेजर ने न्यायालय में प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया। न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है।
बैंक मैनेजर अरविंद कुमार ने बताया कि वर्ष 2019 में देवरी रोड निवासी मनोज कुमार, ट्रांसयमुना कॉलोनी निवासी स्नेहलता, रवि कुमार जैन, पुष्पा देवी और अजय जैन ने एमएस बर्तन भंडार नाम से फर्म बनाकर 1 करोड़ 30 लाख रुपये का लोन स्वीकृत कराया था। लोन के लिए आरोपियों ने दो संपत्तियां बैंक में बंधक रखीं। कुछ समय तक किस्तें जमा करने के बाद आरोपियों ने भुगतान बंद कर दिया।
उन्होंने बताया कि खाता 28 नवंबर 2021 को पहली बार एनपीए घोषित हुआ। बाद में आंशिक भुगतान कर खाते को नियमित कराया गया। कुछ माह बाद फिर भुगतान न होने पर खाता एनपीए हो गया। बैंक की जांच में सामने आया कि बंधक संपत्ति के दस्तावेज फर्जी थे। एक संपत्ति पहले ही केनरा बैंक वर्ष 2019 में नीलाम कर चुकी थी। इसके अलावा अन्य संपत्तियों पर भी अलग-अलग बैंकों का लोन होना पाया गया। फर्म के स्टॉक में भी कोई सामान नहीं मिला और जीएसटी नंबर निरस्त मिला। थाना हरीपर्वत प्रभारी ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही है।
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बैंक मैनेजर अरविंद कुमार ने बताया कि वर्ष 2019 में देवरी रोड निवासी मनोज कुमार, ट्रांसयमुना कॉलोनी निवासी स्नेहलता, रवि कुमार जैन, पुष्पा देवी और अजय जैन ने एमएस बर्तन भंडार नाम से फर्म बनाकर 1 करोड़ 30 लाख रुपये का लोन स्वीकृत कराया था। लोन के लिए आरोपियों ने दो संपत्तियां बैंक में बंधक रखीं। कुछ समय तक किस्तें जमा करने के बाद आरोपियों ने भुगतान बंद कर दिया।
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उन्होंने बताया कि खाता 28 नवंबर 2021 को पहली बार एनपीए घोषित हुआ। बाद में आंशिक भुगतान कर खाते को नियमित कराया गया। कुछ माह बाद फिर भुगतान न होने पर खाता एनपीए हो गया। बैंक की जांच में सामने आया कि बंधक संपत्ति के दस्तावेज फर्जी थे। एक संपत्ति पहले ही केनरा बैंक वर्ष 2019 में नीलाम कर चुकी थी। इसके अलावा अन्य संपत्तियों पर भी अलग-अलग बैंकों का लोन होना पाया गया। फर्म के स्टॉक में भी कोई सामान नहीं मिला और जीएसटी नंबर निरस्त मिला। थाना हरीपर्वत प्रभारी ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही है।
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