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Basti Ground Report: बस्ती में विकास के दावों की क्या है हकीकत, किन मुद्दों पर अभी काम की जरूरत? देखें रिपोर्ट

Wed, 01 Apr 2026 05:23 PM IST
Akash Dubey अमर उजाला नेटवर्क, बस्ती
अमर उजाला नेटवर्क, बस्ती Published by: Akash Dubey Updated Wed, 01 Apr 2026 05:23 PM IST
सार

अमर उजाला टीम ने चुनाव से पहले बस्ती में जमीनी हकीकत परखी। इंजीनियरिंग व मेडिकल कॉलेजों के छात्रों ने टीम ने बातचीत की। किसानों के बीच जाकर उनसे जाना कि अब जीवन में क्या बदलाव आया है।

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Ground Report What is reality of claims of development in Basti see this report
लोगों ने रखे अपने-अपने विचार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश में आगामी चुनाव के मद्देनजर मार्च महीने में ही सियासी पारा चढ़ गया है। रोजगार, महंगाई और बुनियादी सुविधाएं जैसे मुद्दे राजनीतिक चर्चाओं में आने लगे हैं। अमर उजाला की टीम जमीनी हकीकत परखने और आमजन के मुद्दों को तलाशते हुए बस्ती पहुंची। यहां हमारी टीम ने लोगों के बीच जाकर उनके विचार जानें और यह समझा कि क्या कुछ परिवर्तन आया है और अभी भी कहां कमी रह गई है।  

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बस्ती के राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में युवाओं से की बात 
कॉलेज के निदेशक प्रो. कुलदीप सहाय ने बताया कि संस्थान में अभी चार ब्रांच चल रही हैं। इस समय 436 बच्चे पढ़ रहे हैं। बस्ती में कॉलेज की स्थापना के बाद इंजीनियरिंग करने की इच्छा रखने वाले युवाओं को जिले से बाहर नहीं जाना पड़ता। छात्र संदीप ने बताया कि हॉस्टल और फैकल्टी अच्छी है। छात्रा आयुषी मिश्रा ने बताया कि मैंने सोचा दिल्ली का वातावरण अलग है। मेरे लिए दिल्ली का वातावरण अलग हो गया था। लेकिन जब यहां आई और चीजें देखीं तब नजरिया बदला। 
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यहां देखें पूरी बातचीत-
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चिकित्सा के क्षेत्र में क्या आया बदलाव?
चिकित्सा के क्षेत्र में आए बदलाव को जानने के लिए हम महर्षि वशिष्ठ राजकीय मेडिकल कॉलेज पहुंचे। 2019 में जिले को इसकी सौगात मिली थी। कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि 2019 में 100 बच्चों का एडमिशन हुआ था। 2020 में इस पूरे अस्पताल का हैंडओवर लिया गया। कोरोना काल में आसपास के जिलों के मरीज उस दौरान भर्ती और उनको बेहतर इलाज मिल सका। एमबीबीएस द्वितीय वर्ष की छात्रा दीप्ति कुमावत ने बताया कि फैकल्टी अच्छी है, कैंपस अच्छा है। यहां पर सभी उपकरण उपलब्ध हैं। एक दूसरी छात्रा बबिता यादव ने बताया कि अनुभव के चलते इस कॉलेज को चुना। यहां का स्टाफ काफी सहयोग करने वाला है।

यहां देखें पूरी बातचीत-


किसानों के जीवन में क्या आया बदलाव?
इस सवाल का सच जानने के लिए हम मुंडेरवा चीनी मिल पहुंचे। यहां के अधिकारी महेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि 2017 में यहां चीनी मिल बनाने की शुरुआत हुई। रिकॉर्ड 10 महीने में चीनी मिल बनकर तैयार हुई। 2018-19 में पेराई सत्र की शुरुआत की। चीनी मिल बनने से यहां के गन्ना किसान को काफी लाभ पहुंचा, फसल लेकर उनको दूर नहीं जाना पड़ता है। गन्ना किसान रामभुज चौधरी ने बताया कि पहले बिकने में दिक्कत होती थी। दूर ढुलाई होती थी। मिल चलने से सारी दिक्कतें दूर हो गईं। समय पर भुगतान हो रहा है।

यहां देखें पूरी बातचीत-
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