Geeta Jayanti 2020: 25 दिसंबर को गीता जंयती, गीता के उपदेश में है जीवन के सार
गीता जयंती हर वर्ष हिंदू पंचाग के अनुसार मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है।
विस्तार
25 दिसंबर को गीता जयंती है। गीता जयंती हर वर्ष हिंदू पंचाग के अनुसार मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। इस एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहते हैं। इस तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। तभी से इस तिथि पर गीता जयंती मनाई जाती है। महाभारत में कुरुक्षेत्र के मैदान में जब अर्जुन ने अपने सगे-संबंधियों से युद्ध करने से मना कर दिया था तब, भगवान कृष्ण ने अर्जुन के मोह को दूर करने के लिए गीता का उपदेश दिया था। गीता के उपदेश में जीने की कला और प्रबंधन के बारे में विस्तार से बताया गया है।
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1. आत्मा न तो जन्म लेती है और न ही मरती है। (२.२०)
2. जो अपने मन को नियंत्रित नहीं करते उनका मन ही उनका सबसे बड़ा शत्रु है। (६.६)
3. हर इंसान को अपने नियत कर्म करने चाहिए, क्योंकि कर्म न करने की अपेक्षा कर्म करना श्रेष्ठ है। (३.८)
4. यदि वास्तविक शांति प्राप्त करनी है तो इच्छाओं से ऊपर उठना पड़ेगा। (२.७१)
5. वर्ण विभाजन (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शुद्र) संबधित कर्म के अनुसार किये गए हैं । (४.१३)
6. भगवान पर किसी कर्म का प्रभाव नहीं पड़ता और न ही वो किसी कर्म बंधन में बंधते हैं। (४.१४)
7. ज्ञान को प्राप्त करने के लिए विनम्रता आवश्यक है। (४.३४)
8. दुष्ट तथा मुर्ख लोग भगवान की शरण ग्रहण नहीं करते। (७.१५)
9. प्रकृति निरंतर परिवर्तित होती रहती है। (८.४)
10. अंत समय में जो जिस भाव का स्मरण करता है वो उसी भाव को प्राप्त होता है । (८.६)
11. भगवान को जानने के लिए एकमात्र साधन हैं भक्ति । (१८.55)
12. भगवान सबके ह्रदय में विराजमान हैं और उन्ही से ही स्मृति तथा विस्मृति आती है। (१५.१५)
13. जहाँ भगवान हैं वहां ऐश्वर्य, विजय और अलौकिक शक्ति हमेशा रहती है । (१८.७८)
14. काम, क्रोध तथा लोभ ये तीन नरक के द्वार हैं । (१६.२१)
15. इस संसार में सारे जीव भगवान के ही अंश हैं । (१५.७)
16. भगवान समस्त आध्यात्मिक तथा भैतिक जगतों के कारण हैं और उनसे ही प्रत्येक वस्तु उत्पन्न होती है। (१०.८)
17. जिनकी बुद्धि अनेक शाखाओं में विभाजित रहती है वो अपने लक्ष्य को कभी प्राप्त नहीं कर पाते। (२.४१)