{"_id":"124-60483","slug":"Lucknow-60483-124","type":"story","status":"publish","title_hn":"600 रक्षाकर्मियों के परिवार वालों के सामने रोटी के लाले","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
600 रक्षाकर्मियों के परिवार वालों के सामने रोटी के लाले
Lucknow
Updated Wed, 12 Jun 2013 05:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लखनऊ। जी तोड़ मेहनत करने वाले 600 रक्षाकर्मियों और पेंशनभोगियों का जीवन असुरक्षित हो गया है। रक्षा मंत्रालय ने इस बार छावनी परिषद के बजट में कर्मचारियों के वेतन और पेंशन मद पर रोक लगा दी है। मंत्रालय ने छावनी परिषद को वेतन और पेंशन के भुगतान का इंतजाम खुद करने के आदेश दिए हैं। इतना ही नहीं, रक्षा मंत्रालय ने स्वीकृत बजट की राशि में भी भारी-भरकम कटौती कर दी है। पिछले बजट में जहां स्वीकृत बजट का 50 प्रतिशत हिस्सा रक्षा मंत्रालय ने जारी किया था, वहीं वर्ष 2013-14 के बजट का केवल 12 प्रतिशत धन ही अब तक जारी हो सका है।
छावनी परिषद लखनऊ में 400 कर्मचारी सफाई, स्वास्थ्य और अन्य अनुभागों में तैनात हैं। इन कर्मचारियों के वेतन के लिए छावनी परिषद को सालाना 18 करोड़ रुपये की जरूरत पड़ती है। साथ ही 200 पेंशनधारकों के लिए चार करोड़ का भुगतान परिषद हर वर्ष करता है। वर्ष 2011-12 के बजट तक सालाना 22 करोड़ रुपये वेतन और पेंशन का भुगतान रक्षा मंत्रालय ने नियमित रूप से किया था। वर्ष 2012-13 के बजट में मंत्रालय ने 50 प्रतिशत यानी 11 करोड़ रुपये का धन जारी किया। इस साल वर्ष 2013-14 के बजट में मंत्रालय ने वेतन और पेंशन की राशि जारी ही नहीं की। मंत्रालय ने दो माह पहले वाराणसी में हुए भारतीय रक्षा संपदा सेवा अधिकारियों के सम्मेलन में सभी छावनियों को वेतन और पेंशन की व्यवस्था खुद करने का निर्णय सुना दिया। इधर , छावनी परिषद के आय के स्रोत लगातार कम होने के कारण क्षेत्र के विकास के लिए जारी होने वाले धन को वेतन ओर पेंशन पर खर्च करना पड़ रहा है। यही कारण है कि मंत्रालय ने 23 मई को क्षेत्र के विकास के लिए वर्ष 2013-14 के 53 करोड़ रुपये के बजट से जो 6.88 करोड़ रुपये जारी किए थे, उसके हस्तांतरित न होने से वेतन और पेंशन के लाले पड़ गए।
नहीं बढ़े विकल्प
छावनी के मंगल पांडे रोड और सुल्तानपुर रोड पर टंचिंग ग्राउंड के पास मल्टीप्लेक्स कॉम्पलेक्स के निर्माण से परिषद को सालाना तीन से चार करोड़ रुपये की आय का प्रस्ताव तैयार हुआ था। जिन भूमि पर इन कॉम्पलेक्स का निर्माण होना था, वह ए-1 श्रेणी की रक्षा मंत्रालय की भूमि थी। इस भूमि पर निर्माण के प्रस्ताव को मंत्रालय ने स्वीकृत ही नहीं किया।
विज्ञापन
छावनी परिषद की मुख्य अधिशासी अधिकारी भावना सिंह ने बताया कि रक्षा मंत्रालय से जारी होने वाले धन से ही वेतन और पेंशन के साथ क्षेत्र का विकास करना होता है। कभी वाणिज्यिक वाहन से प्रवेश कर से परिषद को सालाना छह करोड़ रुपये की आमदनी होती थी। आज यह घटकर डेढ़ करोड़ रुपये तक आ गई है। बजट की मांग के अनुसार ही यदि धनराशि मिल जाए तो वेतन और पेशन की भी दिक्कत दूर हो जाएगी।
वहीं छावनी परिषद के उपाध्यक्ष रतन सिंघानिया ने बताया कि आर्थिक संकट लगातार बढ़ता जा रहा है। सालाना न्यूनतम 13 करोड़ रुपये सर्विस चार्ज की जरूरत पड़ती है। पिछले 22 साल में मंत्रालय पर लखनऊ छावनी का 56 करोड़ रुपये सर्विस चार्ज बकाया हो गया था। इसमें केवल 6.88 करोड़ रुपये ही मिले हैं। देश की सभी 62 छावनियों का 1500 करोड़ रुपये सर्विस चार्ज बकाया है। पिछले दिनों मंत्रालय ने केवल 155 करोड़ रुपये ही जारी किए हैं। क्षेत्र की महत्वपूर्ण योजनाएं ठंडे बस्ते में हैं।
विज्ञापन
छावनी परिषद लखनऊ में 400 कर्मचारी सफाई, स्वास्थ्य और अन्य अनुभागों में तैनात हैं। इन कर्मचारियों के वेतन के लिए छावनी परिषद को सालाना 18 करोड़ रुपये की जरूरत पड़ती है। साथ ही 200 पेंशनधारकों के लिए चार करोड़ का भुगतान परिषद हर वर्ष करता है। वर्ष 2011-12 के बजट तक सालाना 22 करोड़ रुपये वेतन और पेंशन का भुगतान रक्षा मंत्रालय ने नियमित रूप से किया था। वर्ष 2012-13 के बजट में मंत्रालय ने 50 प्रतिशत यानी 11 करोड़ रुपये का धन जारी किया। इस साल वर्ष 2013-14 के बजट में मंत्रालय ने वेतन और पेंशन की राशि जारी ही नहीं की। मंत्रालय ने दो माह पहले वाराणसी में हुए भारतीय रक्षा संपदा सेवा अधिकारियों के सम्मेलन में सभी छावनियों को वेतन और पेंशन की व्यवस्था खुद करने का निर्णय सुना दिया। इधर , छावनी परिषद के आय के स्रोत लगातार कम होने के कारण क्षेत्र के विकास के लिए जारी होने वाले धन को वेतन ओर पेंशन पर खर्च करना पड़ रहा है। यही कारण है कि मंत्रालय ने 23 मई को क्षेत्र के विकास के लिए वर्ष 2013-14 के 53 करोड़ रुपये के बजट से जो 6.88 करोड़ रुपये जारी किए थे, उसके हस्तांतरित न होने से वेतन और पेंशन के लाले पड़ गए।
विज्ञापन
नहीं बढ़े विकल्प
छावनी के मंगल पांडे रोड और सुल्तानपुर रोड पर टंचिंग ग्राउंड के पास मल्टीप्लेक्स कॉम्पलेक्स के निर्माण से परिषद को सालाना तीन से चार करोड़ रुपये की आय का प्रस्ताव तैयार हुआ था। जिन भूमि पर इन कॉम्पलेक्स का निर्माण होना था, वह ए-1 श्रेणी की रक्षा मंत्रालय की भूमि थी। इस भूमि पर निर्माण के प्रस्ताव को मंत्रालय ने स्वीकृत ही नहीं किया।
विज्ञापन
छावनी परिषद की मुख्य अधिशासी अधिकारी भावना सिंह ने बताया कि रक्षा मंत्रालय से जारी होने वाले धन से ही वेतन और पेंशन के साथ क्षेत्र का विकास करना होता है। कभी वाणिज्यिक वाहन से प्रवेश कर से परिषद को सालाना छह करोड़ रुपये की आमदनी होती थी। आज यह घटकर डेढ़ करोड़ रुपये तक आ गई है। बजट की मांग के अनुसार ही यदि धनराशि मिल जाए तो वेतन और पेशन की भी दिक्कत दूर हो जाएगी।
वहीं छावनी परिषद के उपाध्यक्ष रतन सिंघानिया ने बताया कि आर्थिक संकट लगातार बढ़ता जा रहा है। सालाना न्यूनतम 13 करोड़ रुपये सर्विस चार्ज की जरूरत पड़ती है। पिछले 22 साल में मंत्रालय पर लखनऊ छावनी का 56 करोड़ रुपये सर्विस चार्ज बकाया हो गया था। इसमें केवल 6.88 करोड़ रुपये ही मिले हैं। देश की सभी 62 छावनियों का 1500 करोड़ रुपये सर्विस चार्ज बकाया है। पिछले दिनों मंत्रालय ने केवल 155 करोड़ रुपये ही जारी किए हैं। क्षेत्र की महत्वपूर्ण योजनाएं ठंडे बस्ते में हैं।