कबूतरबाजों के गैंग का पर्दाफाश, चार धरे गए

Lucknow Updated Fri, 21 Dec 2012 05:30 AM IST
लखनऊ। नाका पुलिस ने बृहस्पतिवार को चारबाग में एक होटल के बेसमेंट में स्थित शॉप से चार जालसाजों को गिरफ्तार करके कबूतरबाजों के गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस के अनुसार अब तक अस्सी बेरोजगारों से 44 लाख रुपए गिरोह के ऐंठने की बात सामने आई है। पूछताछ में चारों ने कुछ और साथियों के नाम कबूले हैं जिनकी तलाश की जा रही है। एसआई राजीव कुमार सिंह के मुताबिक देवरिया से कई शिकायतें इनके खिलाफ मिली थी। यहां के गौरी बाजार के अजय राज और भाटपार रानी के शकील अहमद, उनके भाई जमील अहमद ने बताया था कि चारबाग के विश्वनाथ होटल के बेसमेंट स्थित 19 नंबर शॉप में डेल्टा कंसल्टेंसी नाम की कंपनी है। इस कंपनी ने नौकरी के लिए विदेश भेजने का झांसा देकर उनसे प्रति व्यक्ति पचपन हजार रुपए के हिसाब से 1.65 लाख रुपए ऐंठ लिए। शकील ने देवरिया के बीस और बेरोजगारों के हस्ताक्षरयुक्त शिकायत भी सौंपी। शिकायत सही पाए जाने पर दबिश दी गई। पूछताछ में जालसाजों की पहचान मूलरूप से देवरिया के नगर कोतवाली एवं हाल पता ठाकुरगंज के कैम्पवेल रोड निवासी अब्दुल सलाम उर्फ हसन, उन्नाव के अब्बासबाग के आसिफ अहमद, देवरिया के बैतालपुर एवं हाल पता ठाकुरगंज कैम्पवेल रोड निवासी रमेश पांडेय व पंजाब के कपूरथला एवं हाल पता ठाकुरगंज निवासी देवेंद्र सिंह गिल के रूप में हुई।
गिल है गिरोह का सरगना ः पुलिस के अनुसार गिरोह का सरगना देवेंद्र गिल है। देवेंद्र दो साल पूर्व दुबई से लौटकर आया है। उसके बाद दफ्तर खोलकर एजेंटों के जरिए खेल कर रहा था। अब्दुल सलाम कंप्यूटर का मास्टर है। जबकि, आसिफ इंटर पास है। पुलिस ने कंपनी के दफ्तर से पच्चीस हजार रुपए नगद, दो कंप्यूटर, एक लैपटॉप, फर्जी दस्तावेज, फोटोग्राफ व मेडिकल सर्टिफिकेट, बरामद हुए हैं। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि एक व्यक्ति से पचपन हजार रुपए वसूलते थे।
मेडिकल सर्टिफिकेट से शुरू होती वसूली ः जालसाज नेट व समाचार पत्रों में विज्ञापन देकर बेरोजगारों को अपने जाल में फंसाते थे। फिर उन्हें दफ्तर बुलाते और मेडिकल प्रमाण पत्र के लिए 2800 रुपए वसूलते। मेडिकल प्रमाण पत्र बनने के बाद वीजा के लिए अप्लाई करने की बात कही जाती।
जाली वीजा तैयार करता था गैंग ः गिल एजेंटो के जरिए वीजा तैयार कर मलेशिया व सिंगापुर भेजने का झांसा देता था। शिकार के आने से वह दफ्तर में दो से तीन लोगों को बैठा लेता था। विश्वास दिलाने के लिए नए ग्राहक का उनसे परिचय करता था कि यह युवक विदेश में नौकरी कर रहे हैं।ठगी का शिकार बनने वालों में 20 सिर्फ देवरिया के रहने वाले हैं। शिकार फंसने के बाद गिरोह उसका पासपोर्ट हथिया लेता था। रकम ऐंठने के बाद जाली वीजा व अन्य दस्तावेज तैयार किए जाते। हालांकि आरोपियों ने अभी इसका खुलासा नहीं किया कि वे जाली वीजा कहां से लाते थे।
फर्जी मिला श्रम आयुक्त दफ्तर का रजिस्ट्रेशन ः कबूतरबाजों ने बताया कि उन्हें श्रम आयुक्त कार्यालय से प्रमाण पत्र हासिल है और वह जालसाजी नहीं कर रहे हैं। पुलिस ने श्रम कार्यालय से प्रमाण पत्र की जांच कराई। जांच में वह फर्जी पाया गया।
ट्रांजिट प्वाइंट बना लखनऊ ः कबूतरबाजों ने लखनऊ को ट्रांजिट प्वाइंट बना लिया है। एजेंटों के माध्यम से विभिन्न जिलों के लोगों को जाल में फंसाते हैं। विदेश में अच्छी नौकरी का झांसा देकर रकम ऐंठने के बाद उन्हें लंबे समय तक टरकाते हैं। कुछ लोग हताश होकर चुप बैठ जाते हैं तो कुछ को फर्जी वीजा थमाकर शांत कर दिया जाता है।

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